कहा रजा भोज कहा गंगू तेली ! कित मेल करा स इस चोर का | भगत सिंह ने जब जान देने की कही तो उसने जान दे कर भी दिखाई | और भगत सिंह जिस वक़्त भागा था उस वक़्त वो जनता के बीच से नहीं एक अंग्रेज का क़त्ल करके भागा था , जब जनता के बीच में आकर उसने कारवाई करी तो भागा नहीं जान ही दे दी शेर ने | जैसे यो बाबा ड्रामा कर रहा हैं की पुलिस मार देती ऐसे कोई नहीं मारता वो भी नेता को | हमने भी करे होंगे आन्दोलन पुलिस फौज भी आई होगी कोई मरा भी होगा पर यु नहीं भागे | रविंदरजीत भाई के सिगनेचर वाली बात हैं " कायर लोग अहिन्शा का सहारा लेते हैं | लाख आदमियों ( बाबा के अनुसार ) के बीच से भी वेश बदल कर भागना पड़ता हैं तो शर्म की बात स इसी जमात पर | जैसा कायर नेता वैसी कायर उसकी फ़ौज |
जीत भाई कौन कह स के यो गरीब का खून नहीं चूसता , एक उदाहरण तो मैंने दे दिया हैं किसानो वाला | रही बात खुद करने वाली तो तैने के बेरा औरो का के कुछ नहीं करते , करते हैं तभी तो इस ठग का पता हैं की इस भ्रष्टाचार के मुद्दे के पीछे इसकी और इसके फ़ाइनन्सरो की क्या मंशा हैं | अब इस बाबा के पीछे या भाजपा आ गई जणू तो ये दूध के धुले स |
इनने ता वाहे करदी ' एक गाँव में 5 -6 गुंडे किस्मे के लड़के थे | उनसे सारा गाँव परेशान कोई डरता न बोले | एक दिन गाँव वालो ने उनका इलाज करने के लिए पंचायत भुला ली | अब उन लड़को को भी पता चल गया के उनके इलाज के लिए पंचायत भुला रखी हैं तो वे भी उसमे पहुच गए | जा कर बोले बताओ किसका इलाज करना स , सारा गाँव उठ कर चल दिया के ये तो यहाँ भी आ लिए | तो वोही बात स की ये चोर तो अब आपके बाबा की तरफ भी आ लिए |
भ्रष्टाचार मिटाना स तो खुद ठीक हो जाओ भ्रष्टाचार तो ख़त्म हुआ पड़ा हैं | बाबा के कहने से ख़त्म नहीं होगा , लोगो को खुद का ज़मीर जगाना पड़ेगा | इस देश में ये नेता और बाबा लोग एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं |