हमारे समाज में औरत का एक महतवपूर्ण और सम्मानजनक स्थान है | वो माँ के रोल में भी है.... बहिन भी.. बेटी भी....और बीवी भी .....उसने "सरस्वती" का रूप भी लिया है और "दुर्गा" का भी....... वो "राखी सावंत" जैसी बदनाम भी है और "सायिना नेहवाल" जैसी होनहार खिलाडी भी .....वो फूलन देवी जैसी डकैत भी है और किरण बेदी जैसी सशंक्त पुलिस ऑफिसर भी...... लेकिन किसी भी रोल में उसका महत्व कम नहीं हो जाता...अगर कोई यह सोचे की बीवी पाँव की जूती है.......तो फिर याद रखो की आपकी माँ भी किसी के पाँव की जूती है.....और आपकी बेटी भी किसी के पाँव की जूती बनेगी..... क्या यह आपको बर्दाश्त होगा? शायद नहीं ..पुराने जमाने में क्या था और क्या नहीं...उसके
भाई सांगवान साहब हमने तो आज से पहले कोई तुलना
नही की ओरत और मर्द की . ये तो खरब साहब ने धागा
शुरु कर दिया की ,, जोरू का गुलाम ,, तो मर्द होने के नाते
जवाब भी देना चाहिए था हमें . और दीपिका जी को ओरत होने
के नाते बहस भी करनी थी . वो उनका फ़र्ज़ था . पर आप कोण
सी कैटेगिरी में आते हो जो मर्द होकर अपनी जाती की तरफ नै
बोलकर ओरतो की तरफ बोल रहे हो . यहाँ बात माँ , बहन , या
बेटी के ऊपर नही चल रही थी , केवल पति - पत्नी के ऊपर चल रही
थी . हमें भी पता है ओरत दुर्गा , लक्ष्मी , काली , लक्ष्मीबाई , सानिया
मिर्जा , शिला दिक्षित , सोनिया गाँधी , और भी बहुत महान हस्तिया है .
पर मर्द भी शिवजी , विष्णु , कृषण, राम . महात्मा गाँधी , मनमोहन सिंह
और भी महान हस्तिया है .