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ऋतिका राठी का धागा baddd ka peddd पढ़ा - बहुत अच्छा लगा । इस घी-बूरा के बारे में और भी धागे हैं - सभी एक से एक बढ़कर - ghee boora और bataeu ki sewa (susraad special).
कुछ दिन पहले मैने भी एक धागा लिखा था - Ghee, Boora aur Sakkar जिस पर अब ताला लग गया है । आजकल पुराने धागों पर 'automatic lock' लगना शुरू हो गया है, नहीं तो उसी से मिलता-जुलता किस्सा लिखने के लिए मुझे यह नया धागा क्यूं शुरू करना पड़ता ? चलो, पढ़ लो नीचे ।
सत्तू अपनी ससुराल गया । उन दिनों गावों में बिजली थी ही नहीं । सांझ हो गई । उसकी ससुराल वालों के पास एक ही लालटेन थी जो चूल्हे के पास रखी थी जहां उसकी सास खाना पका रही थी ।
सत्तू को बाहर बगड़ में खाट पर बैठा दिया, अंधेरे में । एक बड़ी सी थाली में खांड-बूरा और रोटी रख दी उसके सामने । सत्तू ने देखा कि बूरा तो सूखी पड़ी है, उसमें घी बिल्कुल नहीं डाल रक्खा था - समझ गया कि उसकी सास ने तो कंजूसी दिखा दी ।
सत्तू ने एक चाल सोची और जोर से चिल्ला पड़ा - "अरै, बिच्छू - बिच्छू, तावळे आइयो" ।
उसकी सास लालटेन ले कर भागी आई और बोली - कित सै बिच्छू ? सत्तू बोल्या - इस बूरा में बड़-ग्या ।
सास ने एक चम्मच ले कर सूखी बूरा सारी थाळी में फैला दी और बोली - इसमें तै कुछ कोनी ।
सत्तू बोल्या - इसमें कुछ होता तै मैं इसनै खा-ए ना लेता !!
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ऋतिका राठी का धागा baddd ka peddd पढ़ा - बहुत अच्छा लगा । इस घी-बूरा के बारे में और भी धागे हैं - सभी एक से एक बढ़कर - ghee boora और bataeu ki sewa (susraad special).
कुछ दिन पहले मैने भी एक धागा लिखा था - Ghee, Boora aur Sakkar जिस पर अब ताला लग गया है । आजकल पुराने धागों पर 'automatic lock' लगना शुरू हो गया है, नहीं तो उसी से मिलता-जुलता किस्सा लिखने के लिए मुझे यह नया धागा क्यूं शुरू करना पड़ता ? चलो, पढ़ लो नीचे ।
सत्तू अपनी ससुराल गया । उन दिनों गावों में बिजली थी ही नहीं । सांझ हो गई । उसकी ससुराल वालों के पास एक ही लालटेन थी जो चूल्हे के पास रखी थी जहां उसकी सास खाना पका रही थी ।
सत्तू को बाहर बगड़ में खाट पर बैठा दिया, अंधेरे में । एक बड़ी सी थाली में खांड-बूरा और रोटी रख दी उसके सामने । सत्तू ने देखा कि बूरा तो सूखी पड़ी है, उसमें घी बिल्कुल नहीं डाल रक्खा था - समझ गया कि उसकी सास ने तो कंजूसी दिखा दी ।
सत्तू ने एक चाल सोची और जोर से चिल्ला पड़ा - "अरै, बिच्छू - बिच्छू, तावळे आइयो" ।
उसकी सास लालटेन ले कर भागी आई और बोली - कित सै बिच्छू ? सत्तू बोल्या - इस बूरा में बड़-ग्या ।
सास ने एक चम्मच ले कर सूखी बूरा सारी थाळी में फैला दी और बोली - इसमें तै कुछ कोनी ।
सत्तू बोल्या - इसमें कुछ होता तै मैं इसनै खा-ए ना लेता !!
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