kasuti sewa kari .......

raka

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हर इंसान का अपना अपना सभाव हो स , ज्युकर ब्याह शादी का न्योता आजा तो कई तो बाँट देखा करे अक कोई ब्याह हो आर जीमण जाऊ आगला बुलाओ चाहे ना बुलाओ ..मेरे बर्गा :)
एक होया करे रविन्द्र्जीत बर्गा जो न्योता आये पाछे थोड़े नखरे त जा और एक होया करे समर बर्गा जम्मा अखड़ अनाड़ी जो नाई के न्योते पाछे जद तक आगले ब्याह आल्ले बुलान नहीं आवे इतने कोणी जा .......

इसी ऐ किस्म के तीन कुते थे माहरी गाल में ......एक बार माहरी पड़ोस की परस में एक ब्याह था , तो जो पहले वाला कुता था उसके तो चा चढ़ गया ब्याह का... उसने जीम के आना ही आना .... गया जीमण दो-तीन पलेट चाटी थी इतने में ब्याह आल्ला की नजर पड़ गई मारा बांगड़ बेचारा पार आया ....... राह में दुसरे आल्ला रविन्र्जीत जिसे सभाव आल्ला कुता मिल गया बोला र कित त आया स ... उसने बताई के ब्याह में जीम के आया सु तेरा न्योता कोणी आया के ? ....रविन्द्र्जीत बोल्या हाँ नाई आया तो था ले मैं भी जीम आऊ सु ना त बुरा मान जांगे ..............गया उड़े पांच -छः पलेट चाटी थी इतने फेर किसे की नजर पड़ गई अक कुता फेर आ बड़ा मारा बगा के बांगड़ इसके ...यो भी पार आया ........दोनु अपने मुह चाटते पहुचे समर धोरे ....समर ने पूछी कित जीम आए .....इस्ते बताई के ब्याह में त आये सा तेरा न्योता नहीं आया के .....बोल्या आया तो था पर आगले खुद कोणी आये रविन्द्र बोल्या जीम आ के धरा स मरोड़ में .....इसने भी सोची ले क्यों भूखा मरा करा काम ......यो भी चल दिया जीमण.......न्युने ब्याह आल्ले इन कुत्या त दुखी आ लिए आर चार-पांचा की ड्यूटी लगा दी के जो लाड़ दिखे उसकी देहि बदा दयो ......समर बड़ा टेंट में बेचारे ने इबे एक-दो पलेट चाटी थी के ब्याह आल्ला की नजर पड़ गई आर चौगरदे क घेर क इसकी देहि नो गज की कर दी मसाह सी जान बचा के लिकड़ा उड़े त यो ......पंहुचा ठिकाने पर ...इब आड़े दोनु बाँट देखे थे समर की अक किसे भोरे खा के आवे दिखा ..रविन्द्र बोल्या ..जीम आया भाई ....समर बोल्या हाँ भाई जीम आया .......कसुती सेवा करी मेरे बेट्या ने ...चौगरदे के फिरगे बोले आज आज तो रुक ऐ जाओ चौधरी साहब , मुश्किल त हाथ पाँव जोड़ के आया सु के जान दो जरुरी काम स ;)
 
हर इंसान का अपना अपना सभाव हो स , ज्युकर ब्याह शादी का न्योता आजा तो कई तो बाँट देखा करे अक कोई ब्याह हो आर जीमण जाऊ आगला बुलाओ चाहे ना बुलाओ ..मेरे बर्गा :)
एक होया करे रविन्द्र्जीत बर्गा जो न्योता आये पाछे थोड़े नखरे त जा और एक होया करे समर बर्गा जम्मा अखड़ अनाड़ी जो नाई के न्योते पाछे जद तक आगले ब्याह आल्ले बुलान नहीं आवे इतने कोणी जा .......

इसी ऐ किस्म के तीन कुते थे माहरी गाल में ......एक बार माहरी पड़ोस की परस में एक ब्याह था , तो जो पहले वाला कुता था उसके तो चा चढ़ गया ब्याह का... उसने जीम के आना ही आना .... गया जीमण दो-तीन पलेट चाटी थी इतने में ब्याह आल्ला की नजर पड़ गई मारा बांगड़ बेचारा पार आया ....... राह में दुसरे आल्ला रविन्र्जीत जिसे सभाव आल्ला कुता मिल गया बोला र कित त आया स ... उसने बताई के ब्याह में जीम के आया सु तेरा न्योता कोणी आया के ? ....रविन्द्र्जीत बोल्या हाँ नाई आया तो था ले मैं भी जीम आऊ सु ना त बुरा मान जांगे ..............गया उड़े पांच -छः पलेट चाटी थी इतने फेर किसे की नजर पड़ गई अक कुता फेर आ बड़ा मारा बगा के बांगड़ इसके ...यो भी पार आया ........दोनु अपने मुह चाटते पहुचे समर धोरे ....समर ने पूछी कित जीम आए .....इस्ते बताई के ब्याह में त आये सा तेरा न्योता नहीं आया के .....बोल्या आया तो था पर आगले खुद कोणी आये रविन्द्र बोल्या जीम आ के धरा स मरोड़ में .....इसने भी सोची ले क्यों भूखा मरा करा काम ......यो भी चल दिया जीमण.......न्युने ब्याह आल्ले इन कुत्या त दुखी आ लिए आर चार-पांचा की ड्यूटी लगा दी के जो लाड़ दिखे उसकी देहि बदा दयो ......समर बड़ा टेंट में बेचारे ने इबे एक-दो पलेट चाटी थी के ब्याह आल्ला की नजर पड़ गई आर चौगरदे क घेर क इसकी देहि नो गज की कर दी मसाह सी जान बचा के लिकड़ा उड़े त यो ......पंहुचा ठिकाने पर ...इब आड़े दोनु बाँट देखे थे समर की अक किसे भोरे खा के आवे दिखा ..रविन्द्र बोल्या ..जीम आया भाई ....समर बोल्या हाँ भाई जीम आया .......कसुती सेवा करी मेरे बेट्या ने ...चौगरदे के फिरगे बोले आज आज तो रुक ऐ जाओ चौधरी साहब , मुश्किल त हाथ पाँव जोड़ के आया सु के जान दो जरुरी काम स ;)

badhiya majak tha
 
भाई सेवा की बात तो इसी है आजकल कोए आवे आर उसने दारु प्या के टल्ली कर दयो फेर चाहे रोटी दयो न दो , खाट दयो ना दयो चाहे पूरी रात नाली में पड़ा रहो सबेरे कहवेगा बही बड़ी करी रे ! आर उसने बढ़िया पनीर की सब्जी, घी का चूरमा /हलवा और दूध में नुहवा दयो न्यू कह्गा " ना रे कीमे ना सेवा सावा"





और बात दूसरी तो यू पहलम भी कई बार मार्केट में आ लिया बस इबके कुछ रांडया के नाम जुड़ रहे थे आर पहलम सुनानिये ने कटती तोड़ कर राख्या था !
 
भाई सेवा की बात तो इसी है आजकल कोए आवे आर उसने दारु प्या के टल्ली कर दयो फेर चाहे रोटी दयो न दो , खाट दयो ना दयो चाहे पूरी रात नाली में पड़ा रहो सबेरे कहवेगा बही बड़ी करी रे ! आर उसने बढ़िया पनीर की सब्जी, घी का चूरमा /हलवा और दूध में नुहवा दयो न्यू कह्गा " ना रे कीमे ना सेवा सावा"







और बात दूसरी तो यू पहलम भी कई बार मार्केट में आ लिया बस इबके कुछ रांडया के नाम जुड़ रहे थे आर पहलम सुनानिये ने कटती तोड़ कर राख्या था !


में भी बाट देखूं था ,अक इह के खोंशाड़े कोड बे सी लागेंगे | इब्ब राजी भाई राका , होगी तेरी भी सेवा |इब्ब तू उस परस में पसारा मार के पड्या रह |​
 
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