ravinderjeet
New member
राकेश खूंढ़े की डाक्टरी की दूकान फेल होगी | रलदू ने उह के बांगड़ मार दिए थे | तो उह ने टोपी बेचन का धंधा सुरु कर्या | एक दिन वो दोफारी में आप्णा साइकल रुंख के सहारे ला के अर सो गा | उह रूंख पे बाँदर रह्या करदे | वे उह की सारी टोपी झोले में तें काढ के अर सर पे पहर के ने उह ने चिडान लागे | राकेश खूंढ़े के आपणे दादा की सुनाई होड़ कहाणी याद आई अक क्यूकर टोपी बग़ा के मारे तें सारे बांदराँ ने भी टोपी बागा दी थी | राकेश खूंढ़ा भी आपनी पहरी होड़ टोपी बग़ा दे स | एक मोटा सा बाँदर रुंख पे तें उतर के ने आया अर वा टोपी ठा कें ने बोल्या " साले तू के समझे स ,म्हारे दादा ने के वा कहाणी सुनाई ना थी "|