ravinderjeet
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राकेश खूंढ़े ने कई बिजनेस कर के देख लिए पर आई बरियाँ किम्मे ना किम्मे खटेबा हो जा था | इबके उहने काकडीयाँ की रेहड़ी ला ली | पह्ल्डा -ए दिन था | समरू लांडा उड़े के जावे था |
समरू लांडा ------- आ भाई ये काकडी के भा दी ?
राकेश खूंढ़ा ------- १० रपिये किलो |
समरू लांडा ---------- जा सारी मोल ले ल्यूं तो , के भा दे गा ?
राकेश खूंढ़ा ---------- सारी ना बेचूं |
समरू लांडा -----------क्यूँ ?
राकेश खूंढ़ा -------------- फेर साबत दन में के करूंगा |
समरू लांडा ------- आ भाई ये काकडी के भा दी ?
राकेश खूंढ़ा ------- १० रपिये किलो |
समरू लांडा ---------- जा सारी मोल ले ल्यूं तो , के भा दे गा ?
राकेश खूंढ़ा ---------- सारी ना बेचूं |
समरू लांडा -----------क्यूँ ?
राकेश खूंढ़ा -------------- फेर साबत दन में के करूंगा |