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(This post is in Devanagari script. If there is difficulty in reading the text, there is need to install ‘Mangal’ font.)
किस्मत का उल्टा चक्कर
पुराने समय की बात । आम तौर पर अगर 3-4 भाई होते तो उनमें से एक कुंवारा रह जाया करता था ।
एक चौधरी साहब के चार बेटे थे । बड़ा भाई हल जोतता था । उससे छोटे (No. 2) का नाम फत्ते था जो निरा मूढ़-गवार और बहकटा* था । सबसे छोटे (No. 3-4) दोनों लड़के कुछ पढे-लिखे थे ।
बड़े भाई का ब्याह हो गया । ब्याह के बाद वो घर-गृहस्थी में व्यस्त हो गया और हल जोड़ने और दूसरे खेती के काम फत्ते के ऊपर आ पड़े ।
फिर किसी ने फत्ते को बहका दिया कि “तेरे बड्डै भाई का तै ब्याह हो-ग्या। तेरे दोनूं छोटे भाई पढे-लिखे सैं, तेरा बाबू उनका ब्याह करवावैगा और तन्नै कंवारा राखैगा । सारी जमीन के मालिक उनके बाळक होंगे - तू तै ब्याह राख्या ना - फिर तू क्यूं सारा दिन हळ जोड़ै सै और दूसरां ताहीं कमावै सै ?”
फत्ते बहकावे में आ गया और उसने चौधरी पर दबाव बनाना शुरू किया कि मेरा भी ब्याह करवा दे ! चौधरी के पास जमीन कम थी और डरता था कि फत्ते का ब्याह होने पर जमीन का बंटवारा हो जायेगा - और वैसे भी उस मूढ़-गवार का ब्याह होना मुश्किल है ।
चौधरी ने यह समस्या गांव के कुछ और बुजुर्ग लोगों को बताई । उन बुजुर्गों ने फत्ते को समझाना शुरू किया - "अरै फत्ते, तू क्यूं फिक्र कर रहया सै? तेरे-तैं पहल्यां तै यो बड्डा भाई मरैगा, फेर उसकी बहू तेरै धोरै-ए तै रहैगी ! थोड़ा सब्र कर ले, क्यूं ब्याह का खर्चा करवावै सै?"
फत्ते फिर बहकावे में आ गया और इन्तजार करने लगा कि कब बड़े भाई की मौत हो और उसकी घरवाली उसके पल्ले बांधी जाये ।
कुछ दिन बाद बदकिस्मती से हो गया उल्टा काम - उन चारों भाईयों में से सबसे छोटे की मौत हो गई ! गांव के आदमी इकट्ठे हो गये । उन्होंने देखा कि फत्ते तो घर के एक कोने में मुंह लटकाये बैठा है । जब एक बुजुर्ग ने फत्ते के कंधे पर हाथ रक्खा, तो फत्ते बोल उठा :
"ओह तेरी कै ! करम* की बात तै देखो - कित ओड़ तैं* नम्बर लाग्या सै !!"
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बहकटा - जो जल्दी बहकावे में आ जाये
करम की बात - किस्मत का खेल
कित ओड़ तैं – किस तरफ से
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किस्मत का उल्टा चक्कर
पुराने समय की बात । आम तौर पर अगर 3-4 भाई होते तो उनमें से एक कुंवारा रह जाया करता था ।
एक चौधरी साहब के चार बेटे थे । बड़ा भाई हल जोतता था । उससे छोटे (No. 2) का नाम फत्ते था जो निरा मूढ़-गवार और बहकटा* था । सबसे छोटे (No. 3-4) दोनों लड़के कुछ पढे-लिखे थे ।
बड़े भाई का ब्याह हो गया । ब्याह के बाद वो घर-गृहस्थी में व्यस्त हो गया और हल जोड़ने और दूसरे खेती के काम फत्ते के ऊपर आ पड़े ।
फिर किसी ने फत्ते को बहका दिया कि “तेरे बड्डै भाई का तै ब्याह हो-ग्या। तेरे दोनूं छोटे भाई पढे-लिखे सैं, तेरा बाबू उनका ब्याह करवावैगा और तन्नै कंवारा राखैगा । सारी जमीन के मालिक उनके बाळक होंगे - तू तै ब्याह राख्या ना - फिर तू क्यूं सारा दिन हळ जोड़ै सै और दूसरां ताहीं कमावै सै ?”
फत्ते बहकावे में आ गया और उसने चौधरी पर दबाव बनाना शुरू किया कि मेरा भी ब्याह करवा दे ! चौधरी के पास जमीन कम थी और डरता था कि फत्ते का ब्याह होने पर जमीन का बंटवारा हो जायेगा - और वैसे भी उस मूढ़-गवार का ब्याह होना मुश्किल है ।
चौधरी ने यह समस्या गांव के कुछ और बुजुर्ग लोगों को बताई । उन बुजुर्गों ने फत्ते को समझाना शुरू किया - "अरै फत्ते, तू क्यूं फिक्र कर रहया सै? तेरे-तैं पहल्यां तै यो बड्डा भाई मरैगा, फेर उसकी बहू तेरै धोरै-ए तै रहैगी ! थोड़ा सब्र कर ले, क्यूं ब्याह का खर्चा करवावै सै?"
फत्ते फिर बहकावे में आ गया और इन्तजार करने लगा कि कब बड़े भाई की मौत हो और उसकी घरवाली उसके पल्ले बांधी जाये ।
कुछ दिन बाद बदकिस्मती से हो गया उल्टा काम - उन चारों भाईयों में से सबसे छोटे की मौत हो गई ! गांव के आदमी इकट्ठे हो गये । उन्होंने देखा कि फत्ते तो घर के एक कोने में मुंह लटकाये बैठा है । जब एक बुजुर्ग ने फत्ते के कंधे पर हाथ रक्खा, तो फत्ते बोल उठा :
"ओह तेरी कै ! करम* की बात तै देखो - कित ओड़ तैं* नम्बर लाग्या सै !!"
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बहकटा - जो जल्दी बहकावे में आ जाये
करम की बात - किस्मत का खेल
कित ओड़ तैं – किस तरफ से
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