Kismat ka Ultaa Chakkar (The Reverse Cycle of Destiny)

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deswal jee, excellent
ek sachhi ghatna yadd aagi, ek chore ka biyaha na hora thaa, chota bhai bhee batt dekhra thaa ki , kad iska biyaha ho aur mera number lage, khair kismat ne sunlee, aur bade bhai ka biyah pakka hoga, jab jaimala padree thee to chote wala rukke maran lagya , kat gya rog kat gaya rog, sub baratee aur gharatee usne dekhe, ke hogya isne,

सही कहा - पुराने समय वाले किस्सों की बात ही निराली है ! एक धागा याद आ गया - देव दहिया का लिखा हुआ - इसको दुबारा यहीं चिपका रहा हूं । शीर्षक है "ढोल आळे कै बुड़का भर ले" ।

गाम में ब्याह था अर बाजा बाजै था । एक छोरी आपणी मां नै न्यूं बोली...अक मां, जब यो बाजा बाजै सै तै मेरै कचकची सी ऊठैं सैं अर इसा जी करै सै जणूं फेरे ले ल्यूं ।

उसकी मां नै या बात उसके बाबू तैं बताई, अर बो बाबू बोल्या - "ठीक कहै सै, छोरी ब्याहवण जोगी हो रही सै, इसका ब्याह तगाजे तैं करांगे" ।

या बात उसका छोरा सुणै था । दस-पन्द्रह दिन पाच्छै फिर बाजा बाजै था अर वो छोरा आपणी मां नै बोल्या "मां, जब यो बाजा बाजै सै ना, तै मेरै कचकची सी ऊठैं सैं अर इसा जी करै सै जणूं फेरे ले ल्यूं" ।

उसके बाबू ने सुण ली अर न्यूं बोल्या "भाई न्यूं कर, उस ढोल आळे कै बुड़का भर ले - ईबै तेरा नम्बर ना सै" !!
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Ek Ye Bhi

बहुत बढिया ! एक ऐसा ही मुझे भी याद आया, आप भी पढिए!

एक जाट अपने छोरे की शादी के लिए घणा चिंतित था पर उसका छोरा शादी कराने के लिए राजी नही होव था। बाप को चिंता थी कि उसे तो कभी भी भगवान का बुलावा आ सकता है, छोरे की शादी ना होई तो खानदान का नाम किस तरह चलेगा। उसने अपने मन की बात गांव के मुखिया को बताई और उससे मदद मांगी। असल में जाट का छोरा जमा ए भोला था मुखिया के समझाने का उस पर कोई असर ना होया। एक दिन जाट के छोरे की बकरी मुखिया का खेत चरगी। मुखिया ने सोचा के आज मौका है-उसने जाट के छोरे को पकङ लिया और उसको घणा कसूता डरा दिया कि उसको घणी कसूती सजा मिलेगी। छोरा घबरा गया और रो-रो के कहण लागा के उसे एक बार कैसे भी माफ करदो। मुखिया ने कहा कि उसे एक ही शरत पर माफ करा जा सके कि उसे शादी करानी पङेगी। जाट के छोरे को हां करनी पङी। शादी में जब दुलहन को उसके पास बैठाया गया तो उसने धीरे से दुलहन से पूछा - हां ऐ तू शादी कराण खातर कूकर राजी होई के तेरी बकरी भी मुखिया का खेत चरगी थी!!!!
 
बहुत बढिया ! एक ऐसा ही मुझे भी याद आया, आप भी पढिए!

एक जाट अपने छोरे की शादी के लिए घणा चिंतित था पर उसका छोरा शादी कराने के लिए राजी नही होव था। बाप को चिंता थी कि उसे तो कभी भी भगवान का बुलावा आ सकता है, छोरे की शादी ना होई तो खानदान का नाम किस तरह चलेगा। उसने अपने मन की बात गांव के मुखिया को बताई और उससे मदद मांगी। असल में जाट का छोरा जमा ए भोला था मुखिया के समझाने का उस पर कोई असर ना होया। एक दिन जाट के छोरे की बकरी मुखिया का खेत चरगी। मुखिया ने सोचा के आज मौका है-उसने जाट के छोरे को पकङ लिया और उसको घणा कसूता डरा दिया कि उसको घणी कसूती सजा मिलेगी। छोरा घबरा गया और रो-रो के कहण लागा के उसे एक बार कैसे भी माफ करदो। मुखिया ने कहा कि उसे एक ही शरत पर माफ करा जा सके कि उसे शादी करानी पङेगी। जाट के छोरे को हां करनी पङी। शादी में जब दुलहन को उसके पास बैठाया गया तो उसने धीरे से दुलहन से पूछा - हां ऐ तू शादी कराण खातर कूकर राजी होई के तेरी बकरी भी मुखिया का खेत चरगी थी!!!!



hahahahahaha.........

Kaswan ji maza hi aa gya....

bahoot pahle suna tha par aaj bhi utna hi ras hai isme :D
 
मेरे ताऊ के दो लड़के हैं ताउजी उन्हें बहुत छोटी उमर में छोड़ के चले गये थे उनकी शादी की बात भी काफ़ी जल्दी चलने लगी . बड़ा छोटे को बोलता है भाई ऐसा करते हैं की मैं शादी करवा लेता हूँ जे मेरे कुछ हो गया तो तेरी भाभी ने तेरे पल्ले ला देंगे. छोटा पड़ते ही बोला "ओ भाई तू ना मरे सो साल भी तू न्यू कर मेरा बियाह करवा दे जे मेरे किमे हो गया तो तू उसने अपने पल्ले ला लिए.
 
मेरे ताऊ के दो लड़के हैं ताउजी उन्हें बहुत छोटी उमर में छोड़ के चले गये थे उनकी शादी की बात भी काफ़ी जल्दी चलने लगी . बड़ा छोटे को बोलता है भाई ऐसा करते हैं की मैं शादी करवा लेता हूँ जे मेरे कुछ हो गया तो तेरी भाभी ने तेरे पल्ले ला देंगे. छोटा पड़ते ही बोला "ओ भाई तू ना मरे सो साल भी तू न्यू कर मेरा बियाह करवा दे जे मेरे किमे हो गया तो तू उसने अपने पल्ले ला लिए.


राकेश, तेरा धागा पढ़ा - Chora ho Gya.

कईयों ने comment लिखे हैं उस पर । कहीं ताऊ के लड़कों की तरह तू भी तो इस किस्मत के उल्टे चक्कर में नहीं पड़ गया ? hehehe :)
 
राकेश, तेरा धागा पढ़ा - Chora ho Gya.

कईयों ने comment लिखे हैं उस पर । कहीं ताऊ के लड़कों की तरह तू भी तो इस किस्मत के उल्टे चक्कर में नहीं पड़ गया ? hehehe :)
hats off DND sir... सही जगह घसीट कै लाये हो छोरे नै, या बात समझान ताइन. :D
 
राकेश, तेरा धागा पढ़ा - Chora ho Gya.

कईयों ने comment लिखे हैं उस पर । कहीं ताऊ के लड़कों की तरह तू भी तो इस किस्मत के उल्टे चक्कर में नहीं पड़ गया ? hehehe :)
Ulta chakkar kati nahi uncle ji mein ekla e hoon saga bhai koye nahi.
ar chora katti sagi ar sidhe hisab tein hoya hai
 
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