Maa

nainsunil007

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थी इसी जणु कती सुधी गाँ
प्यार करया करै थी बेशुमां


रोटी खवाया करै थी नरे घी मै जमां
लकडन नही दिया करै थी सौड मै तै पाँ


बुखार के तपते शरीर नै भी ला कै दे थी सुवां
रातु उठ उठ देखती कदे मैं उठ ना जां


गई छोड कै तगाजे तै भगवान नै ली थी बुलां
थी वा सबतै प्यारी मेरी माँ:(:(
 
माँ तो माँ, क्या दूं उपमा,
हर उपमा उप रह जाती है,
माँ तुझको उपमा देने में,
मेरी वाणी चुप रह जाती है....
 
सीने तै लगा कै कहया करती माँ मन्नै
तू सै मेरा लाल ना सता मन्नै


पछतावैगा एक दिन जब मै चली जांगी
ना चाहते हुए भी एकला छोड जांगी


दुनिया दिखावै गी जब दुख तन्नै
याद करकै रोवैगा फेर मन्नै


कई दिनां तै माँ तन्नै सीने तै ना लाया
इब सोगी सदा के लिए जब तेरे तई कुछ करण का बखत आया
 
माँ तो माँ होती हे
मुझे सुलाए सूखे में
खुद गिले में सोती हे


माँ तो माँ होती हे
मुझे हंसाने के लिए
खुद हजार आंसू रोती हे


माँ तो माँ होती हे
खुद खाए रुखा सुखा
मुझे देती घी रोटी हे


माँ तो माँ होती हे
मेरे सर से बोझ उतार
खुद दुगना बोझ ढ़ोती हे


माँ तो माँ होती हे
बेटा उड्ड जाए परदेश
अन्दर से रोये
बाहर से मुस्कुरा देती हे

माँ तो माँ होती हे .................


माँ तो माँ होती हे .......................रवि "अतृप्त "
 
माँ तो माँ होती हे
मुझे सुलाए सूखे में
खुद गिले में सोती हे


माँ तो माँ होती हे
मुझे हंसाने के लिए
खुद हजार आंसू रोती हे


माँ तो माँ होती हे
खुद खाए रुखा सुखा
मुझे देती घी रोटी हे


माँ तो माँ होती हे
मेरे सर से बोझ उतार
खुद दुगना बोझ ढ़ोती हे


माँ तो माँ होती हे
बेटा उड्ड जाए परदेश
अन्दर से रोये
बाहर से मुस्कुरा देती हे

माँ तो माँ होती हे .................


माँ तो माँ होती हे .......................रवि "अतृप्त "


बहुत ही बढ़िया रवि भाईसाहब , अति सुन्दर और मार्मिक कविता..
 
आज हवा ने फिर से वही बात दोहराई है
मेरे गुजरे बचपन की यादें अपने साथ वो लाई है


एक ममता की छाँव मे मैने सारी उमर बिताई है
अपने गमों के सैलाबों को जो हँस कर सहती आई है


खाली पेट ना जाने उसने कितनी रातें बिताई है
ना जाने रातों को जग जग कर कितनी लोरियां सुनाई है


मेरे सारे जख्मों पे वो मरहम लगाती आई है
जब भी दर्द हुआ है मुझे वो आँसू बहाती आई है


मेरे सारे सपनों को मंजिल के करीब जो लाई है
बस उनकी दुआओं से ही मैने अपनी पहचान बनाई है


आज महसूस हुआ मेरे अंदर उनकी परछाई है
खुशकिस्मत हू् मैं के मैने माँ की ममता पाई है
 
माँ री अपणे हाथ की रोटी खवाजा
पुराणी बात फेर याद दवाजा


पिज्जा, बरगर खा कै छक लिए
झूठे रिश्ते बणा कै अक लिए (gf)
ईब तै लौरी गा कै सुणाजा
माँ री अपणे हाथ की रोटी खवाजा


शहरी बण कै सब क्यम भूले
गामां के खेल, वो पिंग वो झूले
ईब तै आकै गूंद घलाजा

माँ री अपणे हाथ की रोटी खवाजा
पुराणी बात फेर याद दवाजा
 
माँ ए, माँ री
ताती रोटी खवा री


भोत कर लिया तन्नै
ईब सै मेरी बारी


ब्याह दे मेरा करवा
फेर बहू की तू सेवा ठा


बणा दयूं तन्नै पौतां आली
पाँ बोचै तेरे मेरी घर आली


आराम तै बैठी सुख भोग
ना लागै तेरै कोए रोग


समस्या सै आजकाल या भारी
बहू राखै धोरै, माँ की कुटिया न्यारी


अरै किमे तो करो शरम माँ के जणो
माँ नही मिलैगी इतनी प्यारी


चलो सेवा करै माँ की अर बचपन की तरियां बोलैं फेर
माँ ए, माँ री
 
Isme to shadi ki khawaish jayda lag rahi h...
माँ ए, माँ री
ताती रोटी खवा री


भोत कर लिया तन्नै
ईब सै मेरी बारी


ब्याह दे मेरा करवा
फेर बहू की तू सेवा ठा


बणा दयूं तन्नै पौतां आली
पाँ बोचै तेरे मेरी घर आली


आराम तै बैठी सुख भोग
ना लागै तेरै कोए रोग


समस्या सै आजकाल या भारी
बहू राखै धोरै, माँ की कुटिया न्यारी


अरै किमे तो करो शरम माँ के जणो
माँ नही मिलैगी इतनी प्यारी


चलो सेवा करै माँ की अर बचपन की तरियां बोलैं फेर
माँ ए, माँ री
 
Bohht badhiya Nain Sahab

आज हवा ने फिर से वही बात दोहराई है
मेरे गुजरे बचपन की यादें अपने साथ वो लाई है


एक ममता की छाँव मे मैने सारी उमर बिताई है
अपने गमों के सैलाबों को जो हँस कर सहती आई है


खाली पेट ना जाने उसने कितनी रातें बिताई है
ना जाने रातों को जग जग कर कितनी लोरियां सुनाई है


मेरे सारे जख्मों पे वो मरहम लगाती आई है
जब भी दर्द हुआ है मुझे वो आँसू बहाती आई है


मेरे सारे सपनों को मंजिल के करीब जो लाई है
बस उनकी दुआओं से ही मैने अपनी पहचान बनाई है


आज महसूस हुआ मेरे अंदर उनकी परछाई है
खुशकिस्मत हू् मैं के मैने माँ की ममता पाई है
 
Jama Badhiya ........

माँ ए, माँ री
ताती रोटी खवा री


भोत कर लिया तन्नै
ईब सै मेरी बारी


ब्याह दे मेरा करवा
फेर बहू की तू सेवा ठा


बणा दयूं तन्नै पौतां आली
पाँ बोचै तेरे मेरी घर आली


आराम तै बैठी सुख भोग
ना लागै तेरै कोए रोग


समस्या सै आजकाल या भारी
बहू राखै धोरै, माँ की कुटिया न्यारी


अरै किमे तो करो शरम माँ के जणो
माँ नही मिलैगी इतनी प्यारी


चलो सेवा करै माँ की अर बचपन की तरियां बोलैं फेर
माँ ए, माँ री
 
maa ne bhi koe yaad rakh lo
likho aapke mann me kya audha hai maa ka
main e ekla likhe jaunga ke ?????????
kahan gaya aapke andar ka kaviiiiiii
 
rishte se aur bhi nirre
ma ki ke hod ho se,uss jissi ke koi ho aur se
gaal bake chahe upar te par dill te ashish likade
uppar te patthar dikhti ho bhale par dil uska ho mome se
aap chahe chakk ke chett de taar de bakall
par majal kise ki koi aur haath lade isi dhaal ho se
rishte baaki daga de ja chaalte bure waqt
sar p haath ravega uska sada ma issa bhagwaan ka bardan se
 
Woh Meri Bad-Sulooki Pe Bhi Mujhey Dua Deti Hai,
Aaghosh Mein Le Kar Sab Ghamm Bhula Deti Hai,

Yun Lagta Hai Jaise Jannat Se Aa Rahi Hai Khushbu,
Jabb Woh Apney Pallu Ki Mujhe Hawaa Deti Hai,

Main Jo Anjaney Mein Karun Koi Ghalati,
Meri Maa Iss Par Bhi Muskuraa Deti Hai,

Kya Khoob Banaya hai Rabb Ne Rishta Maa Ka,
Veeran Ghar Ko Bhi Maa Jannat Bana Deti Hai,

Maa'n Ke Baad Mera Kaun Sahara Hai,
Ye Soch Mujhey Aksar Rula Deti Hai.​
 
Ma mujhe chod k mat jaana,bechara bana ke mujh me chupe balak ko anath mat bana jaana, tujh se jude hai nakhre mere har jidd meri mujhe nimana sa mat bana jaana,hichkio ko daraya hai sada maine dila ke ehsaas us duniya ka jisme tu jab na hogi. Kara saku na chup unko ro ro ke bhi mere is darave ko such mat bana jaana.
 
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सीने तै लगा कै कहया करती माँ मन्नै
तू सै मेरा लाल ना सता मन्नै


पछतावैगा एक दिन जब मै चली जांगी
ना चाहते हुए भी एकला छोड जांगी


दुनिया दिखावै गी जब दुख तन्नै
याद करकै रोवैगा फेर मन्नै


कई दिनां तै माँ तन्नै सीने तै ना लाया
इब सोगी सदा के लिए जब तेरे तई कुछ करण का बखत आया

Ghanee zordaar likhi bhai sunil ......................... ek dard ko hiloro so uth go kalje maa .................. :(
 
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