Maha-Chutkala Thread::Your Best Jokes ::Hall of Fame

Good Chutkala by Samar Kadian ji showing Habits die hard.

Beg Singh ke last part ko Kadiyan Sahib is tarah bhi jor diya karen Bhiwani side mein:

''Jab sagai karne wale gaam mein hi the to unki mulakat Beg Singh se hogi.

Beg Singh ne un tahin puchha kee woh kis kaam tain gaam mein aye

Aguntak bole woh Ramphal kee sagai karane ke liye aaye hain aur ladaka pashand bhi aa gaya

lekin uska baapu Patwari saath thori der pahle shahar gaya.

Hum Phir kisi din aa jayenge.

Woh bola "Ek baat samajh nahin aye Ramphal ka babu patwari saath kyon gaya sa,

khood ek bhigha uske paas nahin aur nah mere paas.

Phir bhi risatedaron ka Aana jana to laga hi rahana chahiya"
 
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एक सुंडू का दोस्त दोस्त था नन्हे ...उम्र लिकड़ गयी पैर ब्याह न होया।.एक दिन वो सुंडू ते बोल्या ....भाई सुंडू ..मैं ते इस दुनिया मैं नुए आया एर नुए चला ज्यांगा।......बटेऊ कुव्हान का मन्ने घना शौक था , पर देख मेरी तकदीर
सुंडू बोल्या - भाई एक काम कर, एक मोड़ लिया एर मोड़ बांध के रेल तल्ले जाके कट जया .
जो भी देखेगा वो नुए कह्वेगा ऐक ...बटेऊ कट के मर गया ....:)
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ज मोड कटती हाना सर पर त हाथ म आ ग्या त लोग नु भी कह देंगे देखो र भाती कट क मर ग्या !
 
खुले पिस्से दे क

एक ब रामफल न मुर्गा फार्म खोलन खातर लोन ले लिया ! थोड़े दिन पाच्छे लोन आले फार्म की जांच करण आ गे ! उन न बुझी अक भाई इन न के खुवाया करे ? रामफल न स्वाद लेन के मारे न कह दी अक जी मै त इन न काजू बादाम खुवाया करू !

उनके छो उठ ग्या अर् बोले ,'' काजू बादाम के बच्चे , इन ने डंग सर का खुवाया कर नहीं त लोन कैंसिल कर दांगे''!

माडे से दिन पाच्छे लोन आले फेर आये अर् बुझन लागे ,'' क्या खुवाता है इनको ?''

रामफल डरता डरता बोल्या ,'' जी मै त इन न खुले पिस्से दे क बाज़ार म खंदा द्यु सु , इनका जो भी जी करे खा आव सै ''!

 
एक बे एक जाट ने एक कुल्फी बनान आली कंपनी के मेनेजर धोरे फ़ोन करया एर पूछ्या डंडी आली कुल्फी से
मेनेजर:- हाँ से
जाट ;- ते न्हास्स्या मैं दे ले उसने
अगले दिन फेर फ़ोन करया जाट ने एर बोल्या:- डंडी आली कुल्फी से
मेनेजर समझ गया एक मजे लेवेगा
मेनेजर बोल्या:- ना है
जाट:- क्यूँ न्हास्स्या मैं दे ली थी के?
मेनेजर पुलिस धोरे पहुँच गया एर शिकायत कर दी जाट की
पुलिस आला बोल्या:- कितनी देर पहला होया यो सब
मेनेजर:- २० मिनट हो लिए
पुलिस आला:- ते कुल्फी ते पिघल ली होगई
काढ ले डंडी ने न्हास्स्या मैं ते:stupid:
 
सूंडू के बाबू का नाम बी सूंडू था अर जद सूंडू छोरे का नाम बी सूंडू धर दिया ।
जद सूंडू का छोरा बड़ा होया तो सूंडू उसती बोल्या , बेटा तू भी अपने छोरे का नाम सूंडू धर दिये ।

सूंडू के छोरे नै अपने बाबू तै पूच्छया , मन्ने अपने छोरे का नाम बी सूंडू क्यांताई धारणा सै ?
सूंडू बोल्या , आपणी सारी जमीन की रजिस्ट्री शुरू तै ए सूंडू सुपुत्र सूंडू के नाम सै । आपणी किसे बी पीढ़ी नै रजिस्ट्री म्ह नाम कोणी बदलवाना पङदा ।

 
गोधू सब्जी बेचया करदा । उसके छोरा होया।
रलदू - गोधू भाई छोरा कीसा सै ?

गोधू - भाई एकदम ताजा सै ।
 
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एक गाभरू छोरा अपनी ससुराड़ गया । सुसराड़ के ठाठ देख कै उसनै सोच्या अक दो-चार दिन और ठहर ल्यूं ।

कई दिन पाच्छै उसके सुसरे नै पड़ौस की कई छोरी बुलाई अर बोल्या - ए छोरियो, इस मलंग नै डिगाओ हाड़े तैं, यो तै कत्ती-ए चिप-ग्या ।
आगलै दिन दोफाहरी में मलंग रोट खा कै ठाठ तैं सोवै था । उसकी साळी कहण लागी - जीजा, खड़ा हो ले, रेल का टाइम हो रहया सै ।

उसकी माड़ी-माड़ी आंख खुल्ली अर बोल्या - क्यूं रौळा कर रही सो, सोवण दो नै । वे फिर बोल्ली - जीजा, खाट छोड-कै उठ, रेल का टाइम हो रहया सै ।

मलंग नै जवाब दिया - "रेल चली जागी तै जाण दो - मेरी खाट के रेल की पटड़ी पै घाल राक्खी सै ?"

 
तलै धलती-धालती (धरती-धारती) कोन्या

एक ब चमार अर चमारी छात प सुत्ते थे ! रात न मी अर आंधी आगी ! दोनु ताव्ले ताव्ले गुड्डे समेटन लाग गे ! आंधी त वा बांस आली सीढ़ी पड़ गी थी ! जुकर ए चमार न तावल तावल म सीढ़ी प पाँ धरा , सीधा आँगन म जा क गध पड्या !

पड्या पड्या अपनी बहु न बोल्या ,'' एल ! देखिये ध्यान त उतरिये तलै धलती-धालती (धरती-धारती) कोन्या मखा !!
 
सुंडू:यार काल बस स्टैंड पर ५-६ छोरा नै मेरै घणे मारे!
भुंडू:फेर?
सुंडू:मैं बोल्या माँ का दूध पिया सै तो एक-एक करके आओ!!
भुंडू:फेर के होया?
सुंडू:होणा के था साला नै एक-एक करके और मारे!!
 
रामफल एक ब खारकी झोटी ले आया ! पर या घने माणसा आगे दूध कोन्या दिया करती ! रामफल का गेर था च्यानिया धोरे सी ! सांझ न जब रामफल धार काढन लाग्य तो उस टेम घने माणस अर्थी ले क ओडे क आ गे ! इतने माणस देख क म्हैंस लात मारगी ! रामफल न सोच्या अक कोई ना काल दो खड़ का काड लूँगा ! आगले दिन इसा सुत बैठ्या अक धारा के टेम पैर लोग अर्थी ले क आगे अर् म्हैंस फेर कुदगी ! छो त कसूता उठया रामफल क पर कुकर ए डाट ग्या आपने आपे न ! जब तीसरे दिन फेर धार काढन लाग्या तो फेर एक अर्थी जाण लाग गी ओडे क !

ईब नहीं डत्या ग्या अर् सीधा अर्थी क गेल गेल हो लिया अर् बोल्या -'' अरर ए ! एक बात बताओ , थाम मेरी भैंस न कुदान खातर यो ताज़ा मार क लाये सो अक परसु आले न ठाये हांडओ सो ?
 
एक ब दो काफी बुजर्ग आदमी एक दूसरे का हालचाल बूझन लाग्गे |
पहला बोल्या - भाई बस बूझे मत जान सी कोन्या बची, सारे हाड दुखे सै जणू छेत राख्या सूँ | अर तू आपनी सुना |
दूसरा बोल्या - भाई मैं त इसा होरा सूँ जीसा छोटा बालक |
पहला बोल्या - नु कुकर भाई ?
दूसरा बोल्या - मेरे यार ना सिर प बाल, ना मुह मे दांत, अर कदे कदे त लाग्गे स पैंट भी भीज री सै |

 
Happy Deepavali to all JATLANDERS!

Can someone please copy paste the famous Kalyug Ki Ramayan... It started something like "Ram ban me jaan te naat gya" It was posted in 2005 or 2006.

Thanks,

JS Malik
 
एक ब दो काफी बुजर्ग आदमी एक दूसरे का हालचाल बूझन लाग्गे |
पहला बोल्या - भाई बस बूझे मत जान सी कोन्या बची, सारे हाड दुखे सै जणू छेत राख्या सूँ | अर तू आपनी सुना |
दूसरा बोल्या - भाई मैं त इसा होरा सूँ जीसा छोटा बालक |
पहला बोल्या - नु कुकर भाई ?
दूसरा बोल्या - मेरे यार ना सिर प बाल, ना मुह मे दांत, अर कदे कदे त लाग्गे स पैंट भी भीज री सै |


Beautiful. Shakespeare, the famous English dramatist, has also compared the old age person and the child in the same spirit.
 
एक बार नाथू बालकां नै पढावे था - हक बालकों , विज्ञानिक नू कहवे से हक गावड़ी का ताज़ा दूध पीवन ते दिमाग तेज हो से।उसकी बात सुन के सुन्डू बोलया - जी रहण दयो। क्यूँ भखावो सो।जे इस्सी बात होती ते महारा कटड़ा कद का मास्टर बन गया होता।
 
एक ब रल्धू की गुड्गामे की एक बड्डी कंपनी में नौकरी लाग गी |
रल्धू ने पहले इ दिन फ़ोन घुमाया और बोला - तावला सा एक कप चा ले के आजा |
दूसरी कान्हा ते आवाज आइ - बेवकूफ तने गलत नम्बर घुमा दिया तने बेर सा मैं कुन सू ?
रल्धू बोल्या अक - ना |
दूसरी कान्हा ते आवाज आइ - मैं इस कम्पनी का बास बोलूं सूं |
रल्धू बोल्या - तने बेर स मैं कोण बोलूं सूँ ?
दूसरी कान्हा ते आवाज आइ - ना |
रल्धू ने फोन पटक के मारा आर बोला - आज ते बच ग्या एंडी
 
Happy Deepavali to all JATLANDERS!

Can someone please copy paste the famous Kalyug Ki Ramayan... It started something like "Ram ban me jaan te naat gya" It was posted in 2005 or 2006.

Thanks,
JS Malik

लीजिए सर आपकी कलयुग कि रामायण :


म्हारे गाम में एक ऊँचा सा टिल्ला
उस पै आये साल हुया करती रामलीला
इबके उसमे कटती चाल्ला पाट गया
अर राम बन् में जाने त नाट गया
दशरथ बोल्या चला जा ना बिघन करे
रामलीला में त राम बन् में ही जाया करे
राम बोल्या इबके में तेरी बात्ता में ना आऊ
अर बन् में जाके धक्के ना खाऊ
तनने बचन भरा तू ही निभा
तेरी बहु ह अर तू ही मना
अर जे में चला भी गया त फेर सीता बी आवेगी
अर गेल्या लक्ष्मण भी पैर ठावेगा
अर तू नु बता कोण उसके लत्ते धोवेगा
अर कोण उसने तिक्कड़ खुवावेगा
ले दे क खड़ी कर भी दी घास कि झुपडी
त फेर घुम्मेगी शुप्रनखा कि खोपड़ी
अर फेर वो रावन आएगा अर्मेरी बहु न ठा क ले जावेगा
अर तू क सोच्चे लक्ष्मण उड़े ए रहेगा खड़ा
कॉल अखबार में पढ़ा एक देवर भाभी न ले उड़ा
देख नहीं रहे वो दिन ना धरम ना वो ईमान
अर फ्री में सीता न ढूंड लावे ना रहे वो हनुमान
चलो ले दे क सीता पा बी गयी
अर अग्निपरीक्षा कि घडी आ बी गयी
त बाबु मेरी सुन ले इब क या घडी ना टल्ले
अर इबके सीता जले ही जले
अर बाबु तू मन्ने न्यू बी मर्वा वेगा
बहु जलान के केस में अंदर बी करवावेगा
आगे त भारत बन् में जावेगा
अर राम तो बन् में जाने त न्यू ही नाट जावेगा
 
क्या आपकी लाइफ बहुत बोरिंग
है ?
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जे हाँ
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तो टाइप करो

I love <space> आपके लवर का
नाम
.
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और अपने पिताजी के नंबर पै सेंड करदो

गऊ की सू घर मैं तहलका
माच जावेगा ...
हा हा हा हा हा
 
Dear Sandeep,

Thanks for posting 'Kalyug ki Ramayan'. It was indeed so very kind of you. Godspeed!

Best regards,

JS Malik
 
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