Maha-Chutkala Thread::Your Best Jokes ::Hall of Fame


रमलू के पड़ौस में एक नई बहू आई थी । रमलू हुक्के की चिलम भरण का ओडा ले कै रोज उस घर में चला जाया करता ।
कुछ दिन पाच्छै बहू आपणै पीहर चली गई, रमलू नै इस बात का बेरा ना था ।

रमलू चिलम ले कै पहुंच ग्या अर इंघे-उंघे नै देख कै बुढ़िया तैं बोल्या - ताई, आग सै ?
ताई बोली - बेटा, आग तै कल बारह आळी गाडी में चली गई !
 
एक बै एक लुगाई छः-सात बाळकां नै ले कै बस
में चढ़-ग्यी ।
सारी सवारी उस
कान्नी लखावण लाग्गी ।
लुगाई सकपका कै बोल्ली - सारे मेरे कोनी, चार
पड़ौसियां के भी सैं !!!
 
एक जाट कै बाळक ना होवैं थे ।
एकदिन एक भाठ आ-ग्या अर
जाटणी नैआपणा रोणा रो दिया ।
बाहमण बोल्या- बेटी, रोवै मतना, मैं परसोंबद्रीनाथ जाऊँ सूँ,
ऊड़ै तेरे
नामका दीवा जळा दूंगा - अर भगवान सबभली करैंगे,
चिन्ता ना करियो ।
वो बाहमण दस साल पाच्छै उस जाट कैघरां आया, तै
देख्या अक ऊड़ै आठ-नौ बाळक
हांडैं थे ।
उसनै पड़ौसीतैं बूझी अक ये बाळक किसके सैं ?
पड़ौसी बोल्या अक महाराज ये उस्सैके सैं जिसका तू दस
साल पहल्यांबद्रीनाथ
में दीवा बाळ-कै आया था।
बाहमण बोल्या - रै, यो जाट कित सै ?
पड़ौसी बोल्या - महाराज,वो तै कल बद्रीनाथ चल्या गया -
तेरे दीवेनैबुझावण !!!
 
माराँ डंडे

एक ब एक एस.पी , डी.सी. अर मास्टर धीरे रेल म जाँ थे ! बात बाता एस.पी अर डी.सी में अपनी पावर की बड़ाई करण की होड शुरू होगी ! कई वार होगी जब मास्टर धीरे त कचोद टाइप त बोल्ये ,'' मास्टर आप भी बता दयो किमे आपने बारे में '' !

धीरे मास्टर बोल्या ,'' रहण दयो जी , के कहू ईब '' !

एस.पी , डी.सी माने कोन्या अर् फेर स्वाद लेन के मारे बोल्ये ,'' ना जी किम्मे त बताओ न '' !

धीरे मास्टर बोल्या ,'' ना मानते त ल्यो सुन ल्यो ! हाम सारी दोफारी त घाम म मुर्गा बनाई राखां , फेर पाछे प माराँ डंडे अर् फेर वे बालक एस.पी , डी.सी बन ज्या स ! ''
 
एक बेर ऐसा होया के एक मोडरन जमाने का छोरा (लंबे बालों आला) बस मे सफर करै था। उसी बस मे ताऊ भी बैठ्या था। ताऊ नै सोच्चा अक या छोरी ना तो हाथां में चूडी पैहर री, अर ना मांग भर री। ताऊ कू आगी दया। वो बोल्या –“ऐ बेट्टी, जवानी में ई राण्ड होगी।”
ताऊ के पडोस वाला बोल्या के ताऊ, छोरा सै।
ताऊ नै सोच्ची अक इसके एक छोरा सै, तो बोल्या –“चाल, कोए बात नी बेट्टी, उसके सहारे दिन काट लिये।”
 
एक बै बरात में घणां काला छौरा चला गया......फ़ेरे होणे के
बादलडकी वाले कहण लागे....इस काले छौरे नै तै...याहडे
ही छौड जाओ.....बराती परेशान और हैरान
हो के.....छौरी आळा तै बूजणं लागे....थम के करोगे...इस
काले का....?
छौरी वाले बोले....रात म्हारी भैंस ब्याई थी....और
उसका काटडा मर गया..... काले नै दिखा कै.....भैंस
का दूध काढ लेंगें ।
 
सुरजा फ़ौज मैं था, साल भर पाच्छै छुट्टी आया । सांझ-नैं
उसकी बहू रामप्यारी बूझण लाग्गी अक आज कुण-सा साग
बणाऊँ ?
सुरजा बोल्या - आलू एंड (and) गोभी रांध ले ! अर
इतणा कह कै बाहर गाम मैंघूमण लिकड़-ग्या ।
रामप्यारी सोच मैं पड़-ग्यी - के घरां आलू बी सैं ,
गोभी बी सै । पर यो एंड (and) के होया ?
रामप्यारी अपणी पड़ोसण धोरै बूझण गई । पड़ोसण नैं
बी कोणी बेरा था अक यो एंड के हो सै । उसनै सोची अक
ना बताई तो रामप्यारी आगै बेजती हो ज्यागी ! पड़ोसण
बोल्यी - एंड तो गोबर हो सै ।
बस, फेर के था ! रामप्यारी नै घरां आ-कैगोबर का छ्यौंक
ला-कै साग बणा दिया ।
रोटी खाते टेम सुरजा बोल्या - आज तो सब्जी चरचरी बण
रही सै !
रामप्यारी बोल्यी - एंडकिमैं घणा पड़-ग्या होगा !!!
 
चालीस साल का बदले गाळ में जावै था, एक ऊत सा बाळक
बोल्या - ताऊ, राम-राम ।
बदले नै "ताऊ" कहलवाना कुछ आच्छया-सा ना लाग्या,
उसनै कोई जवाब ना दिया अर आगे-नै लिकड़ लिया ।
आगलै दिन वो छोरा फिर बोल्या - ताऊ राम-राम । बदले तैं
ना रहया गया अरउस छोरे तैं बोल्या - छोरे, तू मन्नै "काका"
नहीं कह दे ?
छोरा बोल्या - "काका" कह दूंगा तै के हो ज्यागा ?
बदले बोल्या - जै तू मन्नै "काका" कह देगा तै मैं
तेरी मां की बगल मेंचूल्हे धोरै बैठ कै गर्मा-गर्म
रोटी खा लूंगा ।
छोरा बोल्या "ले तै, फिर तन्नै मैं "मामा" कह दूं सूं - चूल्हे
धोरै बैठ कै, तवे पर-तैं आप्पै तार-कै कत्ती तात्ती-
तात्ती रोटी खा लिये"!
 
एक बै बारात में भूंडू आंधा चाल्या गया । छात पै जीमणवार
होण लाग्गी । घरातियां नै पत्तळ धर दिये सबकै आगै ।
आंधी आने का आसार था, सो सबकी पत्तळ पै एक-एक
पत्थर भी धर दिया ।
भाई, म्हारे भूंडू आंधे नै समझया अक यो लाड्डू चख कै देख
। उसनै पत्थर कै जोर लाया, पर वो ना फूट्या तै उसनै
सोच्या अक ये लाड्डू तै किमैं बासी-से धर दिये जै फूटते
भी कोनी !
छो में आ-कै उसनै पत्थर फेक कै मारा । उसकै
साहमी जो दूसरा बाराती बैठ्या था, उसके सिर पै लाग्या जा-
कै । उस बाराती नै मारी चिल्ली"अरै, फूट-ग्या!"
म्हारा भूंडू आंधा बोल्या "फूट-ग्या हो तै भाई, आधा मन्नैं
भी दे दे" !!
 
एक बै सुंडू नै कोई गलत काम कर दिया । पंचायत उसका मुह काला कर कै गधे पै बिठा कै गाम मैं घुमावण लाग-गी ।
राह मैं सुंडू का घर आया । उसकी बहू उसनै भीत के ऊपर तैं देखण लाग रही थी ।

सुंडू बोल्या - "भागवान न्यूं के देखै सै ?
जा-कै चाय चढ़ा ले चूल्हे पै - दो-तीन गळी रह रही सैं, मैं चक्कर मार-कै ईब आया !!"
 
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sUPERB. BAHUT BADHIYA.
 
एक गावं में एक ब्राह्मण एवं एक जाट का परिवार रहता था। उन दोनों के लड़के आपस में अच्छे मित्र थे। एक बार दोनों लड़के ऊँट पर बैठकर किसी काम से पड़ोस के गावं में गए। ऊँट जाटों के लड़के का था। शाम को लौटते समय ऊँट की मूरी (ऊँट के नाक में छेद करके रस्सी डाली जाती है, इसी रस्सी के माध्यम से ऊँट पर नियंत्रण रखा जाता है) टूट गयी। जंगल में और दूसरी कहाँ से मिलती? तो जाट के लड़के ने ब्राह्मण के लड़के से कहा कि मित्र ये जो तुमने अपने गले में रस्सी (जनेऊ) पहन रखी है, वो मुझे दे दो तो ये मूरी जो टूट गयी है इसको जोड़ लूं।

इतना सुनते ही ब्राह्मण लड़का अत्यंत क्रोधित होकर बोलने लगा कि "तू मेरा मित्र है, यदि किसी और ने ऐसी बात बोली होती तो मैं पता नहीं उसका क्या हाल करता? तुम्हें तनिक भगवान ने बुद्धि दी है कि नहीं? ये जनेऊ कोई साधारण रस्सी का टुकड़ा नहीं है, इसके लिए हमें बहुत सारे धार्मिक अनुष्टान करने पड़ते हैं। गाय के गोबर का रसास्वादन भी करना पड़ता है। और बहुत सारी पूजा एवं मंत्रोचार के पश्चात ये जनेऊ धारण करवाया जाता है।" जाट लड़के को ये बातें समझ नहीं आई और किसी प्रकार से टूटी हुई मूरी के सहारे ही ब्राह्मण लड़के के साथ अपने गावं वापस आ गये।




घर में प्रवेश करते ही जाट लड़के ने अपने पिता से कहा कि बापू ये जो ब्राह्मण का लड़का है और दुर्भाग्यवश मेरा मित्र भी है, अच्छा लड़का नहीं है।


बापू ने पूछा कि क्या बात हुई पुत्र। तब उसने सारी बात अपने पिता से कह सुनाई।


तब उसके पिता ने कहा कि पुत्र ये ब्राह्मण लड़का ही नहीं अपितु उसका पूरा परिवार ही धोखेबाज़ है। एक बार पहले भी इस परिवार से काम आ पड़ा था तब भी इन्होंने हमारा साथ नहीं दिया था।


जाट लड़के ने पूछा कि बापू क्या हुआ था?


उसके पिता ने कहा कि पुत्र तेरी बड़ी बहन के फेरों के समय वो तेज़ बुखार से बेहोश हो गयी तो मैं इस ब्राह्मण के पास जाकर बोला कि केवल फेरों-फेरों के लिए अपनी लड़की दे दो, तब तक मेरी पुत्री भी अच्छी हो जाएगी। परन्तु उस ब्राह्मण ने साफ़-साफ़ मना कर दिया।


फिर कैसे काम चलाया बापू आपने।


पुत्र किसी प्रकार काम तो चलाना ही था, तुम्हारी माँ को बिनणी (वधु) के कपडे पहनाकर बैठाया और क्या करता पुत्र, किसी प्रकार तो काम चलाना ही था ना।




 
Just for humour..Dont take it seriously plsss!!!

[h=5]गाम्मां की छोरियां का नया नया यूनिवर्सिटी में ऐडमिसन होए पाछे ये एक सेमेस्टर तो रह्या करें ठीक ....क्योंके एक सेमेस्टर तै इनके बात ए समझ मै ना आया करै अक यो हो के रह्या है.. फेर इनके कुल्मुली उठनी शुरू होज्या हैं . दो तीन कमला बिमला कट्ठी हो कै acording the plan जावेंगी बाजार मैं . auto मैं तै उतर्तियें सबते पहल्या इन्है दिखैगा गोल्गाप्प्यां आला. फेर इनमे जो सबते modren
होगी वा उस धोरे जा गी अर english accent में कह्वेगी ' भैया भैया ...5 rupees के घोल घप्पे देना...और plzz वो पानी को थोड़ा "गिचौल " लेना . और फेर लक्ष्य की तरफ कूच करेंगी . तडके तै सांझ ताई सारे बजार में काटकड़ तार के आखिर में 300रूपए आली जीन्स और 150 का सुरड़ा हा टॉप ले कै लिक्ड़ेंगी. और फेर चालती हाण उनमे ते एक कह्वेगी 'सिट्ट यार आज का तो पूरा दिन "घुल "
गया'. दूसरी कह गी 'मेरे तो गोडों में भी pain शुरू हो गया...उनकी सुन के तीसरी की भी जीभ उठेगी " हाँ यार मेरी भी "पिंडी'ss भड़क " रही हैं . और फेर नए समस्टर के पहले दिन जीन्स पहर कै क्लास में जावेंगी ... और भरी क्लास में जब lacture चाल रया होगा एक दम किलकी मारे गी " ohh माई godd !! मेरी pent पे "भूण्ड" !! दूसरी कह गी ... " तुझे लड़ा तो नहीं " फेर तीसरी मुंह चिकड़ा के कह गी " ये 'भूण्ड'ss तो है ना... इस दुनिया में होने ही नहीं चाहिए .. इनको sense ही नहीं है " :P
[/h]
 
गाम्मां की छोरियां का नया नया यूनिवर्सिटी में ऐडमिसन होए पाछे ये एक सेमेस्टर तो रह्या करें ठीक ....क्योंके एक सेमेस्टर तै इनके बात ए समझ मै ना आया करै अक यो हो के रह्या है.. फेर इनके कुल्मुली उठनी शुरू होज्या हैं . दो तीन कमला बिमला कट्ठी हो कै acording the plan जावेंगी बाजार मैं . auto मैं तै उतर्तियें सबते पहल्या इन्है दिखैगा गोल्गाप्प्यां आला. फेर इनमे जो सबते modren
होगी वा उस धोरे जा गी अर english accent में कह्वेगी ' भैया भैया ...5 rupees के घोल घप्पे देना...और plzz वो पानी को थोड़ा "गिचौल " लेना . और फेर लक्ष्य की तरफ कूच करेंगी . तडके तै सांझ ताई सारे बजार में काटकड़ तार के आखिर में 300रूपए आली जीन्स और 150 का सुरड़ा हा टॉप ले कै लिक्ड़ेंगी. और फेर चालती हाण उनमे ते एक कह्वेगी 'सिट्ट यार आज का तो पूरा दिन "घुल "
गया'. दूसरी कह गी 'मेरे तो गोडों में भी pain शुरू हो गया...उनकी सुन के तीसरी की भी जीभ उठेगी " हाँ यार मेरी भी "पिंडी'ss भड़क " रही हैं . और फेर नए समस्टर के पहले दिन जीन्स पहर कै क्लास में जावेंगी ... और भरी क्लास में जब lacture चाल रया होगा एक दम किलकी मारे गी " ohh माई godd !! मेरी pent पे "भूण्ड" !! दूसरी कह गी ... " तुझे लड़ा तो नहीं " फेर तीसरी मुंह चिकड़ा के कह गी " ये 'भूण्ड'ss तो है ना... इस दुनिया में होने ही नहीं चाहिए .. इनको sense ही नहीं है " :P
Kasuta gyan le rehya hai bairi tu unke pache e handya karta ke?
 
एक बार दो नशेडी दिल्ली चले गए इंडिया गेट धोरे बैठ के उन ने सुल्फे के बीडी भर ली कसूते लाल होए पाछे चालन लगे ऊपर ने देख्या एक बोला दुसरे ने माडा सा तळे नै हो ले ना तो इंडिया गेट में सिर भिड़ ज्यागा !
दोनुवा ने नाड़ बानगी कर ली ऊपर ने देख्या इंडिया गेट और नीचे दिखया थोड़े और टेढे हो गए !
ऊपर देख्या फेर न्यू ए! न्यू करते करते कत्ति फौजिया की ढाळ कोहनिया पै आ लिए !
एक पुलिसिये ने देख्या "रे यू के सांग सै" ? दिया एक के सिर में लठ |
जिसके लाग्या वो बोल्या "मर-ग्या रे !"
दूसरा बोल्या - पहलम ए ना कहूं था "माडा सा तळे नै मर ले"
 
एक बे एक ताऊ मेले में अपने हस्ट पुष्ट झोट्टे ने सिंगा पै तेल मल के बेचन खातर ले गया |
ताऊ जेव्डा पकडे सरे दिन खड़ा रहा पर कोई ग्राहक ना आया आर साँझ तक ताऊ के गोडे भी ढीले हो लिए आर ताऊ ने घना इ छो आ रा था |
इतने में एक आया आर ताऊ ने खिचन लगा ........ क बात स तू क्यू मरगिल्ला सा हो रा ?
ताऊ समझ गया क मन्ने बनावे ह झोट्टा तो खरीदना कोन्नी|
ताऊ बोल्ला कुछ ना नुई खड़ा स |
फेर वो झोट्टे कान्नी इशारा करके बोल्ला ताऊ इसका के ले स?
ताऊ बोल्ला इसका लूँगा रिश्ता |
बोल, पुचकारना हो तो खूंटा आड़े गाढ़ दू ?
 
एक बार दो नशेडी दिल्ली चले गए इंडिया गेट धोरे बैठ के उन ने सुल्फे के बीडी भर ली कसूते लाल होए पाछे चालन लगे ऊपर ने देख्या एक बोला दुसरे ने माडा सा तळे नै हो ले ना तो इंडिया गेट में सिर भिड़ ज्यागा !
दोनुवा ने नाड़ बानगी कर ली ऊपर ने देख्या इंडिया गेट और नीचे दिखया थोड़े और टेढे हो गए !
ऊपर देख्या फेर न्यू ए! न्यू करते करते कत्ति फौजिया की ढाळ कोहनिया पै आ लिए !
एक पुलिसिये ने देख्या "रे यू के सांग सै" ? दिया एक के सिर में लठ |
जिसके लाग्या वो बोल्या "मर-ग्या रे !"
दूसरा बोल्या - पहलम ए ना कहूं था "माडा सा तळे नै मर ले"


Excellent !!!
 
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