Maharaja Surajmal Amar rahein

pankajlathar

New member
Hindustaan ki maati ke Veer Sapoot,"Plato of Jats" Bharatpur Naresh Maharaja Surajmal ko unke Balidaan Diwas (25 December) ke Paawan awsar par shat-shat Naman.
Maharja Surajmal Amar rahein.
 
Maharaja Surajmal SUNSUNWAL JI[HOPE EVERYONE KNOWS HE BELONGED TO SUNSUNWAL GOTRA] Amar rahein, IT GIVES ME A HIGH ALSO THAT I BELONG TO JAT & Maharaja Surajmal KA VANSHEJ]
 
महान महाराजा सूरजमल, जाट प्लेटो की पुण्यतिथि पर उनको शत शत नमन।

मीरबख्शी गाजीउद्दीन खां के नेतृत्व में मराठा-मुगल-राजपूतों की सम्मिलित शक्ति सन् 1754 में सूरजमल के छोटे किले कुम्हेर तक को भी नहीं जीत पाई । सन् 1757 में नजीबुद्दौला द्वारा आमंत्रित अब्दाली भी अपने अमानवीय नरसंहार से
सूरजमल की शक्ति को ध्वस्त नहीं कर सका । देशद्रोही नजीब ने उस समय वजीर गाजीउद्दीन खां और मराठों के कोप से बचने
के लिए अब्दाली को हिन्दुस्तान पर आक्रमण करने के लिए सन् 1759 में पुनः आमंत्रित किया था । पानीपत के अंतिम युद्ध से पूर्व बरारी घाट के युद्ध में मराठों की प्रथम पराजय के बाद सूरजमल के कट्टर शत्रु वजीर गाजीउद्दीनखां ने भी भागकर जाटों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था ।

वेंदेल के अनुसार 'मुगल अहंकार की इतनी कठोर और इतनी सटीक पराजय इससे पहले कभी नहीं हुई थी' । वस्तुतः मुगल सत्ता का गर्वीला और भयावह दैत्य धराशायी हो चुका था जिसके अवशेषों पर महाराजा सूरजमल के नेतृत्व में विलास और आडंबर से दूर, कर्मण्य, शौर्यपरायण, निर्बल की सहायक, शरणागत की रक्षक, प्रजावत्सल, हिन्दू-मुस्लिम एकता की प्रतीक, राष्ट्रवादी जाट-सत्ता की स्थापना हुई । [1]

धन्य हैं ऐसे महान वीर।
 
Instead of getting high, we should learn and walk on high path created by Maharaja Suraj mal, greatest respect the ever existing soul.
 
Back
Top