Mahendra Singh Tikait is no more

हमने एक महान नेता को खो दिया है भगवान उनकी आत्मा को शांति दे
 
किसानों का अदब करना सिखाता था सियासत को,

गरीबों की मदद करने को कुछ सरकार आती थी।।

तुम्हारी इक सदा सुनकर सिंहासन डोल जाते थे,

तुम्हारे तल्ख तेवर से हुकूमत कांप जाती थी।।

सिसौली का एक सीधा-सादा किसान भीड़ के सामने अपनी कमर पर हाथ रखकर खड़ा होता था और बात शुरू करता था इस जुमले के साथ कि 'ऐसी है बात, इबजा यू सरकार नू नी मान्ने वाली'। फिर चाहे बात कैसी भी हो उसकी गूंज दिल्ली और लखनऊ तक पहुंचती थी। इस खांटी किसान ने खेत खलियानों में ऐसी अलख जगाई कि मुजफ्फरनगर की सिसौली किसान आंदोलन की राजधानी बन गई। उन्होंने सियासत को करवे से पानी पिलाकर किसानों के दर्द का अहसास भी कराया। बहरहाल, सियासत के तमाम कलंदर किसान भवन की चौखट पर हाजिरी लगाने आते रहे।

सही मायने में खेत-खलियान के फकीर थे महेंद्र सिंह टिकैत। जो अपनी फकीरी, सादगी और साफगोई से शहंशाहों के तख्त ओ ताज वक्त वक्त पर हिलाते रहे। दरअसल, महेंद्र सिंह टिकैत जैसे लोग इतिहास का वो कड़वा सच रहे हैं, जो जाहिर तौर पर तो जुबान पर अपनी कड़वाहट छोड़ता है, लेकिन उसका फायदा और बेलागपन पूरा समाज अपनी आंख से देखता है। टिकैत ने यह साबित करके दिखाया कि जब पढ़े लिखे रहनुमा बदजुबान और बेईमान हो जाते हैं तो गरीब और जुल्मजदा आवाम ऐसे ईमानदार और सच्चे दिल के लोगों पर भरोसा करने लगता है, जिनके कपड़े तो रहनुमाओं की तरह झक सफेद नहीं होते लेकिन उनका दिल चांद से ज्यादा रोशन होता है। टिकैत ने हालांकि कोई बड़ी तालीम हासिल नहीं की लेकिन अपनी सादगी और साफगोई के कारण खुद में एक ऐसी यूनिवर्सिटी बन गए जिसने सिसौली को किसान, गरीब और मजदूरों की राजधानी बना दिया। उन्होंने अपनी ठेठ भाषा में सरकारों को हमेशा ललकारा। यह जुबान इतनी असरदार थी कि अखबारनवीस भी उनके भाषण को उनकी ठेठ भाषा में हूबहू छापते थे। खासकर उनकी बोलचाल में इतना लाडलापन था कि उनके पत्रकारों की बाबत इस जुमले कि 'पेड़ से लटकाकर टांगें झांगदूंगा' पर खुद अखबारी दुनिया के लोग ठहाका लगाते थे। हालांकि पल भर में ही वो कहते 'इन्हें रोट्टी हलवा खिलवा दो भाई'।

टिकैत ने अपनी खेत खलियान की भाषा में अंग्रेजी में सोचने वाले लोगों को न सिर्फ हिंदुस्तानियत की तहजीब का सबक पढ़ाया, बल्कि अपने वक्त के धुरंधरों को सादगी और साफगोई के चलते 'पैनी की ठोड़' के मायने समझने पर मजबूर कर दिया।

टिकैत अब इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन उन सरीखे लोगों की सोच न जाने कितने सीधे सादे गांव के लोगों के अंदर मौजूद है। ये सोच जब जब बेदार होगी तब तब टिकैत का पुनर्जन्म होता रहेगा।


भगवान उनकी आत्मा को शांति दे
 
He will definitely rest in peace and have awaken many souls as put by someone, i was very surprised to know that nor Ajit Singh and neither Jayant went to his funeral. what was even more surprising, Ajit singh was in Chennai attending the program of his Jaya amma.
 
View attachment 11828ajit singh ne hamesha unke har andolan ki ma behn ki..ajit singh ne kabhi bhi nahi chaha ke uttar pradesh mein koi aur jat rajnitik aur gair ranjnitik roop se ubhrey. Chahe kisan andolan ho ya jat aarakshan andolan ho ajit singh & family ne yahi chaha ke woh hi waha neta bane rahe aur jat ko "aaloo" 'pyaaj" ki tarah bechtey rahe.
Muje nahi lagta woh tikaitji ke tervi par bhi jaayenge.
 
He was the undisputed king of farmers .His work's will be remembered forever .

Chaudhary Sahab jaise log marte nahi....Amar ho jate hai...Itihass marte nahi.....wo to bharat ka wo itihass hai jo khabi bhulaya nahi ja sakega...Kissano ka ithass main unka naam sada bade he aadar ke saath likya jayga..

Even when the PM Indra kumar gujral came to sisauli ,to humare baba nai karwe sai pani pilaya tha .

He sacrificed his whole life for farmers .
 
विकी पेज पर एडवांस मे ही छोटे बड़े सब जाट दिग्गजों के जन्म दिन और पुण्य तिथि लिख दी जाती है , पर अफसोस की जाटलैंड पर किसी ने भी चौधरी टिकैत को उनकी पहली बरसी पर याद नहीं किया ,

/

/

चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर मंगलवार को शोरम गांव में श्रद्धांजलि सभा और हवन-यज्ञ हुआ। विभिन्न गांवों से आए हजारों किसानों ने महायज्ञ में आहुति देकर बाबा टिकैट को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रीय किसान नेता एवं बालियान खाप के चौधरी स्व. महेंद्र सिंह टिकैत की प्रथम पुण्यतिथि पर मंगलवार को वैदिक कन्या महाविद्यालय के प्रांगण में सबसे पहले शांति यज्ञ किया गया। श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए भाकियू अध्यक्ष व बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि आज यदि किसानों का उत्पीड़न हो रहा है तो उसके जिम्मेदार भी खुद किसान हैं, क्योंकि वे भाकियू संगठन भी हैं और पदाधिकारी भी। न तो संगठन में कोई कमी है और न पदाधिकारी में, कमी है तो सिर्फ मन स्वच्छ होने की।

पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि देश की आजादी के बाद चौधरी चरण सिंह, चौधरी देवीलाल के बाद भाकियू नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने अराजनैतिक रहकर किसानों की आवाज को हुकूमत तक पहुंचाया।

यज्ञमान सर्वखाप मंत्री सुभाष बालियान रहे। श्रद्धांजलि सभा को पूर्व सरपंच किरणपाल सिंह, चौधरी इकबाल सिंह, सूरजमल, तपेसिंह, बुद्धसिंह, हरपाल सिंह, संजय सिंह, राजपाल सिंह आदि ने संबोधित किया। वहीं अनुज बालियान, सतबीर सिंह, डा.सत्यवीर आर्य, दरियाव सिंह, बीर सेन, बिजेंद्र सिंह, राजकुमार, गौरव टिकैत, चंद्रपाल सिंह आदि ग्रामीण मौजूद रहे।

भावुक हो गई प्रकाशवती

बाबा टिकैत की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में 102 वर्षीय वृद्धा हरसौली निवासी प्रकाशवती आकर्षण का केंद्र रहीं। भावुक होकर प्रकाशवती ने बताया कि जिन हाथों से उन्होंने चौधरी टिकैत का लालन-पालन किया, उन्हीं हाथों से तेजस्वी पुत्र को श्रद्धांजलि देनी पड़ रही है। इतना कहकर प्रकाशवती की आंखों से आंसू बह निकले। वह हरसौली थांबेदार चौधरी तपे सिंह की माता हैं। बाल्यकाल में चौधरी टिकैत का लालन-पालन हरसौली गांव में इन्हीं के यहां रहकर हुआ। टिकैत प्रकाशवती को मां कहकर पुकारते थे।

सामाजिक बुराइयों पर चिंतन

श्रद्धांजलि सभा में चौधरी नरेश टिकैत की मौजूदगी में खाप के जिम्मेदार चौधरियों ने एकांत में बैठकर समाज में फैली बुराइयों पर चिंतन-मनन किया। इस दौरान बेमेल विवाह पर रोक लगाने, नशाखोरी रोकने के लिए समिति गठन का प्रस्ताव रखा गया।
 
.

In the remembrance of Ch. Tikait, please watch a video clip of an interview of Ch. Tikait. It is available both at YouTube and at MEDIA Section of Jatland -


[video]http://www.jatland.com/forums/media.php?do=details&mid=158[/video]


.
 
विकी पेज पर एडवांस मे ही छोटे बड़े सब जाट दिग्गजों के जन्म दिन और पुण्य तिथि लिख दी जाती है , पर अफसोस की जाटलैंड पर किसी ने भी चौधरी टिकैत को उनकी पहली बरसी पर याद नहीं किया , --------

His name and fame depends on his marvellous contribution and Chaudhary M S Tikait, the uncrowned king of the farmers in general and of the Jats in particular was a living legend in his life time and will remain so for ever.

May his tribe continue to grow and progress! Our respectful tributes...
 
.

In the remembrance of Ch. Tikait, please watch a video clip of an interview of Ch. Tikait. It is available both at YouTube and at MEDIA Section of Jatland -


[video]http://www.jatland.com/forums/media.php?do=details&mid=158[/video] .

Thank you Deswalji for updating the members of the Jatland on the issue. This is one of the finest method of remembering the greats of the community.

If anybody could supply the date of birth of the great Jat Leader.



[[Mahendra Singh Tikait]] (महेन्द्र सिंह टिकैत) (1935- 15 May 2011) was a popular leader of farmers from Uttar Pradesh in India. He was a Jat ofRaghuvansi gotra. He is Choudhary of Baliyan Khap. A resident of village Sisauli of Muzaffarnagar in Uttar Pradesh, Tikait was a "Title" conferred to Head of Baliyan Khap by ruler of Thanesar, Raja Harshavardhana, in 7th century. From the time of Raja Harshavardhana the title 'Tikait' is being used by the Choudhary of Balyan Khap, alongwith his name, way down to generations.

Further, those who are interested to know more about [[Mahendra Singh Tikait]] log in www.jatland.com Wiki pages links given above.
 
Last edited:
चौधरी महेंदर सिंह टिकैत को एक बार साक्षात् देखने का मौका मिला.... बात थी 1996 की जब बंसीलाल सरकार में मधियाली ( सतनाली ) में किसानो पर गोली चलवाई थी..... चौधरी टिकैत बारडा गाँव में रुके.... और बोले गाँव की चौपाल में रुकुंगा न की किसी के घर.....छः फुट से ज्यादा की लम्बाई.... लम्बा चौड़ा शरीर... कड़क आवाज़... और हाँ सीधे साधे कपडे ( ना की आज के नेताओं की तरह)... शायद दो तीन दिन से बदले भी ना हों..... होका पीने के शौक़ीन ,...... हज़ारों यू पी के किसानो की फौज्ज साथ में ..... वापसी जाते समय मरे गाँव में रुके थे होका पीने बिरादरी का...........

महान आत्मा को शत शत नमन...
 
चौधरी महेंदर सिंह टिकैत को एक बार साक्षात् देखने का मौका मिला.... बात थी 1996 की जब बंसीलाल सरकार में मधियाली ( सतनाली ) में किसानो पर गोली चलवाई थी..... चौधरी टिकैत बारडा गाँव में रुके.... और बोले गाँव की चौपाल में रुकुंगा न की किसी के घर.....छः फुट से ज्यादा की लम्बाई.... लम्बा चौड़ा शरीर... कड़क आवाज़... और हाँ सीधे साधे कपडे ( ना की आज के नेताओं की तरह)... शायद दो तीन दिन से बदले भी ना हों..... होका पीने के शौक़ीन ,...... हज़ारों यू पी के किसानो की फौज्ज साथ में ..... वापसी जाते समय मरे गाँव में रुके थे होका पीने बिरादरी का...........

महान आत्मा को शत शत नमन...

Sahi baat kahi aapne, woh lambe sharir ke dhani the; lekin iske saath hee unke vichoron kee lambai to aur bhee jyada thee. Kisanon ke sache hamdard the woh. Sat sat naman mahan atma , Tikait Ji ko.
 
Back
Top