Mehnat se darta nahi hoon.....

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indian4529

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मैं तो बस काम करता नही हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

खेत लूँ, मेड़ बाँधूं, जुताई करूँ, बीज ढ़ूँढ़ूँ, करूँ फिर बुआई।
टकटकी बाँधकर फिर तकूँ आसमाँ, हो न बारिश करूँ फिर सिंचाई।

फिर कटाई-मड़ाई का झंझट करूँ, व्यर्थ इसमें उतरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

पहले भटकूँ सड़क पर इधर या उधर, कोई खोखा या दूकान पाऊँ।
फिर भरूँ उसमें कुछ, फिर नुमाइश करूँ, फिर इशारों से ग्राहक बुलाऊँ।

उनसे सौदा करूँ, यानी किचकिच करूँ, मतलबी भाव भरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

नौकरी में फँसूं तो भी गड़बड़ बड़ी, चापलूसी करूँ, जी हुजूरी।
कोई मस्ती करे, कोई कुछ मत करे, किन्तु हमको तो खटना ज़रूरी।

कोई शिकवा करूँ तो बुराई मिले, मैं यहाँ भी ठहरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

सोचा नेता बनूँ, पेशा अच्छा मगर, कम्प्टीशन बहुत बढ़ गया है।
जब से जनता में है जागरण आ गया, भाव उनका बहुत चढ़ गया है।

एक वोटर दिखे, झूठे वादे करूँ, मैं वचन से मुकरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।
 
मैं तो बस काम करता नही हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

खेत लूँ, मेड़ बाँधूं, जुताई करूँ, बीज ढ़ूँढ़ूँ, करूँ फिर बुआई।
टकटकी बाँधकर फिर तकूँ आसमाँ, हो न बारिश करूँ फिर सिंचाई।

फिर कटाई-मड़ाई का झंझट करूँ, व्यर्थ इसमें उतरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

पहले भटकूँ सड़क पर इधर या उधर, कोई खोखा या दूकान पाऊँ।
फिर भरूँ उसमें कुछ, फिर नुमाइश करूँ, फिर इशारों से ग्राहक बुलाऊँ।

उनसे सौदा करूँ, यानी किचकिच करूँ, मतलबी भाव भरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

नौकरी में फँसूं तो भी गड़बड़ बड़ी, चापलूसी करूँ, जी हुजूरी।
कोई मस्ती करे, कोई कुछ मत करे, किन्तु हमको तो खटना ज़रूरी।

कोई शिकवा करूँ तो बुराई मिले, मैं यहाँ भी ठहरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

सोचा नेता बनूँ, पेशा अच्छा मगर, कम्प्टीशन बहुत बढ़ गया है।
जब से जनता में है जागरण आ गया, भाव उनका बहुत चढ़ गया है।

एक वोटर दिखे, झूठे वादे करूँ, मैं वचन से मुकरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

waisse to hadiyyan aapki kar rahi hi kirtan
fir bhi body dikhane se aap hichakte nahi hain
chahe koi aapko sir se utha -utha ke patke
fir bhi lalkarne se aap darte nahi hain........

gyani ji yeh 4 line aur add kr dyo:rock
 
Waah Waah Amrik ji ... good good :)!

मैं तो बस काम करता नही हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

खेत लूँ, मेड़ बाँधूं, जुताई करूँ, बीज ढ़ूँढ़ूँ, करूँ फिर बुआई।
टकटकी बाँधकर फिर तकूँ आसमाँ, हो न बारिश करूँ फिर सिंचाई।

फिर कटाई-मड़ाई का झंझट करूँ, व्यर्थ इसमें उतरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

पहले भटकूँ सड़क पर इधर या उधर, कोई खोखा या दूकान पाऊँ।
फिर भरूँ उसमें कुछ, फिर नुमाइश करूँ, फिर इशारों से ग्राहक बुलाऊँ।

उनसे सौदा करूँ, यानी किचकिच करूँ, मतलबी भाव भरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

नौकरी में फँसूं तो भी गड़बड़ बड़ी, चापलूसी करूँ, जी हुजूरी।
कोई मस्ती करे, कोई कुछ मत करे, किन्तु हमको तो खटना ज़रूरी।

कोई शिकवा करूँ तो बुराई मिले, मैं यहाँ भी ठहरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।

सोचा नेता बनूँ, पेशा अच्छा मगर, कम्प्टीशन बहुत बढ़ गया है।
जब से जनता में है जागरण आ गया, भाव उनका बहुत चढ़ गया है।

एक वोटर दिखे, झूठे वादे करूँ, मैं वचन से मुकरता नहीं हूँ।
वैसे मेहनत से डरता नहीं हूँ।
 
waisse to hadiyyan aapki kar rahi hi kirtan
fir bhi body dikhane se aap hichakte nahi hain
chahe koi aapko sir se utha -utha ke patke
fir bhi lalkarne se aap darte nahi hain........

gyani ji yeh 4 line aur add kr dyo:rock
भाई जी आप ने तो कमाल का लिखा है आप को साधूवाद
इसी तरह से मार्गदर्शन करते रहे
 
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