Mera Intzaar Karna !

vijay

Active member
मेरा इंतज़ार करना


वादा वो मोहब्बत का मैं निभाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

ज़माने से अलग पह्चान है मेरी
दुनियाँ की भीड में खोया नहीं हूँ
जुदाई की रात चाहे लम्बी सही
सुबह के इंतज़ार में सोया नही हूँ
हर पल बस तुमको ही याद किया
आँखें नम हुईं लेकिन रोया नही हूँ
कैसे गुजरे थे ये दिन मैं सुनाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

व्यस्त हूँ ज़िन्दगी की उलझनों में
मत सोचना कि तुमसे प्यार नही है
वादा करके जुबान से मुकर जाऊँ
ऐसे तो मिले मुझे संस्कार नहीं है
फ़ैसला मेरा जमाने ने सुन लिया
तुम बिन ज़िन्दगी स्वीकार नहीं है
मैने तुमको चाहा है तुमको पाऊँगा एक दिन ॥
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

आज हम और तुम इतने दूर सही
यह तो अपनी किस्मत का लेखा है
हमें मिलने से कोई न रोक पायेगा
मेरे हाथ में तुम्हारे नाम की रेखा है
तुम मंज़िल हो मेरे इस सफ़र की
कितनी बार तुम्हें सपने में देखा है
सपनों को हकीकत में बदल जाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

दिल की हर आरज़ू को अंजाम दूँगा
तुम अधूरी हसरतों का मलाल रख्नना
उदास रहने से झुर्रियाँ पड जाती हैं
अपने हसीन चेहरे का खयाल रखना
ज़िन्दगी छोटी सी है और काम ज्यादा
मेरे लिये बचा कर कुछ साल रख्नना
अपनी ज़िन्दगी तुम पर मैं लुटाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊंगा एक दिन ॥

सच्चे दिल की सदायें कुबूल होती हैं
खुदा को तुम दुआयें तमाम लिखना
दीवानापन अगर हद से गुजरने लगे
अपनी चाहत पर कोई कलाम लिखना
जब दिल मिले हैं तो हम भी मिलेंगे
मेरा नाम जोडकर अपना नाम लिखना
तुमको ही अपनी पह्चान मैं बनाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

वह सवेरे का सूरज जब भी निकलेगा
जुदाई की ये काली रात गुजर जायेगी
उतरेगी समंदर में जब अपनी किश्ती
मंज़िल तक छोडने खुद लहर जायेगी
साथ मिलकर किसी दिन ढूँढ ही लेंगे
ये खुशी हमसे बच कर किधर जायेगी
हँसी तुम्हारे होठों पर मैं सजाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

हमसफ़र बन कर हम जब भी चलेंगे
मेरे हाथों में अपना हाथ थमाना होगा
ज़िन्दगी के तन्हा पथरीले रास्तों पर
मेरे हर कदम से कदम मिलाना होगा
वह दिन आयेगा मुझपे यकीन करना
बाँहों में आस्माँ कदमों में जमाना होगा
जमाने को तुम्हारे आगे मैं झुकाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

बढते हुए कदम अब नहीं रुकने वाले
तीर कब का निकल चुका है कमान से
चाहे जैसा भी हो अंजाम देखा जायेगा
मोहब्बत नहीं डरती किसी इम्तहान से
जमीन वाले बस देखते ही रह जायेंगे
जब माँग लाऊँगा मैं तुम्हे आसमान से
विजय तुम्हारी किस्मत में लिख जाऊँगा एक दिन ॥
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥
 
Last edited:
Vijay very good composition after a long time:) Now take this thread forward
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

हमसफ़र बन कर हम जब भी चलेंगे
मेरे हाथों में अपना हाथ थमाना होगा
ज़िन्दगी के तन्हा पथरीले रास्तों पर
मेरे हर कदम से कदम मिलाना होगा
वह दिन आयेगा मुझपे यकीन करना
बाँहों में आस्माँ कदमों में जमाना होगा
जमाने को तुम्हारे आगे मैं झुकाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

बढते हुए कदम अब नहीं रुकने वाले
तीर कब का निकल चुका है कमान से
चाहे जैसा भी हो अंजाम देखा जायेगा
मोहब्बत नहीं डरती किसी इम्तहान से
जमीन वाले बस देखते ही रह जायेंगे
जब माँग लाऊँगा मैं तुम्हे आसमान से
विजय तुम्हारी किस्मत में लिख जाऊँगा एक दिन ॥
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥
[/color][/QUOTE]
 
आज हम और तुम इतने दूर सही
यह तो अपनी किस्मत का लेखा है
हमें मिलने से कोई न रोक पायेगा
मेरे हाथ में तुम्हारे नाम की रेखा है
तुम मंज़िल हो मेरे इस सफ़र की
कितनी बार तुम्हें सपने में देखा है
सपनों को हकीकत में बदल जाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥



very nice vijay jee...bahut hi badiya line hain...!
apki shyari k kayal hai hum to,,bahut khoob
 
Na unhone kabhi kiya tha vaada
na kabhi humne hi zikr kiya.
Sirf itna soch kar
ki unhe bewafai nahi aati.

Jab manzil ka khud nahi tha pata
to humsafar ki talaash kaisi.
Na hum unse ummeed rakhte,
na unhe bewafai ki tohmat uthani padti.

Ab akela rah gaya hoon
to unhe kya dosh dena.
Khud bin raah ke chala tha
to kaanton ko kya kosna.

Par ik baat ka ab bhi hosh hai;
chahe manzil unki aur hi hai,
par is raah par jo ab chal pada hoon
kahin na kahin to unse phir mulakaat hogi!
 
Raah makhmali ghas ho
Aisi chahat nahi mujhe
Kankro bhari raah par
Mein daud sakata hoon

Aaap mujhe phool bhejen
Aisi tamanna nahi mujhe
Kanto mein bhi phool
Main dhund sakata hoon


Suna to hamne bhi hai dost
ki saath dena mushkil hai.
magar naaummidgee itni hogi
iska aalam hi na tha


chale to ham bhi the yeh sochkar
ki gar manzil tak na sahi
kuchh der to saath hoga.
lekin malum agar yeh hota
ki humsafar saath hi na dega
to shaayad manzil hamari, koi aur hi hoti.
 
Aap mere se rahen chahe jitani door
khwab mein aana bas kijiye manjoor
chahata hoon aap ek vaada to karen
phir bhale hi aap mere sath na chalen.



Yeh dil aapko bhula nahi sakta,
aisa kyo he bata nahi sakta,
muskil to yeh hai ki aapko yakin nahi,
aur mai dil chir ke dikha nahi sakta


Dil ko kisi anjaane se mod pe laakar wo
tanhaa toot jaane ko chhod gaye hain
vaapas lautoon yaa aage chaloon mai kya karoon
wo meri har raah ko andhere se jod gaye hain..!!
 
I hope the one addressed gets to read this fantastic composition.
All the very best :)!


विजय तुम्हारी किस्मत में लिख जाऊँगा एक दिन ॥
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥
 
मेरा इंतज़ार करना


हँसी तुम्हारे होठों पर मैं सजाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥


तेरी बातों पर एतबार करते हैं
इसलिए ही तो तेरा इंतज़ार करते हैं
हम कभी मिले नही
फिर भी तुझसे बहुत प्यार करते हैं
तेरे वादे पर ऐतबार करते हैं
इसलिए तेरा इंतज़ार करते हैं
 
मेरा इंतज़ार करना


वादा वो मोहब्बत का मैं निभाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

ज़माने से अलग पह्चान है मेरी
दुनियाँ की भीड में खोया नहीं हूँ
जुदाई की रात चाहे लम्बी सही
सुबह के इंतज़ार में सोया नही हूँ
हर पल बस तुमको ही याद किया
आँखें नम हुईं लेकिन रोया नही हूँ
कैसे गुजरे थे ये दिन मैं सुनाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

व्यस्त हूँ ज़िन्दगी की उलझनों में
मत सोचना कि तुमसे प्यार नही है
वादा करके जुबान से मुकर जाऊँ
ऐसे तो मिले मुझे संस्कार नहीं है
फ़ैसला मेरा जमाने ने सुन लिया
तुम बिन ज़िन्दगी स्वीकार नहीं है
मैने तुमको चाहा है तुमको पाऊँगा एक दिन ॥
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

आज हम और तुम इतने दूर सही
यह तो अपनी किस्मत का लेखा है
हमें मिलने से कोई न रोक पायेगा
मेरे हाथ में तुम्हारे नाम की रेखा है
तुम मंज़िल हो मेरे इस सफ़र की
कितनी बार तुम्हें सपने में देखा है
सपनों को हकीकत में बदल जाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

दिल की हर आरज़ू को अंजाम दूँगा
तुम अधूरी हसरतों का मलाल रख्नना
उदास रहने से झुर्रियाँ पड जाती हैं
अपने हसीन चेहरे का खयाल रखना
ज़िन्दगी छोटी सी है और काम ज्यादा
मेरे लिये बचा कर कुछ साल रख्नना
अपनी ज़िन्दगी तुम पर मैं लुटाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊंगा एक दिन ॥

सच्चे दिल की सदायें कुबूल होती हैं
खुदा को तुम दुआयें तमाम लिखना
दीवानापन अगर हद से गुजरने लगे
अपनी चाहत पर कोई कलाम लिखना
जब दिल मिले हैं तो हम भी मिलेंगे
मेरा नाम जोडकर अपना नाम लिखना
तुमको ही अपनी पह्चान मैं बनाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

वह सवेरे का सूरज जब भी निकलेगा
जुदाई की ये काली रात गुजर जायेगी
उतरेगी समंदर में जब अपनी किश्ती
मंज़िल तक छोडने खुद लहर जायेगी
साथ मिलकर किसी दिन ढूँढ ही लेंगे
ये खुशी हमसे बच कर किधर जायेगी
हँसी तुम्हारे होठों पर मैं सजाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

हमसफ़र बन कर हम जब भी चलेंगे
मेरे हाथों में अपना हाथ थमाना होगा
ज़िन्दगी के तन्हा पथरीले रास्तों पर
मेरे हर कदम से कदम मिलाना होगा
वह दिन आयेगा मुझपे यकीन करना
बाँहों में आस्माँ कदमों में जमाना होगा
जमाने को तुम्हारे आगे मैं झुकाऊँगा एक दिन
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥

बढते हुए कदम अब नहीं रुकने वाले
तीर कब का निकल चुका है कमान से
चाहे जैसा भी हो अंजाम देखा जायेगा
मोहब्बत नहीं डरती किसी इम्तहान से
जमीन वाले बस देखते ही रह जायेंगे
जब माँग लाऊँगा मैं तुम्हे आसमान से
विजय तुम्हारी किस्मत में लिख जाऊँगा एक दिन ॥
तुम मेरा इंतज़ार करना मैं आऊँगा एक दिन ॥



Heart touching .....:) on V-DAY
 
Vijay very good composition after a long time:) Now take this thread forward

Thanx Sunita,

I will try to carry on from here but i afraid that people at Jatland are not that excited about Poetry like they used to be in past (at the time of "Wafa Aur Mohabbat").
 

very nice vijay jee...bahut hi badiya line hain...!
apki shyari k kayal hai hum to,,bahut khoob

Thanx for the appreciation Raj,
You seems to be a poetry fan as i saw your so many posts and read most of them. Keep contributing. :)

Heart touching .....:) on V-DAY

On V-Day, yes it is but it's just a coincidence that i completed it last night and posted. Sometimes things happens just at the right time.

Thanx for appreciation, Vivek :)
 

Uske dil mein utar kar dekha
jo mila woh tha kuch sulagta sa
Adh-bujha mohabbat ka tukda
kuch dhuan,rakh ek bachi dhadkan
Kuch sun-ne ko tarasta
kuch kahney ko betaab
Na samay mere pass
na kabhi hoga uske pass

Jo alag hon to lagta hai
ek hi manzil ek armaan hai
milley to lage ek manjar anjaan hai
ek jana pahchana sa ajnabi
door hai to najdeeki ka ahsas hai
Dono ko pata hai ke char aankhon mein
anek nahi ek hi khwab hai
Mai jaan kar bhi anjaan hoon
Woh shayad isi liye pareshan hai






Thanx Sunita,

I will try to carry on from here but i afraid that people at Jatland are not that excited about Poetry like they used to be in past (at the time of "Wafa Aur Mohabbat").
 
Last edited:
I hope the one addressed gets to read this fantastic composition.
All the very best :)!

I consider poetry as a work of art and that is always addressed to everybody. It depends on person to person that how much they feel or understand the thoughts of the creation. :)

Thanx for the appreciation/Wishes ;), Sumit.
 
Poetry doesn't need excitement of people....it needs writer's excitement. Interested people will always follow you:)
Thanx Sunita,

I will try to carry on from here but i afraid that people at Jatland are not that excited about Poetry like they used to be in past (at the time of "Wafa Aur Mohabbat").
 
तेरी बातों पर एतबार करते हैं
इसलिए ही तो तेरा इंतज़ार करते हैं
हम कभी मिले नही
फिर भी तुझसे बहुत प्यार करते हैं
तेरे वादे पर ऐतबार करते हैं
इसलिए तेरा इंतज़ार करते हैं

बहुत बढिया लिखा है योगेन्द्र जी :)


हम तो आज उनसे ही दिल लगा बैठे
आज तक जिनसे कभी मिले ही नहीं ।

अक्सर आते जाते रह्ते हैं गुलशन में
चाह्त के ये फ़ुल कभी खिले ही नहीं ॥
 

Ek hi baar ka milna itna bhari padd gaya
apna hi dil saath chhod ke pahlu badal gaya
ye kaisi wafa aur kaun hai wafadar
ruswa huyi tamanna royi mohabat jar-jar
बहुत बढिया लिखा है योगेन्द्र जी :)


हम तो आज उनसे ही दिल लगा बैठे
आज तक जिनसे कभी मिले ही नहीं ।

अक्सर आते जाते रह्ते हैं गुलशन में
चाह्त के ये फ़ुल कभी खिले ही नहीं ॥
 
Nice !

Uske dil mein utar kar dekha
jo mila woh tha kuch sulagta sa
Adh-bujha mohabbat ka tukda
kuch dhuan,rakh ek bachi dhadkan
Kuch sun-ne ko tarasta
kuch kahney ko betaab
Na samay mere pass
na kabhi hoga uske pass

Jo alag hon to lagta hai
ek hi manzil ek armaan hai
milley to lage ek manjar anjaan hai
ek jana pahchana sa ajnabi
door hai to najdeeki ka ahsas hai
Dono ko pata hai ke char aankhon mein
anek nahi ek hi khwab hai
Mai jaan kar bhi anjaan hoon
Woh shayad isi liye pareshan hai

Nice lines, Sunita :)


वक्त के साये जब हमपर मेहरबान हुए
कोई अजनबी हमारे दिल-ओ-जान हुए ।
रोज़ करते जिनको भूल जाने की बात
’विजय’ उनकी ही याद में परेशान हुए ॥
 
ek hi baar ka milna itna bhari padd gaya
apna hi dil saath chhod ke pahlu badal gaya
ye kaisi wafa aur kaun hai wafadar
ruswa huyi tamanna royi mohabat jar-jar

दिल जब से बेकाबू हुआ तमन्नाओं के नाम पर
हम अपने जख्मों को खुद ही सहलाया करते हैं
 
Really gud....

hiiiiiii....all...

read ur dese...shayrii's.....

Really toooooooooooooooo Gud.....!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!:rock

Keep it Up...!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!:)
 
Jakhmo ko sahlaney ke bahaney dil ko bahlaya kartey hain
mita ke mohabat ke naam par ilzam unn pe dharte hain
दिल जब से बेकाबू हुआ तमन्नाओं के नाम पर
हम अपने जख्मों को खुद ही सहलाया करते हैं
 
Back
Top