meraa jeevan(ek beti ki aatamkathaa)

ravinderjeet

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‎15 june- i get attached with ovary.
17 july- i am tissue now.
30 aug- mujhe maa se khana mila.
15 sept- maa papa se boli "wo papa banenge".

mom-dad are very happy..

20 oct- mera dil jor-jor se dhadak raha hai.
4 feb- i have little hands, legs, head and stomach.
4 mar- today i stepped in this world for the first time... it was beautiful!

wow!! i am a girl..

5 mar- my mom and dad killed me.

my only crime was that i was a girl...why ??

............................................................

female infanticide still continues to grow in india. according to the census of 1991, it was noticed that out of every 1000 female births, 443 girls were killed as soon as they were born. in a survey conducted in tamil nadu, 1250 hindu families were studied. the results were astonishing: "740 had only one girl child and 249 agreed directly that they had done away with the unwanted girl child. 98 had gone for abortion. only 154 families had 2 girl children....

five million girls were eliminated between 1986 and 2001 because of foetal sex determination done by unethical medical professionals. the rate of extermination continues to increase after census 2001.sex determination and sex selective abortion was traced to an amritsar clinic in 1979 and has now grown into an rs.1000 -crore country wide industry.

in 1994 parliament responded to the misuse of prenatal diagnostic techniques by enacting pndt act. however it was not implemented. the supreme court directed the government to implement the pndt act in may 2001.later it was amended to make it more stringent. the health ministry has to be more proactive to stop female foeticide...
 
Maharashtra might claim to be among the most progressive states in the country, but the girl child continues to remain under threat. The latest figures available with the state government indicate that the sex ratio is 908 per 1,000 boys in the 0-6 age group, a drop from the 2001 census figure of 913 girls per 1,000 boys. The sex ratio is measured by the number of births of a girl per thousand boys in each district.THOUGH MAHARASHTRA govt wants ban on standalone and mobile sonography units.
 
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‎15 june- i get attached with ovary.
17 july- i am tissue now.
30 aug- mujhe maa se khana mila.
15 sept- maa papa se boli "wo papa banenge".

mom-dad are very happy..

20 oct- mera dil jor-jor se dhadak raha hai.
4 feb- i have little hands, legs, head and stomach.
4 mar- today i stepped in this world for the first time... it was beautiful!

wow!! i am a girl..

5 mar- my mom and dad killed me.

my only crime was that i was a girl...why ??

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QUOTE]Bhai saab aapki post padhne ke baad lagta h ki insan ab insan na rehkar shaitan ho gya h.Ek punjabi geet yad aa gaya Sarbjeet cheema ka NA MARI-
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face book pe thi ,lekhak koon s beraa naa c/p karoon su.

कोर्ट में एक कसूता मुकदमा आया
एक सिपाही एक कुत्ते नै बांधैं ल्याया
सिपाही नै जब कटघरे में आ कै कुत्ता खोल्या
कुत्ता रहग्या चुपचाप, मुँह-तैं कुछ ना बोल्या
...
नुकिले दाँदां में कुछ खून-सा नज़र आवै था
चुपचाप था कुत्ता, किसे तैं ना नजर मिलावै था
होया खड़या एक वकील
देण लाग्या दलील
बोल्या, यू ज़ालिम कसूता सै
जज सॉब यू कुत्ता सै
इसनै जो करणी कमाई सै
देख कै इन्सानियत घबराई सै
क्रुर सै, निर्दयी सै, इसनै घणी तबाही मचाई सै
दो दिन पहल्या जन्मी एक छोरी, आपणे दाँदां तैं
खाई सै
इब कतई ना देखो बाट
उतारो इसनै मौत के घाट
जज की आँख होगी लाल
तन्नैं क्यूँ खाई कन्या इसे ढाल
हुक्म सै इनै जिन्दा रहण ना दयो
कुत्ते का वकील बोल्या, इसन कुछ कहण तो दयो
फेर कुत्ते न मुँह खोल्या
सहज दे-सी वो बोल्या
हाँ, मन्नै वा कन्या खाई सै
अपणी कुत्तानियत निभाई सै
कुत्ते का धर्म सै ना दया दिखाणा
माँस चाहे किसा-ए हो, ओ-ए खा जाणा
पर मैं दया-धर्म तैं दूर नही
खाई तो सै, पर मेरा कसूर नही
मन्नै बेरा सै, जब वा छोरी गई बगाई थी
और कोय नही, उसकी माँ वाएं फैंकण आई थी
जब मैं उस कन्या के गया पास
उसकी आँख्यां मैं देख्या भोला विश्वास
जब वा मेरी जीभ देख कै मुस्काई थी
कुत्ता सूँ, पर उसनै मेरे अन्दर इन्सानियत जगाई
थी
मन्नै सूंघ कै नै पैड, वो घर टोया था
जित माँ उसकी थी, अर बाबू भी सोया था
मन्नै कू-कू करकै वा माँ जगाई
पूछा तन्नै, कन्या क्यों बगाई
चॉल, मेरी गैल, उसनै लै कै आ
भूखी सै वा, उसनै अपणा दूध पिला
माँ सणते ही रोण लागगी
आपने दुखड़े धोण लागगी
बोली, कोन्या लाऊँ अपणै कॉलजे के टुकड़े नै
क्यूँ कर खोल बताऊँ अपने दिल के दुखड़ै नै
मेरे धोरै पहल्याँ ही चार छोरी सैं
दो नै बुखार सै, अर दो चटाई पै सो री सैं
मेरी सासू मारै सै तान्यां की मार
मन्नै पीटण आया मेरा भरतार
बोल्या, फेर छोरी ले आई
क्यूं कर ज़ांगी ये सारी ब्याही
वंश की तन्नै काट दी बेल
जा खत्म कर दे इसका खेल
माँ सूँ, पर थी मेरी लाचारी
ज्यातैं फैंक आई, छोरी प्यारी
कुत्ते का गॅला भरग्या
पर ब्यान वो पूरे करग्या
बोल्या, मैं फेर उल्टा आग्या
दिमाग पै मेरे धूम्मां छाग्या
वा छोरी गुट्ठा चूमण लाग री
हाँसी न्यू जाणे मेरी बाट में जाग री
कॉलजै पै धर लिया मन्नै पात्थर
थर-थर काँपयां मेरा ज़ॉथर
बोल्या, ऐ बोअली, जी कै, के करैगी
दूध नही, जहर सै, पी कै, के करैगी
हाम कुत्तां नै करे सै बदनाम
म्हारै तैं घिणौने करैं सैं काम
कदे ज़िन्दी अरक दे पेट मैं मरवावै सैं
अर आपणै आप नैं इन्सान बतावै सैं
मेरे गात मैं भय करगी उसकी मुस्कान
मन्नै इतणा तो लिया था ज़ॉण
जो समाज इसतैं नफरत करै सै
कन्या हत्या-सी गन्दी हरकत करै सै
उड़े तैं इसका जाणा आच्छा
इसका तो मर जाणा आच्छा
थाम लटकाओ मन्नै फांसी, चाहे मारो जूत्ते
पर टोह कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते
पर टोह कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते
 
face book pe thi ,lekhak koon s beraa naa c/p karoon su.

कोर्ट में एक कसूता मुकदमा आया
एक सिपाही एक कुत्ते नै बांधैं ल्याया
सिपाही नै जब कटघरे में आ कै कुत्ता खोल्या
कुत्ता रहग्या चुपचाप, मुँह-तैं कुछ ना बोल्या
...
नुकिले दाँदां में कुछ खून-सा नज़र आवै था
चुपचाप था कुत्ता, किसे तैं ना नजर मिलावै था
होया खड़या एक वकील
देण लाग्या दलील
बोल्या, यू ज़ालिम कसूता सै
जज सॉब यू कुत्ता सै
इसनै जो करणी कमाई सै
देख कै इन्सानियत घबराई सै
क्रुर सै, निर्दयी सै, इसनै घणी तबाही मचाई सै
दो दिन पहल्या जन्मी एक छोरी, आपणे दाँदां तैं
खाई सै
इब कतई ना देखो बाट
उतारो इसनै मौत के घाट
जज की आँख होगी लाल
तन्नैं क्यूँ खाई कन्या इसे ढाल
हुक्म सै इनै जिन्दा रहण ना दयो
कुत्ते का वकील बोल्या, इसन कुछ कहण तो दयो
फेर कुत्ते न मुँह खोल्या
सहज दे-सी वो बोल्या
हाँ, मन्नै वा कन्या खाई सै
अपणी कुत्तानियत निभाई सै
कुत्ते का धर्म सै ना दया दिखाणा
माँस चाहे किसा-ए हो, ओ-ए खा जाणा
पर मैं दया-धर्म तैं दूर नही
खाई तो सै, पर मेरा कसूर नही
मन्नै बेरा सै, जब वा छोरी गई बगाई थी
और कोय नही, उसकी माँ वाएं फैंकण आई थी
जब मैं उस कन्या के गया पास
उसकी आँख्यां मैं देख्या भोला विश्वास
जब वा मेरी जीभ देख कै मुस्काई थी
कुत्ता सूँ, पर उसनै मेरे अन्दर इन्सानियत जगाई
थी
मन्नै सूंघ कै नै पैड, वो घर टोया था
जित माँ उसकी थी, अर बाबू भी सोया था
मन्नै कू-कू करकै वा माँ जगाई
पूछा तन्नै, कन्या क्यों बगाई
चॉल, मेरी गैल, उसनै लै कै आ
भूखी सै वा, उसनै अपणा दूध पिला
माँ सणते ही रोण लागगी
आपने दुखड़े धोण लागगी
बोली, कोन्या लाऊँ अपणै कॉलजे के टुकड़े नै
क्यूँ कर खोल बताऊँ अपने दिल के दुखड़ै नै
मेरे धोरै पहल्याँ ही चार छोरी सैं
दो नै बुखार सै, अर दो चटाई पै सो री सैं
मेरी सासू मारै सै तान्यां की मार
मन्नै पीटण आया मेरा भरतार
बोल्या, फेर छोरी ले आई
क्यूं कर ज़ांगी ये सारी ब्याही
वंश की तन्नै काट दी बेल
जा खत्म कर दे इसका खेल
माँ सूँ, पर थी मेरी लाचारी
ज्यातैं फैंक आई, छोरी प्यारी
कुत्ते का गॅला भरग्या
पर ब्यान वो पूरे करग्या
बोल्या, मैं फेर उल्टा आग्या
दिमाग पै मेरे धूम्मां छाग्या
वा छोरी गुट्ठा चूमण लाग री
हाँसी न्यू जाणे मेरी बाट में जाग री
कॉलजै पै धर लिया मन्नै पात्थर
थर-थर काँपयां मेरा ज़ॉथर
बोल्या, ऐ बोअली, जी कै, के करैगी
दूध नही, जहर सै, पी कै, के करैगी
हाम कुत्तां नै करे सै बदनाम
म्हारै तैं घिणौने करैं सैं काम
कदे ज़िन्दी अरक दे पेट मैं मरवावै सैं
अर आपणै आप नैं इन्सान बतावै सैं
मेरे गात मैं भय करगी उसकी मुस्कान
मन्नै इतणा तो लिया था ज़ॉण
जो समाज इसतैं नफरत करै सै
कन्या हत्या-सी गन्दी हरकत करै सै
उड़े तैं इसका जाणा आच्छा
इसका तो मर जाणा आच्छा
थाम लटकाओ मन्नै फांसी, चाहे मारो जूत्ते
पर टोह कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते
पर टोह कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते


bhai lekhan hai haryanvi kavi Jagbir Rathee........

mere aale e kisse page pe ya group pe dekhi hogi
 
It is much more prevalent in Haryana, and it is very alarming situation. If we compare other states haryana is rich state but still this is happening.
Shame on us.
 
bhai lekhan hai haryanvi kavi Jagbir Rathee........

mere aale e kisse page pe ya group pe dekhi hogi

भाई जब तेरी छापी होड़ थी ते लेखक का नाम ते गेल्याँ छाप्पन की जिम्मेदारी भी तेरी-ए बणे स | ये लिखने वाले का नेतिक दाईत्व बनता हे की वो मूल लेखक का नाम भी साथ में छाप्पे | -----सद- भावनाओं सहित |
 
भाई जब तेरी छापी होड़ थी ते लेखक का नाम ते गेल्याँ छाप्पन की जिम्मेदारी भी तेरी-ए बणे स | ये लिखने वाले का नेतिक दाईत्व बनता हे की वो मूल लेखक का नाम भी साथ में छाप्पे | -----सद- भावनाओं सहित |

bhai kitte naam gela chap ja se.........kite comment mein chap de se.............jo share karti hanna na share ho pata...............

hadde kunsa kisse or ki chiz ne chapan ke pisse mille se..........
 
solid quote bro. it is universal now that where laws are silent, arms are raised.
 
To the point satire.

I would request everybody to see following movies whenever possible. Not everybody can digest 2 to 3 hours for such serious movies but I am sure if you could manage to spare sometime, it would force us to think twice/thrice/multiple times for the cause of Girls'/Women apathy.

1. Matribumi - A nation without women
2. Khuda kae Liye - In the name of God
3. Rivaaj
4. Latest one - BOL ( I am posting link below for complete movie)

http://www.youtube.com/watch?v=sfwuwQCCqPg&feature=related

Regards,
Sunil

face book pe thi ,lekhak koon s beraa naa c/p karoon su.

कोर्ट में एक कसूता मुकदमा आया
एक सिपाही एक कुत्ते नै बांधैं ल्याया
सिपाही नै जब कटघरे में आ कै कुत्ता खोल्या
कुत्ता रहग्या चुपचाप, मुँह-तैं कुछ ना बोल्या
...
नुकिले दाँदां में कुछ खून-सा नज़र आवै था
चुपचाप था कुत्ता, किसे तैं ना नजर मिलावै था
होया खड़या एक वकील
देण लाग्या दलील
बोल्या, यू ज़ालिम कसूता सै
जज सॉब यू कुत्ता सै
इसनै जो करणी कमाई सै
देख कै इन्सानियत घबराई सै
क्रुर सै, निर्दयी सै, इसनै घणी तबाही मचाई सै
दो दिन पहल्या जन्मी एक छोरी, आपणे दाँदां तैं
खाई सै
इब कतई ना देखो बाट
उतारो इसनै मौत के घाट
जज की आँख होगी लाल
तन्नैं क्यूँ खाई कन्या इसे ढाल
हुक्म सै इनै जिन्दा रहण ना दयो
कुत्ते का वकील बोल्या, इसन कुछ कहण तो दयो
फेर कुत्ते न मुँह खोल्या
सहज दे-सी वो बोल्या
हाँ, मन्नै वा कन्या खाई सै
अपणी कुत्तानियत निभाई सै
कुत्ते का धर्म सै ना दया दिखाणा
माँस चाहे किसा-ए हो, ओ-ए खा जाणा
पर मैं दया-धर्म तैं दूर नही
खाई तो सै, पर मेरा कसूर नही
मन्नै बेरा सै, जब वा छोरी गई बगाई थी
और कोय नही, उसकी माँ वाएं फैंकण आई थी
जब मैं उस कन्या के गया पास
उसकी आँख्यां मैं देख्या भोला विश्वास
जब वा मेरी जीभ देख कै मुस्काई थी
कुत्ता सूँ, पर उसनै मेरे अन्दर इन्सानियत जगाई
थी
मन्नै सूंघ कै नै पैड, वो घर टोया था
जित माँ उसकी थी, अर बाबू भी सोया था
मन्नै कू-कू करकै वा माँ जगाई
पूछा तन्नै, कन्या क्यों बगाई
चॉल, मेरी गैल, उसनै लै कै आ
भूखी सै वा, उसनै अपणा दूध पिला
माँ सणते ही रोण लागगी
आपने दुखड़े धोण लागगी
बोली, कोन्या लाऊँ अपणै कॉलजे के टुकड़े नै
क्यूँ कर खोल बताऊँ अपने दिल के दुखड़ै नै
मेरे धोरै पहल्याँ ही चार छोरी सैं
दो नै बुखार सै, अर दो चटाई पै सो री सैं
मेरी सासू मारै सै तान्यां की मार
मन्नै पीटण आया मेरा भरतार
बोल्या, फेर छोरी ले आई
क्यूं कर ज़ांगी ये सारी ब्याही
वंश की तन्नै काट दी बेल
जा खत्म कर दे इसका खेल
माँ सूँ, पर थी मेरी लाचारी
ज्यातैं फैंक आई, छोरी प्यारी
कुत्ते का गॅला भरग्या
पर ब्यान वो पूरे करग्या
बोल्या, मैं फेर उल्टा आग्या
दिमाग पै मेरे धूम्मां छाग्या
वा छोरी गुट्ठा चूमण लाग री
हाँसी न्यू जाणे मेरी बाट में जाग री
कॉलजै पै धर लिया मन्नै पात्थर
थर-थर काँपयां मेरा ज़ॉथर
बोल्या, ऐ बोअली, जी कै, के करैगी
दूध नही, जहर सै, पी कै, के करैगी
हाम कुत्तां नै करे सै बदनाम
म्हारै तैं घिणौने करैं सैं काम
कदे ज़िन्दी अरक दे पेट मैं मरवावै सैं
अर आपणै आप नैं इन्सान बतावै सैं
मेरे गात मैं भय करगी उसकी मुस्कान
मन्नै इतणा तो लिया था ज़ॉण
जो समाज इसतैं नफरत करै सै
कन्या हत्या-सी गन्दी हरकत करै सै
उड़े तैं इसका जाणा आच्छा
इसका तो मर जाणा आच्छा
थाम लटकाओ मन्नै फांसी, चाहे मारो जूत्ते
पर टोह कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते
पर टोह कै ल्याओ पहल्याँ वे इन्सानी कुत्ते
 
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