ढके ढकाए ढोल धरे सैं तै, धरे राहण दे रै ...
bohot badhiyaaa jeetu bhai.......... aur likhey nai mere yaar
Le bhai ....
धरे राहण दे रै ...
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....
रै बिना ढके ढकाए ढोल धरे सैं तै, धरे राहण दे रै ...
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....रै ...
बीतैगी लिखी हुई भागां की हंसणी .... कित चाल रऴे कागां की .....
बीतैगी लिखी हुई भागां की हंसणी .... कित चाल रऴे कागां की .....
इन बागां की घरमोऴ हरे सैं तै, हरै राहण दे रै .. क़्यों फऴ पाते झाड सै ...
रै बिना ढके ढकाए ढोल धरे सैं तै, धरे राहण दे रै ...
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....रै ...
भेद समझै नै मेरी बात का ...मैं माणस सूं तेरी जात का ...
भेद समझै नै मेरी बात का ...मैं माणस सूं तेरी जात का ...
इसमें, मेरी जात-पात का तोल मरै सै तै .... मरे राहण दे रे ...
क्यों मेरी जात बिगाडै सै ....
रै बिना ढके ढकाए ढोल धरे सैं तै, धरे राहण दे रै ...
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....रै ...
नीच पाग्यां तै घणी डरैगी .... कितै कुए मैं डूब मरैगी ...
नीच पाग्यां तै घणी डरैगी .... कितै कुए मैं डूब मरैगी ...
फेर मेरे हंसकै करेगी मखोल ... मरे सैं तै मरे राहण दे रै ...
क्यों दो मिले मन पाडै सै ... रै ...
रै बिना ढके ढकाए ढोल धरे सैं तै, धरे राहण दे रै ...
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....रै ...
लखमीचंद सहम जी रहया सूं मैं प्याला रजगम का पी रहया सूं ....
लखमीचंद सहम जी रहया सूं मैं प्याला रजगम का पी रहया सूं ....
ऊं तै हीरा सूं अनमोल ... खरे सैं तै, खरे राहण दे रै ....
क्यों सिलबट्यां तै हाड सै ...
रै बिना ढके ढकाए ढोल धरे सैं तै, धरे राहण दे रै ...
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....
क्यों पाछले पाप उघाडै सै ....रै ...