Messenger of GOD

dahiyavijay7

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Look, how controversial person Sant Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan has tried to portray himself as a GOD through this movie MSG. Wearing T-Shirts and fashionable cloths. The controverisal person is accused of rape murder etc. The govt including the judiciary never dare to even get his den searched. It is not the blind faith of some people. Plz comment.
 
Look, how controversial person Sant Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan has tried to portray himself as a GOD through this movie MSG. Wearing T-Shirts and fashionable cloths. The controverisal person is accused of rape murder etc. The govt including the judiciary never dare to even get his den searched. It is not the blind faith of some people. Plz comment.
Irrespective of the govt. these fraudsters flourish. Main reason is business lobby's backing (Black ko white karna). Aise logo ke chakar me gareeb fas ja se and those who protest are being killed.
 
प्रियंका गांधी की पूर्व डाँस टीचर लीला सैम्प्सन ने pk फिल्म के समय रिजाइन नहीं दिया। मुल्ला महेश भट्ट की फ़िल्मों के चुम्बनों पर भी नहीं दिया। msg में ऐसा क्या देख लिया जो रिजाइन देना पड़ा।
 
Tv पर जितने भी नग्न, असभ्य, अश्लील विज्ञापन जो परिवार के साथ बैठ कर नहीं देखे जा सकते ऐसे विज्ञापन लीला सैमसन की मेहरबानी से ही आते थे।
 
प्रियंका गांधी की पूर्व डाँस टीचर लीला सैम्प्सन ने pk फिल्म के समय रिजाइन नहीं दिया। मुल्ला महेश भट्ट की फ़िल्मों के चुम्बनों पर भी नहीं दिया। msg में ऐसा क्या देख लिया जो रिजाइन देना पड़ा।

Sir, it is not a question of Leela Sampson. Of Course there may be nudity in other on air contents. However, the MSG is merely an advertisement to promote gurmeet ram rahim singh insan as demigod. The real point is whether a person having doubtful integrity having multiple and very serious criminal charges which raises a finger of doubt about his moral character should be allowed to be portrayed as GOD. Further, if often speak against the corrupt politicians but never speak against these demigods who are into illegal and illicit businees of befooling the poor people. Further neither government not judiciary dare to take any action against these people. Common people may not speak against them because any voice raised against them shall be muted by the criminal goons.
 
This fact is not denied that baba ram rahim is not a saint. Real saints never show off, they do their work (updesh & all religious deeds) without much fuss.

Due to these types of fake babas people are loosing faith in even real saints.

such babas should b behind bars.....
 
Kamal hai, kaise kaise log desh ke upar raaj karte hain. in dhongis ko to buss.. kya karein yaar, time lagega in chizo ko shudharne mei. hadd hai buss patience ki...
 
Sir, it is not a question of Leela Sampson. Of Course there may be nudity in other on air contents. However, the MSG is merely an advertisement to promote gurmeet ram rahim singh insan as demigod. The real point is whether a person having doubtful integrity having multiple and very serious criminal charges which raises a finger of doubt about his moral character should be allowed to be portrayed as GOD. Further, if often speak against the corrupt politicians but never speak against these demigods who are into illegal and illicit businees of befooling the poor people. Further neither government not judiciary dare to take any action against these people. Common people may not speak against them because any voice raised against them shall be muted by the criminal goons.
Sir don't waste your time on the other Sir you quoted. The other sir seems to have an agenda to run on this site. The other sir seems to have an affiliation with BJP or RSS in way or the other. His every post would reflect that point. Other Sir must be working for RSS type organisation to help BJP.
 
I have read somewhere this Baba Ram Rahim is a Jat (sardar). What a irony, on mostly occasions sardars are against him. I guess they are afraid of him lest he doesn't become 11th guru of Sikhs.
 
Look, how controversial person Sant Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan has tried to portray himself as a GOD through this movie MSG. Wearing T-Shirts and fashionable cloths. The controverisal person is accused of rape murder etc. The govt including the judiciary never dare to even get his den searched. It is not the blind faith of some people. Plz comment.

I am thinking from where he got the money to present himself like this, is it the funds his dera raised ??
 
Irrespective of the govt. these fraudsters flourish. Main reason is business lobby's backing (Black ko white karna). Aise logo ke chakar me gareeb fas ja se and those who protest are being killed.

It's just because of Politics. BJP takes his support. Time by time politics party asks supporter from these kind of person.
 
कोई कहता है यह बाबा व्यभिचारी है, नशाखोर है, कामुक है, अत्याचारी है और ऐसे ही पता नहीं क्या क्या| यह फिल्म कैसे बना सकता है, डेमिगोड (Demigod) कैसे कहला सकता है| मैं कहता हूँ जरा नीचे की बातों पे भी एक नजर डाल लो, हो सकता है थोड़ा मशाला और मिल जाए इस संदर्भ में|

व्यभिचार, स्त्री को वस्तु समझना, खूनी रिश्तों में ब्याह होने के प्रमाण, मादक द्रव्यों व नशों का प्रयोग, व्यसन, जुआ, जादू-टोना, अनैतिकताएं, अन्धविश्वास और मूर्खतापूर्ण रूढ़ियाँ हमारे धर्म में आदिकाल से व्याप्त हैं| निसंदेह इनको जाते-जाते वक्त तो लगेगा| अब आप लोग जाग रहे हैं तो जरूर इन चीजों में कमी तो आएगी, परन्तु पूर्ण-रूप से लगाम लगानी है तो पहले बड़ी मछलियों को चरित्र सुधार और साहित्य सुधार के लिए बोलना शुरू करना होगा| जैसे कि
(परन्तु मुझे यह लिखते हुए डर यह हो रहा है कि कहीं कोई अपनी थीसिस रुपी जांच पिटारी ना खोल के बैठ जाए, जैसा कि अक्सर मेरी हर दूसरी पोस्ट पर होता है; ऐसे भाइयों को कहता चलूँगा कि आप इन लोगों से संबंधित इतिहास विस्तार में पढ़ें तो पता लग जायेगा| कोई नी लेख के अंत में इनके रिफरेन्स भी डाल रहा हूँ|)

अ) वसिष्ठ ने अपनी पुत्री शतरूपा से विवाह रचाया,
ब) मनु ने अपनी पुत्री इला से विवाह किया,
स) जहानु ने अपनी बेटी जहान्वी से शादी की,
द) सूर्य ने अपनी बेटी उषा से ब्याह किया,
य) धहप्रचेतनी और उस के पुत्र सोम दोनों ने सोम की बेटी मारिषा से संभोग किया,
र) दक्ष ने अपनी बेटी अपने ही पिता ब्रह्मा को विवाह में दी और इन वैवाहिक-संबंधों से नारद का जन्म हुआ,
ल) दोहित्र ने अपनी २७ पुत्रियों को अपने ही पिता सोम को संतान-उत्पत्ति के लिए सौंपा|

2) वामदेव-विरत नामक धार्मिक-क्रिया होती थी जो यज्ञ-भूमि पर ही की जाती थी. यदि कोई स्त्री पुरोहित के सामने सम्भोग करने की इच्छा प्रकट करती थी तो वह उसके साथ वहीँ सब के सामने मैथुन करता था. उदाहरांत: पराशर ने सत्यवती और धिर्घत्मा के साथ (यज्ञ-स्थल ही पर) सम्भोग किया|ʺ

3) योनि नामक एक और धर्म प्रथा प्रचलित थी| योनि शब्द का जैसा अर्थ अब लगाया जाता है वैसा शुरू में नहीं था शब्द योनि का मूलत: अर्थ है - घर| अयोनी का अर्थ है ऐसा गर्भ जो घर के बाहर ठहराया गया हो| अयोनी-प्रथा में कोई बुराई नहीं मानी जाती थी| सीता और द्रोपदी दोनों का जन्म अयोनि (यानी घर से बाहर) हुआ था|ʺ

4) प्राचीन काल में धर्म के नाम पर औरत को भाड़े (किराये) पर दिया जाता था, जो कि दक्षिणी भारत में कहीं कहीं तो देवदासी-येलम्मा जैसी प्रथाओं के रूप में आज भी जारी है|

माधवी की कहानी इस का एक स्पष्ट प्रमाण है| राजा ययाति ने अपनी बेटी माधवी को अपने गुरु गालव को भेंट में दे दिया| गालव ने माधवी को तीन राजाओं को भाड़े पर दिया| इस के पश्चात गालव ने माधवी का विवाह विश्वामित्र से कर दिया वह विश्वामित्र के पास उस समय तक रही जब तक उस ने एक पुत्र को जन्म नहीं दिया, यह सब कुछ होने के बाद गालव ने माधवी को वापिस लेकर उसे उसके पितामह को लौटा दिया|ʺ

5) शब्द कन्या का अर्थ भी वह अर्थ नहीं जो अब लगाया जाता है| प्राचीन काल में कन्या का अर्थ था वह लड़की जो किसी भी पुरुष के साथ सम्भोग करने में स्वतन्त्र है| कुंती और मत्स्यगंधा के उदाहरण से यह स्पष्ट है| कुंती का पांडू के साथ विवाह होने से पूर्व उसके बच्चा पैदा हुए| मत्स्यगंधा ने भीष्म के पिता शांतनु के साथ विवाह करने से पूर्व मुनि पराशर से सम्भोग किया और वेद व्यास पैदा हुआ|

6) प्राचीनकाल में बढ़िया संतान पैदा करवाने के नाम पर अपनी औरतों को देव नामक वर्ग को सौंपा जाता था (ध्यान दीजिये कृत्या किसी भी प्रकार से हरम वालों से कम नहीं)। सप्तपदी की प्रथा का भी इसी रीति से आरम्भ हुआ| विवाह मंडप में जो वधू पवित्र अग्नि के इर्दगिर्द सात चक्कर काट देती थी, उसे देव से मुक्त करार दे दिया जाता था और ऐसा होने पर वर उसे ले जा सकता था|

7) देवी-देवता धर्म में पशुओं से भी सम्भोग करते थे| दाम ने हिरनी से और सूर्य ने घोड़ी से सम्भोग किया| अश्वमेध यज्ञ में औरत का मृत घोड़े से सम्भोग कराया जाता था|

रेफरेन्सेस:
1) ʺदेखें, महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रकाशित, डॉ.बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज़ खंड ३ के पृष्ठ १५३-१५७
2) स्वामी दयानंद ने, यजुर्वेद भाष्य (पृष्ठ ७८८) में लिखा है: अश्विम्याँ छागेन सरस्वत्यै मेशेगेन्द्रय ऋषमें (यजुर्वेद २१/६०) अर्थात: प्राण और अपान के लिए दु:ख विनाश करने वाले छेरी आदि पशु से, वाणी के लिए मेढ़ा से, परम ऐश्वर्य के लिए बैल से-भोग करें.
3) हिदुइजम धर्म या कलंक, राइटिंग्स एंड स्पीचेज़ खंड ३ के पृष्ठ १५३-१५७, यजुर्वेद भाष्य (पृष्ठ ७८८)

तो दोस्तों "गरीब की बहु सबकी भाभी" वाला काम मत करो, राम-रहीम से तो बहुत बड़ी-बड़ी मछलियाँ तैर रही हैं यहां, अगर वाकई में चाहते हो कि इन चीजों पर बैन लगे तो पहले इन पुस्तकों के मॉडिफिकेशन या जलवाने के लिए आवाज उठाओ, जहां से हर ऐसे बाबा-संत को अपने तरीके का परन्तु उसी एक लाइन का व्यभिचार फैलाने का कारण और हौंसला मिलता है|

यह लोग इन्हीं चीजों से हौंसला पाते हैं, कि जब आजतक पब्लिक इनका ही कुछ नहीं बिगाड़ पाई तो हमारा क्या कर लेगी| तो क्यों पड़े हो इस बाबे के पीछे, नाच-कूद लेने दो इसको भी| यह नहीं होगा तो कोई और नाचेगा इसकी जगह पर और यह लोग तब तक नाचते ही रहेंगे जब तक इन ऊपर बताई मूलों पर चर्चा नहीं करोगे, इनको मॉडिफाई करवाने को अभियान नहीं चलाओगे| या इनको फाड़ के फेंकने का हौंसला नहीं बनाओगे अपने अंदर|
 
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[h=3]Film: MSG—The Messenger[/h]
  • Director: Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan, Jeetu Arora
  • Cast: Gurmeet Ram Rahim Ji Insan, Daniel Kaleb, Flora Saini, Gaurav Gera, Jayshree Soni, Himanshu Tiwari, Jay Singh Rajpoot
Johnson Thomas
This one’s a monumental ego trip—the size of which has never been ‘scene’ before. GRRSJI sets out on a gigantic self-promotion exercise through cinema, wherein he acts, writes, scripts, directs, composes songs, cinematographs, produces and does everything else under the celluloid banner possible.

He is a superstar in the film—the love charger, ghost-rider, superhero, vigilante, bomber, painter, healer, self-styled cult-evangelist and everything else imaginable. He also incorporates every possible clichéd Bollywood idiom into this exaggerated extravagance intended mainly to gather his followers together and provide them with something to crow about.

Unbelievably elongated into a 197 minute-long show of an all-in-one packaged cure all for abuses of all forms, terrorism, female foeticide, corruption, AIDS etc, this film takes the cake and eats it too.

There’s really no such thing as a story here. The plot is pitiable woebegone, the dialogues are quite ridiculous, stunts are unimaginable, editing is sloppy, costumes are hideous, music is cantankerous and the acting is terribly pedestrian. A diaphanous crusade against social ills, this prettifying of a cult doesn’t ring true at all. This is by far the most strenuous experience in a cinema, since a long time.

http://www.tribuneindia.com/news/movie-reviews/story/41696.html
 
कोई कहता है यह बाबा व्यभिचारी है, नशाखोर है, कामुक है, अत्याचारी है और ऐसे ही पता नहीं क्या क्या| यह फिल्म कैसे बना सकता है, डेमिगोड (Demigod) कैसे कहला सकता है| मैं कहता हूँ जरा नीचे की बातों पे भी एक नजर डाल लो, हो सकता है थोड़ा मशाला और मिल जाए इस संदर्भ में|

व्यभिचार, स्त्री को वस्तु समझना, खूनी रिश्तों में ब्याह होने के प्रमाण, मादक द्रव्यों व नशों का प्रयोग, व्यसन, जुआ, जादू-टोना, अनैतिकताएं, अन्धविश्वास और मूर्खतापूर्ण रूढ़ियाँ हमारे धर्म में आदिकाल से व्याप्त हैं| निसंदेह इनको जाते-जाते वक्त तो लगेगा| अब आप लोग जाग रहे हैं तो जरूर इन चीजों में कमी तो आएगी, परन्तु पूर्ण-रूप से लगाम लगानी है तो पहले बड़ी मछलियों को चरित्र सुधार और साहित्य सुधार के लिए बोलना शुरू करना होगा| जैसे कि
(परन्तु मुझे यह लिखते हुए डर यह हो रहा है कि कहीं कोई अपनी थीसिस रुपी जांच पिटारी ना खोल के बैठ जाए, जैसा कि अक्सर मेरी हर दूसरी पोस्ट पर होता है; ऐसे भाइयों को कहता चलूँगा कि आप इन लोगों से संबंधित इतिहास विस्तार में पढ़ें तो पता लग जायेगा| कोई नी लेख के अंत में इनके रिफरेन्स भी डाल रहा हूँ|)

अ) वसिष्ठ ने अपनी पुत्री शतरूपा से विवाह रचाया,
ब) मनु ने अपनी पुत्री इला से विवाह किया,
स) जहानु ने अपनी बेटी जहान्वी से शादी की,
द) सूर्य ने अपनी बेटी उषा से ब्याह किया,
य) धहप्रचेतनी और उस के पुत्र सोम दोनों ने सोम की बेटी मारिषा से संभोग किया,
र) दक्ष ने अपनी बेटी अपने ही पिता ब्रह्मा को विवाह में दी और इन वैवाहिक-संबंधों से नारद का जन्म हुआ,
ल) दोहित्र ने अपनी २७ पुत्रियों को अपने ही पिता सोम को संतान-उत्पत्ति के लिए सौंपा|

2) वामदेव-विरत नामक धार्मिक-क्रिया होती थी जो यज्ञ-भूमि पर ही की जाती थी. यदि कोई स्त्री पुरोहित के सामने सम्भोग करने की इच्छा प्रकट करती थी तो वह उसके साथ वहीँ सब के सामने मैथुन करता था. उदाहरांत: पराशर ने सत्यवती और धिर्घत्मा के साथ (यज्ञ-स्थल ही पर) सम्भोग किया|ʺ

3) योनि नामक एक और धर्म प्रथा प्रचलित थी| योनि शब्द का जैसा अर्थ अब लगाया जाता है वैसा शुरू में नहीं था शब्द योनि का मूलत: अर्थ है - घर| अयोनी का अर्थ है ऐसा गर्भ जो घर के बाहर ठहराया गया हो| अयोनी-प्रथा में कोई बुराई नहीं मानी जाती थी| सीता और द्रोपदी दोनों का जन्म अयोनि (यानी घर से बाहर) हुआ था|ʺ

4) प्राचीन काल में धर्म के नाम पर औरत को भाड़े (किराये) पर दिया जाता था, जो कि दक्षिणी भारत में कहीं कहीं तो देवदासी-येलम्मा जैसी प्रथाओं के रूप में आज भी जारी है|

माधवी की कहानी इस का एक स्पष्ट प्रमाण है| राजा ययाति ने अपनी बेटी माधवी को अपने गुरु गालव को भेंट में दे दिया| गालव ने माधवी को तीन राजाओं को भाड़े पर दिया| इस के पश्चात गालव ने माधवी का विवाह विश्वामित्र से कर दिया वह विश्वामित्र के पास उस समय तक रही जब तक उस ने एक पुत्र को जन्म नहीं दिया, यह सब कुछ होने के बाद गालव ने माधवी को वापिस लेकर उसे उसके पितामह को लौटा दिया|ʺ

5) शब्द कन्या का अर्थ भी वह अर्थ नहीं जो अब लगाया जाता है| प्राचीन काल में कन्या का अर्थ था वह लड़की जो किसी भी पुरुष के साथ सम्भोग करने में स्वतन्त्र है| कुंती और मत्स्यगंधा के उदाहरण से यह स्पष्ट है| कुंती का पांडू के साथ विवाह होने से पूर्व उसके बच्चा पैदा हुए| मत्स्यगंधा ने भीष्म के पिता शांतनु के साथ विवाह करने से पूर्व मुनि पराशर से सम्भोग किया और वेद व्यास पैदा हुआ|

6) प्राचीनकाल में बढ़िया संतान पैदा करवाने के नाम पर अपनी औरतों को देव नामक वर्ग को सौंपा जाता था (ध्यान दीजिये कृत्या किसी भी प्रकार से हरम वालों से कम नहीं)। सप्तपदी की प्रथा का भी इसी रीति से आरम्भ हुआ| विवाह मंडप में जो वधू पवित्र अग्नि के इर्दगिर्द सात चक्कर काट देती थी, उसे देव से मुक्त करार दे दिया जाता था और ऐसा होने पर वर उसे ले जा सकता था|

7) देवी-देवता धर्म में पशुओं से भी सम्भोग करते थे| दाम ने हिरनी से और सूर्य ने घोड़ी से सम्भोग किया| अश्वमेध यज्ञ में औरत का मृत घोड़े से सम्भोग कराया जाता था|

रेफरेन्सेस:
1) ʺदेखें, महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रकाशित, डॉ.बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज़ खंड ३ के पृष्ठ १५३-१५७
2) स्वामी दयानंद ने, यजुर्वेद भाष्य (पृष्ठ ७८८) में लिखा है: अश्विम्याँ छागेन सरस्वत्यै मेशेगेन्द्रय ऋषमें (यजुर्वेद २१/६०) अर्थात: प्राण और अपान के लिए दु:ख विनाश करने वाले छेरी आदि पशु से, वाणी के लिए मेढ़ा से, परम ऐश्वर्य के लिए बैल से-भोग करें.
3) हिदुइजम धर्म या कलंक, राइटिंग्स एंड स्पीचेज़ खंड ३ के पृष्ठ १५३-१५७, यजुर्वेद भाष्य (पृष्ठ ७८८)

तो दोस्तों "गरीब की बहु सबकी भाभी" वाला काम मत करो, राम-रहीम से तो बहुत बड़ी-बड़ी मछलियाँ तैर रही हैं यहां, अगर वाकई में चाहते हो कि इन चीजों पर बैन लगे तो पहले इन पुस्तकों के मॉडिफिकेशन या जलवाने के लिए आवाज उठाओ, जहां से हर ऐसे बाबा-संत को अपने तरीके का परन्तु उसी एक लाइन का व्यभिचार फैलाने का कारण और हौंसला मिलता है|

यह लोग इन्हीं चीजों से हौंसला पाते हैं, कि जब आजतक पब्लिक इनका ही कुछ नहीं बिगाड़ पाई तो हमारा क्या कर लेगी| तो क्यों पड़े हो इस बाबे के पीछे, नाच-कूद लेने दो इसको भी| यह नहीं होगा तो कोई और नाचेगा इसकी जगह पर और यह लोग तब तक नाचते ही रहेंगे जब तक इन ऊपर बताई मूलों पर चर्चा नहीं करोगे, इनको मॉडिफाई करवाने को अभियान नहीं चलाओगे| या इनको फाड़ के फेंकने का हौंसला नहीं बनाओगे अपने अंदर|


Khatarnaak aur sansanikhej!....;)

Phool kumar ji, kuch log aapse bahut naaraz ho jaayenge ab!...yeh aapne theek nahi kiya...dharmik bhaavnaao ko thesh pahuchayi hai aapne
 
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