Bhai Saheb jaisa maine pahle bhi kaha tha kewal Mrs. Sheela his hanin, Lt Gov. Khanna aur PM and Home Ministry bhi shamil hai.. delhiye aaaj ka parer clip ::::
आयोजन समिति सीईओ भी घेरे में
ठ्ठ नीलू रंजन, नई दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हो रही आर्थिक अनियमितताओं पर लगाम कसने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा आयोजन समिति में भेजे गए जरनैल सिंह खुद ही सीबीआइ जांच में घिर गए हैं। एक निजी कंपनी को खेलों के मर्केडाइज (लोगो वाले सिलेसिलाए वस्त्र व खिलौने) बनाने व बेचने का लाइसेंस देने के मामले में समिति के सीईओ जरनैल सिंह की भूमिका संदेह के घेरे में है। जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने दावा किया कि इस घोटाले में सिंह के खिलाफ काफी सबूत मिल चुके हैं। सीबीआइ ने इसी माह आयोजन समिति के छह अफसरों और दो निजी कंपनियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। एफआइआर में वीके वर्मा, सुरजीत लाल, जयचंद्रन, राम मोहन, संगीता वेलिंगकर और केयूके रेड्डी का नाम शामिल था। इस सिलसिले में जांच एजेंसी ने दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ व पंचकूला समेत 10 स्थानों छापा मार अहम दस्तावेज बरामद किये थे। इनकी पड़ताल के बाद अब जांच की सुई जरनैल सिंह की तरफ घूम गई है, अधिकारी सिंह से पूछताछ की तैयारी में जुटे हैं। उल्लेखनीय है कि जरनैल सिंह को नवंबर 2009 में उस समय आयोजन समिति का सीइओ बनाया था, जब राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं में देरी और टीम कलमाड़ी पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण खेलों के आयोजन पर ही सवालिया निशान लगने लगे था। उम्मीद थी कि जरनैल सिंह के आने से काम में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, लेकिन सिंह ने आयोजन समिति के दूसरे अफसरों के साथ मिलकर एक निजी कंपनी को मर्केडाइज का लाइसेंस देने में मदद की, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगी। सीबीआइ के अनुसार, प्रीमियर ब्रांड नाम की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए पहले तो मर्केडाइज के ठेके की प्रक्रिया को बीच में ही निरस्त कर दी गयी, बाद में इसी कंपनी को ठेका दे दिया गया। ठेके के एवज में कंपनी को 5.20 करोड़ रुपये आयोजन समिति में जमा कराने थे। कंपनी ने 3.52 करोड़ के दो चेक जमा कराए, जो बाउंस हो गए। आयोजन समिति के खाते में तो कुछ नहीं आया, लेकिन कंपनी ने खेल के लोगों,कपड़े और खिलौने बेचकर करोड़ों कमा लिए।