Nashe ke khilaaf ek jang

parvyug

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Agar ek achchhe samaaj ka nirmaan karna hai to bidi,cigeerett aur sharaab ke khilaaf ek jang ek aandolan chedna hoga. samajh aur samvedna yahin kahti hai. pahli jang apne se hi shuru honi chahiye. jo hum hi nahin badle to humare bachche bhi vahin karenge. nasha ek burai hai aur humain isse chhutkara pana hi hoga.
 
Agar ek achchhe samaaj ka nirmaan karna hai to bidi,cigeerett aur sharaab ke khilaaf ek jang ek aandolan chedna hoga. samajh aur samvedna yahin kahti hai. pahli jang apne se hi shuru honi chahiye. jo hum hi nahin badle to humare bachche bhi vahin karenge. nasha ek burai hai aur humain isse chhutkara pana hi hoga.

परवीण कुमार भाई जी , नशे तें छुटकारा पावण तें पहलम नशा शुरू करणा पडेगा ना | इस्सा काम क्यों करणा | पहलम शुरू करो एर फेर छोडो |
 
परवीण कुमार भाई जी , नशे तें छुटकारा पावण तें पहलम नशा शुरू करणा पडेगा ना | इस्सा काम क्यों करणा | पहलम शुरू करो एर फेर छोडो |

सही कहा रविंदर भाई ... वैसे प्रवीण भाई ने नशा मुक्त समाज के लिए पहल तो बड़ी तगड़ी छेडी है. इस्सा लागे इन्होने नए दिन से सब छोड़ने की ठान ली है.
 
सही कहा रविंदर भाई ... वैसे प्रवीण भाई ने नशा मुक्त समाज के लिए पहल तो बड़ी तगड़ी छेडी है. इस्सा लागे इन्होने नए दिन से सब छोड़ने की ठान ली है.

Bhai shivam and bhai ravinder kya nashe sesirf nasha karne vaale ko hi nuksaan hota hai?
 
[Agar ek achchhe samaaj ka nirmaan karna hai to bidi,cigeerett aur sharaab ke khilaaf ek jang ek aandolan chedna hoga. samajh aur samvedna yahin kahti hai. pahli jang apne se hi shuru honi chahiye. jo hum hi nahin badle to humare bachche bhi vahin karenge. nasha ek burai hai aur humain isse chhutkara pana hi hoga.
 
Agar ek achchhe samaaj ka nirmaan karna hai to bidi,cigeerett aur sharaab ke khilaaf ek jang ek aandolan chedna hoga. samajh aur samvedna yahin kahti hai. pahli jang apne se hi shuru honi chahiye. jo hum hi nahin badle to humare bachche bhi vahin karenge. nasha ek burai hai aur humain isse chhutkara pana hi hoga.

Main bhi hissedaar hun :-)
 
परवीण कुमार भाई जी , नशे तें छुटकारा पावण तें पहलम नशा शुरू करणा पडेगा ना | इस्सा काम क्यों करणा | पहलम शुरू करो एर फेर छोडो |

Aap kar sakte hain, bahaut saral tareeka hai......din mein 5 se 7 baar agar aap chai peete hain to usse kam kar dein, yaani keval do baar lein aur chahein to dheere-dheere iska sevan chhod dein. Luke-warm water or lemonade can also keep you energised.

Try this out!
:-)
 
.....lemonade can also keep you energised.

Advise: never drink lemonade empty stomach especially early morning as it is the time when stomach is carving for food and lemonade is acidic in nature which can kill your hunger desire and will surely result in loss of weight. Recovery for same will become costly to you then.

Regards!
 
आजकल नशा सिर्फ बीड़ी सिगरेट और शराब तक सिमित नहीं रह गया हैं, आजकल युवाओं में स्मैक, हेरोइन के साथ साथ अन्य ड्रग्स लेने का चलन बढ़ रहा हैं।
इन सबसे भी अलग आजकल मोबाइल का जादू छोटे छोटे बच्चों में सर चढ़ कर बोल रहा हैं, यह एक खतरनाक नशा हैं।
आजकल छोटे बच्चे को रोने से चुप करने के लिए भी अभिभावक भी बच्चे को मोबाइल थमा देते हैं। छोटे बच्चों के अलावा युवा वर्ग में में भी इस नशे का चलन खतरनाक रूप से बढ़ा हैं इसमें हेल्थ के साथ साथ सामाजिक नुकसान भी हो रहा हैं। ट्रैन , बस, एयरपोर्ट जहाँ कहीं भी युवाओं के साथ साथ बड़े अधेड़ उम्र के लोग भी मोबाइल जैसी चीजों में खोये रहते हैं। कहीं दुर्घटना घटित हो जाये तो लोग पीड़ित की सहायता के बजाय मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त हो जाते हैं।
इसके त्वरित समाधान की जरूरत हैं।
 
[FONT=&quot][h=1]मोबाइल की महामारी- Dr. Ashok Choudhary[/h]क्या कारण है कि आज लोग पागलों की तरह मोबाइल लेकर घूम रहे हैं? जहाँ देखो, हाथ में मोबाइल थामे मर्द और औरतें खड़े हैं, बातें कर रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे जन्मों कि कोई प्यास थी जो अब बुझ रही है। वरन् इस बीमारी से कौन दो चार होना चाहेगा ? एक दशक के बाद वैज्ञानिक बताने लगे हैं कि दिन में 30 मिनट से ज्यादा बात करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। कई सालों बाद गुटखे के बारे में पता चला था तब तक नई और पुरानी पीढ़ी के मुंह चिपक चुके थे। तब चेतावनियों का दौर चला और लोगों को इसके संभावित नुकसानों के बारे में बताया गया , लेकिन अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत ! ऐसा ही मोबाइल के साथ होगा , जब चारों तरफ बहरे लोगों की भीड़ होगी, मस्तिष्क कैंसर के मरीज़ होंगे।
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[FONT=&quot]आखिर लोगों को क्रिकेट और गुटखे के बाद यह बीमारी कैसे लगी ?[/FONT]
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[FONT=&quot]1. पहला कारण मोबाइल को लग्जरी आइटम मान लेना है। कार, ए सी की तरह मोबाइल को भी भारत में लग्जरी मान लिया गया है। ग़रीब आदमी भी इस लग्जरी से रुबरु चार हो लिया है। उसे तो जैसे धनवान होने का अहसास सस्ते में ही हो गया है। मिडिल क्लास के लोगों को भी क्रिकेट और गुटखे के बाद एक नया जुनून हाथ लग गया है।[/FONT]
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[FONT=&quot]2. दूसरा कारण भारतीयों की बतियाने की आदत है। हम तो वैदिक काल से ही लिखने से ज्यादा बोलने के शौकीन रहे हैं। यह तो मुग़लों- अंग्रेजों ने लिखने कि अहमियत समझा दी, वरन् हमें तो लिखने से परहेज ही रहा था। आज भी वह आदत गई नहीं है। हम अब भी हस्ताक्षर से अधिक कुछ नहीं लिखते है। ज़ोर लगायें तो एस एम एस कर सकते है। पत्र या लेख लिखने की हिम्मत नहीं है। ऐसे में मोबाइल पर बातें करते रहते हैं। लेकिन बातें भी अधिकतर गैरजरूरी ! [/FONT]
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[FONT=&quot]3. ठाले बैठने में भी हम दुनिया में सबसे आगे हैं। कभी ताश खेलते रहते थे, तो कभी सड़क छाप राजनीति की बातें हमारा मनपसंद टाइमपास होता था। अब उनकी जगह मोबाइल ने ले ली है। अभी भी अधिकांश भारतीय मानसिक रूप से बेरोज़गार ही हैं, भले उन्हें कोई काम भी मिला हुआ हो। काम करने की ज़िम्मेदारी कम ही लोगों में पाई जाती है। इस स्थिति में मोबाइल रही सही कसर पूरी कर देता है। पुलिस का सिपाही, अस्पताल की नर्स, ऑफ़िस का बाबू, बस का ड्राइवर या फिर स्कूल का टीचर जब काम के दौरान बतियाते हैं तो कितने खतरनाक लगते हैं। और कोई टोकने वाला भी नहीं होता।[/FONT]
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[FONT=&quot]4. विज्ञापनों ने भी भारी काम किया है। क्रिकेट और गुटखे की तरह यह बीमारी हमारे जीवन में घुसा दी है। कम्पनियों ने भारत की गैर जिम्मेदार जनता की आदतों को भाँप लिया है और भारत के कोने कोने में मोबाइल, क्रिकेट और गुटखा पहुंचा दिया है। यह अलग बात कि वहां तक अभी पीने का पानी, बीमारी की दवा या अच्छी शिक्षा नहीं पहुँच सकी है। मॉरिशस के रास्ते आये काले धन ने गरीबों और अमीरों की जेब पर एक साथ हाथ मारने का कमाल दिखा दिया है।[/FONT]
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[FONT=&quot]5. बच्चों के लिए यह नया खिलौना बर्बादी की संभावनाएं लेकर आया है। बचपन में ही देश के बच्चे जवान हो रहे हैं। उनके लिए प्रमुख कारण खेल कूद के अवसर ख़त्म होना है।[/FONT]
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[FONT=&quot]उक्त कारणों से मोबाइल को एक आम भारतीय की अन्य मूल ज़रूरतों – रोटी, कपड़ा, रोज़गार, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य से भी ऊपर रख दिया है। उस पर हमारे बुद्धिजीवियों की निष्क्रियता ने या कहिये इस बीमारी में भागीदारी ने आग में घी का काम किया है।[/FONT]
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[FONT=&quot]तो क्या करें ? मोबाइल बंद कर दें ? नहीं जी. बंद नहीं करें , केवल गैरजरूरी बात न करें। आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा, पैसा बचेगा, देश का पैसा मॉरिशस के रास्ते कम बाहर जायेगा और देश में मोबाइल पर ध्यान कम होने से काम बढ़ेगा।[/FONT]
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[FONT=&quot]बच्चों पर भी रहम करें और उनके इस स्टेटस सिम्बल को आगे के लिये छोड़ दें। आपको अच्छा मां-बाप बनने के कई और भी रास्ते हैं। ऐसा न हो कि कुछ समय बाद बच्चों को किसी मोबाइल छुड़ाने वाले क्लिनिक में ले जाना पड़े और भगवान न करे सर में कोई गांठ तब तक बन जाये तो….. अभी भी वक्त है, रोकथाम ही इस महामारी का ख़रा और पक्का इलाज है।[/FONT]
 
Nasha Mukti Kendra in Jammu

Nasha Mukti Kendra in Jammu is one of the best Rehabilitation Centre in India. The centre is equipped with the latest diagnostic treatment and facilities. The Hospital caters to a variety of patients suffering from drug and alcohol addiction or intoxication.
 
Nasha Mukti Kendra in Jammu is one of the best Rehabilitation Centre in India. The centre is equipped with the latest diagnostic treatment and facilities. The Hospital caters to a variety of patients suffering from drug and alcohol addiction or intoxication.

Hahaha....sorry, I burst into laughter! Drug peddlers to achche-achche doctoron ko unki padhai yaad dilwa dete hain aur saath mein ek taang par bhi khada kar dete hain. I have served a week with the institution who has been awarded Noble Prize thrice, if I am not wrong. Unse acha kaun batayega.....hehe. Why Nasha Mukti Kendra, but not love for family or self?

It's all psyche, friends! I have practised counselling for that one week and it was helpful for those who had pshychic issues but not for those who become stringent to their lifeline and decisions wrongly. Then was required the special doctors for medical treatment. Aur uske Baad bhi ye pata chalta ki drug peddler tha kisi ek bed par, issliye baaki patients recovery nahi kar pa rahe. Bahaut checks rakhne padte hain.
 
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