एक बर की बात है अक नत्थू बस मैं चढ्या पर बैठण की किते जगहां नही मिली । कई देर तो खड्या रहया पर कती बेहाल हो लिया। अचानक देख्या अक एक सीट पै एक लुगाई डेढ़ -दो साल के टाब्बर नैं धोंरे आली सीट पै बिटाकै चैन तैं बैठी थी। नत्थू नै सोच्ची ईब उसनैं जगहां मिल ज्यैगी । वो उस धोंरे जाकै कड़क सी आवाज मैं बोल्या - इस एक बिलात के सौदे नैं गोड्डा मैं गेर ले नैं। इतणा था अर वा लुगाई ताव मैं आगी अर दनदनाती होई बोल्ली - तैं ओड़ बड्डा माणस अर तन्नैं तमीज नहीं है बात करण की भी। एक बिलात के सौदे का के मतलब? धोंरे बैठ्या सुरजा बोल्या - बेब्बे। इसनैं बोल्लण का लक्खण कोनीं, यो अरडू है, बैठ लेण दे अर या तेरी महरौली की लाट मन्नैं पकड़ा दे, मैं ले ल्यूंगा इसनैं अपणे गोड्यां मैं।