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hoodarajesh
Guest
भाइयो एक जाट की के दुर्गति हुई सुनो ..........
भाई एक जाट उठा मुह अंधेरे
हल जोड़ना था उस ने सवेरे सवेरे
जाट ने करना था धुमर्पान
होके पे गया उसका धयान
चिलम भर ली
होके पर धर ली
घुट मारी
देखा की आवाज नही आ रही
देखा नै रुक रही से सारी
बोल्या ओल्हे भाई
धरती में मारा हाथ
किस्मत ने दिया साथ
एक दिकद्दा
पागा दिकद्दा नै में दे दिया देखा भाग ही फूट्गा
दिकद्दा भीतर ही तुट्गा
जल्दी मैं काम करा गया
उठती हाना चिलम पे पैर धरा गया
बोल्या ओल्हे भाई
सारे काम ग़लत हो रहे थे बारी बारी
फेर हल जोड़न की कर ली तयारी
बैल ले के गाम तै बाहर आया तो लागा ठंडी हवा का झोका
एक कम्बल ले रहा था वो भी दे गया धोका
कम्बल की जगह अपनी लुगाई की घाघरी उठा लाया
जो ओड तै सिर में के लिकद्दगी
बोल्या ओल्हे भाई
हल जोड़न लागा
एक बैल तो जुए तले आगा
एक ना आया
बोल्या रे तने भी क्यो खाया
जब थोड़ा जा उजाला हुआ जब भेद बात का पाया
एक बैल की जगह एक गाय खोल लाया
बोल्या ओल्हे भाई
इब सुनो घर पे जाटनी का हाल
धुध निकालने बैल के निचे बठ गी
जब थन ना पाए तै दूर हट्गी
भाई एक जाट उठा मुह अंधेरे
हल जोड़ना था उस ने सवेरे सवेरे
जाट ने करना था धुमर्पान
होके पे गया उसका धयान
चिलम भर ली
होके पर धर ली
घुट मारी
देखा की आवाज नही आ रही
देखा नै रुक रही से सारी
बोल्या ओल्हे भाई
धरती में मारा हाथ
किस्मत ने दिया साथ
एक दिकद्दा
पागा दिकद्दा नै में दे दिया देखा भाग ही फूट्गा
दिकद्दा भीतर ही तुट्गा
जल्दी मैं काम करा गया
उठती हाना चिलम पे पैर धरा गया
बोल्या ओल्हे भाई
सारे काम ग़लत हो रहे थे बारी बारी
फेर हल जोड़न की कर ली तयारी
बैल ले के गाम तै बाहर आया तो लागा ठंडी हवा का झोका
एक कम्बल ले रहा था वो भी दे गया धोका
कम्बल की जगह अपनी लुगाई की घाघरी उठा लाया
जो ओड तै सिर में के लिकद्दगी
बोल्या ओल्हे भाई
हल जोड़न लागा
एक बैल तो जुए तले आगा
एक ना आया
बोल्या रे तने भी क्यो खाया
जब थोड़ा जा उजाला हुआ जब भेद बात का पाया
एक बैल की जगह एक गाय खोल लाया
बोल्या ओल्हे भाई
इब सुनो घर पे जाटनी का हाल
धुध निकालने बैल के निचे बठ गी
जब थन ना पाए तै दूर हट्गी