vikasgulia
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एक बै एक भोत उत् हाथी था , वो बड़ा ही बेवडे किस्म का जीव था,
दारू पीके अल्बाध करना उसका नेम था..
कई बे उसने चीटियाँ के बिल रोंध दिए थे, चीटियाँ भी बहुत प्रेशान हो ली थी...
एक दिन फेर दारू पीके..उनके बिलां पे सूंड में पानी भर के फेंक दिया ,
सारी चीटियाँ मिल के हाथानी धोरे गयी, एर बोली..
" आरी, अपने मर्द ने समझा ले, नहीं तोह मर्द म्हारे भी हैं..बेकार लट्ठ बाज ज्यांगे, आर पुलिस कचहरी हो ज्यगी " :d:d
दारू पीके अल्बाध करना उसका नेम था..
कई बे उसने चीटियाँ के बिल रोंध दिए थे, चीटियाँ भी बहुत प्रेशान हो ली थी...
एक दिन फेर दारू पीके..उनके बिलां पे सूंड में पानी भर के फेंक दिया ,
सारी चीटियाँ मिल के हाथानी धोरे गयी, एर बोली..
" आरी, अपने मर्द ने समझा ले, नहीं तोह मर्द म्हारे भी हैं..बेकार लट्ठ बाज ज्यांगे, आर पुलिस कचहरी हो ज्यगी " :d:d
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