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narendar

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सत्ता

बहुत दिनों से सोच रहा हूँ
हमारे देश की सत्ता किसके हाथ है
प्रजातंत्र, लोकतंत्र और गणतंत्र
के कुछ अक्षर कहते हैं
सत्ता जनता के हाथ में है

मुझे ऐसा प्रतीत नहीं होता
मैंने लोगों से पूछा तो पता चला
मुंबईकर बोला सत्ता डान के हाथ है
मलबा ढोता मजदूर बोला सत्ता
सत्ता तो बस ठेकेदार के पास है
नग्न घुमाई गई दलित युवती ने कहा
सत्ता गाँव के दबंगों के हाथ है
सड़क पर बैठे भिखारी ने कहा
सत्ता उसी भाई के पास है
जिसने बचपन में मेरे हाथ पैर काट
मुझे सड़क पर बैठाया था
मुझे भिखारी बनाया था

प्रधानमंत्री से पूछना बेकार था
क्योंकि मुझे अच्छी तरह मालूम था
कानूनी तौर पर सत्ता उन्ही के हाथ है
चाहे वह किसी एक के आदेश का पालन कर
अपने कार्यवाहकपन का निर्वाह कर रहे हैं
और सत्ता का आनंद ले रहे हैं

हम बेकार में द्रष्टिकोणीय सर्वे कर रहे हैं.
 
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