Radhaswami Baandar

upendersingh

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एक बा एक जंगल मा एक चूहा बीड़ी पीवण लाग रा था. जिब्बै झोला लटकाए एक बांदर आया अर बोल्या-'के रा यो के...बीड़ी पीवण जोगी औकात सै तेरी...लै सकरट पी...'
बांदर और आगै सी नै गया तो देख्या अक चीता सकरट पीवण लाग रा था...बांदर बोल्या-'चचा, सूखी सकरट पीवण मैं भी कुछ मजा सै के भला...लै ईह के माह यो सुलफा भर...'
फेर बांदर और आगै सी नै गया तो देख्या एक हाथी सुलफा पीवण लाग रा था...बांदर बोल्या-"गजराज, यो सुलफा भी कोई पीवण की चीज सै के भला...लै आज या कोकीन चैक कर...'
न्यू काह का ना बांदर आगै बढ़ गया...
चूहा सकरट के अर चीता सुलफे के कश लगामते जा रहे थे अर हाथी कोकीन का जी सा ले रह्या था...दूर सी नै के देख्या अक शेर उसी बांदर का झाम तारण लाग रह्या है...तीनों उड़ै भाज कै नै गए अर शेर तै काहण लाग गे-'क्यूं पीटो हो ईह नै...यो तो बहुत काम का सौद्दा है...'
शेर बोल्या-'काम का है?...यो सुसरा हामनै निमटावण की सोच रह्या सै...मैं अपणा देसी पव्वा मारण लाग रह्या था...मेरे धोरा आका ना बोल्या सरजी आज यो अंग्रेजी बोतल चैक करो...मैं अंग्रेजी पीवण लाग गया...पूरी बोतल मा मेरे एकले के पां ऊपर नै हो जांदे तो मैं एक पैग ईह नै देवण लाग गया...सासू का के कह है-'मैं ते राधास्वामी सूं, इसे सौदयां तै दूर ई रह्या करूं...'
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