samarkadian
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एक बे एक कुनबे में एक परंपरा थी अक वे सारे एक लांबी सी सोड़ में सोया करते ! उनका एक रुले था अक जब कोयसा पादा करता त वो कहा करता --- रेल आगी , रेल आगी !!
फेर सारे के सारे एक पाँ गल सोड़ ठा दिए करते बांस काड्न ताईं ! उनके छोटले छोरे का ब्याह होगा ! नई बहु ताईं घर का नियम समझा दिया गया !
वा बिचारी शरमाऊ सी थी !
वा शर्माती सहज सी बोली - रेल आगी! किसे ने सुनी कोन्या.
वा फेर बोली - रेल आगी ! किसे ने न सुनी !
वा माड़ी सी थाडू बोली - रेल आगी !
उसकी सासू बोली - अनपुती, इब बतावे से जब सारा कुनबा कट लिया स !
फेर सारे के सारे एक पाँ गल सोड़ ठा दिए करते बांस काड्न ताईं ! उनके छोटले छोरे का ब्याह होगा ! नई बहु ताईं घर का नियम समझा दिया गया !
वा बिचारी शरमाऊ सी थी !
वा शर्माती सहज सी बोली - रेल आगी! किसे ने सुनी कोन्या.
वा फेर बोली - रेल आगी ! किसे ने न सुनी !
वा माड़ी सी थाडू बोली - रेल आगी !
उसकी सासू बोली - अनपुती, इब बतावे से जब सारा कुनबा कट लिया स !