rakesh ar ravinadar

ravinderjeet

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एक बे राकेश खूंढ़े ने घणी पि ली | वो घर कानी चाल्या जा था | एक पाँ धरे फुटपाथ पे एर दुसरा धरे सड़क पे |आगे उहने रविंदर रूंढ़ा फेट ग्या |
रविंदर रूंढ़ा ------आर: राके तू नु क्यूँ चाले स ढीम्चक-ढीम्चक | एक पाँ उप्पर एक पाँ तले |
राकेश खूंढ़ा ----- ओ तेरी के , भाई में तो नु सोचूं था अक एक पाँ में जुता ना पहर रया |
 
बलहारा साहब या चाकरी सी मैने भी दुआ दो न ........ माँ की सुन फेर म भी इसी इसी चुटकले लिखा करूँगा ...............
 
बलहारा साहब या चाकरी सी मैने भी दुआ दो न ........ माँ की सुन फेर म भी इसी इसी चुटकले लिखा करूँगा ...............

में किथों दुवाऊं भाई , मेरे ताहि भी इन् ने बेरा ना क्यूकर दे राखी स | या गिरारी तो खोशनी पड़े स केरा ?
 
एक बे राकेश खूंढ़े ने घणी पि ली | वो घर कानी चाल्या जा था | एक पाँ धरे फुटपाथ पे एर दुसरा धरे सड़क पे |आगे उहने रविंदर रूंढ़ा फेट ग्या |
रविंदर रूंढ़ा ------आर: राके तू नु क्यूँ चाले स ढीम्चक-ढीम्चक | एक पाँ उप्पर एक पाँ तले |
राकेश खूंढ़ा ----- ओ तेरी के , भाई में तो नु सोचूं था अक एक पाँ में जुता ना पहर रया |

badhiya se Ravinder bhai ..
 
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एक बै राकेश अर रवीन्द्र नै घणी दारू पी राखी थी । रात नै साईकल पै बैठ कै कच्चे रास्ते तैं घरां जावैं थे । रवीन्द्र साईकल चलावै था अर राकेश पाछै (कैरियर पै) बैठ्या था ।

राकेश राह मैं ऐं लुढ़क ग्या । रवीन्द्र नै कोए ध्यान नहीं, मस्ती में झूमता घरां पहुंच्या अर बोल्या - ले भाई उतर, घर आ-ग्या ।

जब पाच्छे तैं कोए जवाब नहीं आया, तै रवीन्द्र का नशा कुछ ढीला हुया, साईकल ठा कै उल्टा भाज लिया । राह में देख्या - राकेश मस्ती में चूर राही में लोट रहया था । रवीन्द्र उसनै देख कै बोल्या - आंह रै, ठीक सै ?

राकेश नै जवाब दिया - "मैं ठीक बैठ्या सूँ, तू साईकल चलाता रह !"

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एक बै राकेश अर रवीन्द्र नै घणी दारू पी राखी थी । रात नै साईकल पै बैठ कै कच्चे रास्ते तैं घरां जावैं थे । रवीन्द्र साईकल चलावै था अर राकेश पाछै (कैरियर पै) बैठ्या था ।

राकेश राह मैं ऐं लुढ़क ग्या । रवीन्द्र नै कोए ध्यान नहीं, मस्ती में झूमता घरां पहुंच्या अर बोल्या - ले भाई उतर, घर आ-ग्या ।

जब पाच्छे तैं कोए जवाब नहीं आया, तै रवीन्द्र का नशा कुछ ढीला हुया, साईकल ठा कै उल्टा भाज लिया । राह में देख्या - राकेश मस्ती में चूर राही में लोट रहया था । रवीन्द्र उसनै देख कै बोल्या - आंह रै, ठीक सै ?

राकेश नै जवाब दिया - "मैं ठीक बैठ्या सूँ, तू साईकल चलाता रह !"

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देशवाल जी फंश गे आज तो | राके लाइए काटो की पुन्झअड़ |
 
देशवाल जी फंश गे आज तो | राके लाइए काटो की पुन्झअड़ |



पूंझड़ तै मैं खुद ए लगा दूंगा रवीन्द्र, पर ईब्बै इसकी जरूरत कोनी !


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@dndeswal "मैं ठीक बैठ्या सूँ, तू साईकल चलाता रह !"

Ha ha ha ha Deshwal ji badhiya sai!
 
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एक बै राकेश अर रवीन्द्र नै घणी दारू पी राखी थी । रात नै साईकल पै बैठ कै कच्चे रास्ते तैं घरां जावैं थे । रवीन्द्र साईकल चलावै था अर राकेश पाछै (कैरियर पै) बैठ्या था ।

राकेश राह मैं ऐं लुढ़क ग्या । रवीन्द्र नै कोए ध्यान नहीं, मस्ती में झूमता घरां पहुंच्या अर बोल्या - ले भाई उतर, घर आ-ग्या ।

जब पाच्छे तैं कोए जवाब नहीं आया, तै रवीन्द्र का नशा कुछ ढीला हुया, साईकल ठा कै उल्टा भाज लिया । राह में देख्या - राकेश मस्ती में चूर राही में लोट रहया था । रवीन्द्र उसनै देख कै बोल्या - आंह रै, ठीक सै ?

राकेश नै जवाब दिया - "मैं ठीक बैठ्या सूँ, तू साईकल चलाता रह !"

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Deswal ji bahut hi badhiya likha hai :)
 
ye rakesh aur ravinder bade punjhad lagav hai

राकेश आर रविंदर ना लांदे पुन्झअड़ | देशवाल एर राकेश लाया करें | ये दोनु इस साईट के ओफिसिअल सर्जन सें |
 
kisaye fek loo market main rakesh kite na kite te poonjhad toh le hai.............

भाई राके ने पाचली रामलील्ला म हनुमान की साडी पुन्झाड्डी उड़ा ली थी .....इब्ब काम आन लागरी स ........
 
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