ravinderjeet
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एक बे राकेश खूंढ़े ने घणी पि ली | वो घर कानी चाल्या जा था | एक पाँ धरे फुटपाथ पे एर दुसरा धरे सड़क पे |आगे उहने रविंदर रूंढ़ा फेट ग्या |
रविंदर रूंढ़ा ------आर: राके तू नु क्यूँ चाले स ढीम्चक-ढीम्चक | एक पाँ उप्पर एक पाँ तले |
राकेश खूंढ़ा ----- ओ तेरी के , भाई में तो नु सोचूं था अक एक पाँ में जुता ना पहर रया |
रविंदर रूंढ़ा ------आर: राके तू नु क्यूँ चाले स ढीम्चक-ढीम्चक | एक पाँ उप्पर एक पाँ तले |
राकेश खूंढ़ा ----- ओ तेरी के , भाई में तो नु सोचूं था अक एक पाँ में जुता ना पहर रया |