राकेश, समर का ब्याह तै हो-ग्या था पर उसकी सासू घणी कंजूस थी । वो जब भी ससुराल जाता तो उसकी सासू प्याज और चटनी रख देती और चटनी में घणी मिर्च होया करती ।
एक बै न्यूं होया अक समर जिस जगह खाना खाने बैठा था, उसकै धोरै एक खांड की बोरी भरी धरी थी ।
चटणी तैं उसका मुंह घणा कसूता जळ-ग्या । उसनै गोझ म्हां तैं अठन्नी काढ़ी अर खांड की बोरी कान्हीं हाथ करकै आपणी सासू तैं बोल्या - "सासू जी, अठन्नी की (खांड) मोल ए दे दे !"
.