Rakesh Pher Susrad Mein !

राकेश, समर का ब्याह तै हो-ग्या था पर उसकी सासू घणी कंजूस थी । वो जब भी ससुराल जाता तो उसकी सासू प्याज और चटनी रख देती और चटनी में घणी मिर्च होया करती ।

एक बै न्यूं होया अक समर जिस जगह खाना खाने बैठा था, उसकै धोरै एक खांड की बोरी भरी धरी थी ।

चटणी तैं उसका मुंह घणा कसूता जळ-ग्या । उसनै गोझ म्हां तैं अठन्नी काढ़ी अर खांड की बोरी कान्हीं हाथ करकै आपणी सासू तैं बोल्या - "सासू जी, अठन्नी की (खांड) मोल ए दे दे !"

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bahut hi upyukt tippani di h dayanad ji .....aapne..
 
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