ramfal er ramlu

ravinderjeet

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रामफल मास्टर --- आर: रामलू एक हफ्ते पहलम तेरे दादा ताहि भी शिकायत करी थी ,तेरे किम्मे फरक-ए ना पड्या,सुर्डा किते का | कम तें कम मुंह तो धो आया कर ,सकूल में आंदी हाण | तेरे मुंह पे तडके शीत पीण के निशाण इब्ब ताहि सें |
रामलू --- मास्टर जी तू ते कती गलत बात करे स | ये निशान तो मेरे परसूं के सें
 
रविंदर तन्ने देव दहिया तै ना फेट गे कित्ते .... ये २-२ लाइन की सी चुटक्ली सी वेए गेरया करते
 
रामफल मास्टर --- आर: रामलू एक हफ्ते पहलम तेरे दादा ताहि भी शिकायत करी थी ,तेरे किम्मे फरक-ए ना पड्या,सुर्डा किते का | कम तें कम मुंह तो धो आया कर ,सकूल में आंदी हाण | तेरे मुंह पे तडके शीत पीण के निशाण इब्ब ताहि सें |
रामलू --- मास्टर जी तू ते कती गलत बात करे स | ये निशान तो मेरे परसूं के सें

hahhahahhaaha ghana surdaa balak.......
 
रविंदर तन्ने देव दहिया तै ना फेट गे कित्ते .... ये २-२ लाइन की सी चुटक्ली सी वेए गेरया करते
जब हम आये यहाँ पर ,
वे रुखसत हो गए (देव दहिया)|
ये संयोग हे शायद ,
हम उनकी ही रो में बह गए | |


ख़ास था उनका ,
अंदाजे बयाँ |
उतना उप्पर उठ जाना ,
हमारे बस में कहाँ | |
हर दिल में बसी हे,
उनकी याद |
हर राह पर हैं,
उनके कदम चशपाँ | |
--------- रवि "अतृप्त "
 
जब हम आये यहाँ पर ,
वे रुखसत हो गए (देव दहिया)|
ये संयोग हे शायद ,
हम उनकी ही रो में बह गए | |


ख़ास था उनका ,
अंदाजे बयाँ |
उतना उप्पर उठ जाना ,
हमारे बस में कहाँ | |
हर दिल में बसी हे,
उनकी याद |
हर राह पर हैं,
उनके कदम चशपाँ | |
--------- रवि "अतृप्त "

wah ji wah ...atript ji..!!
gyan aa gya...!!
 
k gyan milya pannu bataiye ??????? mila k kuch hosla sa aage likhan ka?

Moderator hone ka ye matlab kona ki tum kisi ki tang kheech sako ho ... !!

ख़ास था उनका ,
अंदाजे बयाँ |
उतना उप्पर उठ जाना ,
हमारे बस में कहाँ | |
हर दिल में बसी हे,
उनकी याद |
हर राह पर हैं,
उनके कदम चशपाँ | |
--------- रवि "अतृप्त "
Ravindar bhai kavita bahut badhiya hai.
 
Moderator hone ka ye matlab kona ki tum kisi ki tang kheech sako ho ... !!


Ravindar bhai kavita bahut badhiya hai.

ar rahi baat Moderator ban k kuch b karan ki te wa te mane pahle e kah di thi k Main Moderator ban k kuch b kar saku hoon...........:p:p


Ravinder ki kavita badhiya hai jibe e mane like ka khatka dabaya tha ....
 
Last edited by a moderator:
Mods ka ujaalo me aana ka raasta itna aasaan nahi hai .. :)

सहिलो पे सजी थी किस्तिया, फिर भी दरिया में डूब कर हम पार आये,
बने हुए थे express highways, फिर भी हमको कच्चे पथरीले रास्तें ही पाए;
नहीं मिलता अनुभव यहाँ पर, किसी मुसाफिर की कहानियां सुनकर,
ठोखर खाकर ही सीखा जाता है इस ज़माने में, तभी तो हम इन उजालो में आये !
 
Mods ka ujaalo me aana ka raasta itna aasaan nahi hai .. :)

सहिलो पे सजी थी किस्तिया, फिर भी दरिया में डूब कर हम पार आये,
बने हुए थे express highways, फिर भी हमको कच्चे पथरीले रास्तें ही पाए;
नहीं मिलता अनुभव यहाँ पर, किसी मुसाफिर की कहानियां सुनकर,
ठोखर खाकर ही सीखा जाता है इस ज़माने में, तभी तो हम इन उजालो में आये !


bahut khoob |
 
Mods ka ujaalo me aana ka raasta itna aasaan nahi hai .. :)

सहिलो पे सजी थी किस्तिया, फिर भी दरिया में डूब कर हम पार आये,
बने हुए थे express highways, फिर भी हमको कच्चे पथरीले रास्तें ही पाए;
नहीं मिलता अनुभव यहाँ पर, किसी मुसाफिर की कहानियां सुनकर,
ठोखर खाकर ही सीखा जाता है इस ज़माने में, तभी तो हम इन उजालो में आये !

wah ji wak kasuta sher maar diya bhai........
aade to sare e shyar bange...........
 
ar rahi baat Moderator ban k kuch b karan ki te wa te mane pahle e kah di thi k Main Moderator ban k kuch b kar saku hoon...........:p:p


Ravinder ki kavita badhiya hai jibe e mane like ka khatka dabaya tha ....

priya dhayaan te likha kar, kisi ne nu kah di ek "kutchh bhi kar sake se to zeeb ne naak ke laa ke dikha" pher ke karegi?
 
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