ravinder kaa loutaa

ravinderjeet

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रविंदर रूंढ़ा-- भाई राकेश खूंढ़े तू मन्ने १०००० रपिये दे दे | में तन्ने दो मिन्हयाँ पाछे लौटा दयुन्गा |
राकेश खूंढ़ा --( दो मिह्न्याँ पाछे ) र तू यो पीतल का लौटा क्यूँ पकड़ा गा मेरे ताहि |
रविंदर रूंढ़ा -- मन्ने आपणा वायदा निभाया स | मन्ने तेरे पे पिस्से लिए जब वादा कर्या था अक दो मिहने पाछे लौटा दयुन्गा | लौटा दे दिया |
 
Rakesh Khundey ka "pettt chaal" gya hoga..... Lottaaa paani ka bhar ke to diyaa thaa na????

रविंदर रूंढ़ा-- भाई राकेश खूंढ़े तू मन्ने १०००० रपिये दे दे | में तन्ने दो मिन्हयाँ पाछे लौटा दयुन्गा |
राकेश खूंढ़ा --( दो मिह्न्याँ पाछे ) र तू यो पीतल का लौटा क्यूँ पकड़ा गा मेरे ताहि |
रविंदर रूंढ़ा -- मन्ने आपणा वायदा निभाया स | मन्ने तेरे पे पिस्से लिए जब वादा कर्या था अक दो मिहने पाछे लौटा दयुन्गा | लौटा दे दिया |
 
एक दिन रबिंदर रोहतक तें दिल्ली जावे था आर पीरागढ़ी धोरे बस में एक मानस चढ्या ! छात पे हाथ मार के बोल्या "साहेबान कदरदान इस बस में बैठी सभी सवारी ध्यान दें कंपनी की मसहूरी और परचार के लिए हमारी कम्पनी ने एक किताब निकाली है रूंढ़ा खूंढ़ा की मसखरी और इस किताब की कीमत बाजार मार्केट से लेने जाओगे तो दस रुपये से कम नहीं होगी पर यहाँ कम्पनी ने इसकी कीमत राखी है मामूली पांच रुपये" रबिंदर ने झट दे सी पचास का नोट काढ्या आर हाथ ठा के खड़ा हो गया ! वो बोल्या "आ रहा हूँ भाई साहब आ रहा हूँ तो साहेबान इस किताब के साथ कंपनी आपको दे रही है एक "धाकड़ पहेलिया" किताब मुफ्त में" इब रबिंदर कटती उछलन लग लिया आर सबर के सारे बांध तोड़ गया ! किताब आले के चेहरे ए एक मुस्कान कत्ती कुलदीप आले कार्टून बरगी " तो साहेबान इसके साथ साथ कम्पनी आपको दे रही है एक शाही किताब "अल्बदी बुढया के किस्से " आर इतना सुनते ए साथ रबिंदर डांक मार के कत्ती अगली खिड़की में पहुँच लिया आर वे किताब खोस ली ! किताब आला बोल्या भाई साहब खुल्ले कोणी ! रबिंदर बोल्या रे तन्ने इसा अनमोल खजाना दे दिया तू रख ले सारे !इसने फेर उस किताब के चुटकुले पंजाब केसरी में भेजे पंजाब केसरी आल्या ने उलटे इस ताहि डाइजेस्ट सीरिज कोरियर कर दी !
अर इब रबिंदर उन चारू किताबा के पन्ने खोल के ऍफ़ एम् आले सिड की ढला करडा होया मंड रहया है कोए हंसो कोए रोवो इसके कोए फरक नहीं पड़ता ! मेरी सरपंच महोदय से गुजारिश है की रबिंदर भाई को दस बीस दन की छुट्टी दे दयो किते हांड आवेगा ! अर रबिंदर भाई से गुजारिश है की इबके कोए इसा खजाना खरीद के न ल्याइए ! तेरे ये चुटकले लोगा की नास्सा ताहि अड़ लिए हैं !
 
एक दिन रबिंदर रोहतक तें दिल्ली जावे था आर पीरागढ़ी धोरे बस में एक मानस चढ्या ! छात पे हाथ मार के बोल्या "साहेबान कदरदान इस बस में बैठी सभी सवारी ध्यान दें कंपनी की मसहूरी और परचार के लिए हमारी कम्पनी ने एक किताब निकाली है रूंढ़ा खूंढ़ा की मसखरी और इस किताब की कीमत बाजार मार्केट से लेने जाओगे तो दस रुपये से कम नहीं होगी पर यहाँ कम्पनी ने इसकी कीमत राखी है मामूली पांच रुपये" रबिंदर ने झट दे सी पचास का नोट काढ्या आर हाथ ठा के खड़ा हो गया ! वो बोल्या "आ रहा हूँ भाई साहब आ रहा हूँ तो साहेबान इस किताब के साथ कंपनी आपको दे रही है एक "धाकड़ पहेलिया" किताब मुफ्त में" इब रबिंदर कटती उछलन लग लिया आर सबर के सारे बांध तोड़ गया ! किताब आले के चेहरे ए एक मुस्कान कत्ती कुलदीप आले कार्टून बरगी " तो साहेबान इसके साथ साथ कम्पनी आपको दे रही है एक शाही किताब "अल्बदी बुढया के किस्से " आर इतना सुनते ए साथ रबिंदर डांक मार के कत्ती अगली खिड़की में पहुँच लिया आर वे किताब खोस ली ! किताब आला बोल्या भाई साहब खुल्ले कोणी ! रबिंदर बोल्या रे तन्ने इसा अनमोल खजाना दे दिया तू रख ले सारे !इसने फेर उस किताब के चुटकुले पंजाब केसरी में भेजे पंजाब केसरी आल्या ने उलटे इस ताहि डाइजेस्ट सीरिज कोरियर कर दी !
अर इब रबिंदर उन चारू किताबा के पन्ने खोल के ऍफ़ एम् आले सिड की ढला करडा होया मंड रहया है कोए हंसो कोए रोवो इसके कोए फरक नहीं पड़ता ! मेरी सरपंच महोदय से गुजारिश है की रबिंदर भाई को दस बीस दन की छुट्टी दे दयो किते हांड आवेगा ! अर रबिंदर भाई से गुजारिश है की इबके कोए इसा खजाना खरीद के न ल्याइए ! तेरे ये चुटकले लोगा की नास्सा ताहि अड़ लिए हैं !

ha ha ha ha ha ha issi pyaari-pyaari sraahanaa ki khaatar dhanyawaad .me aapne chutklyaan pe chaahe naa haansyaa par tere iss chutkale pe ghani haansi aayi.chutti matalab manne ben karwaawe s ke ? ghapadchoth machaawan ke aarop me.


ar yo maanas tu-a thaa ke ?
 
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ha ha ha ha ha ha issi pyaari-pyaari sraahanaa ki khaatar dhanyawaad .me aapne chutklyaan pe chaahe naa haansyaa par tere iss chutkale pe ghani haansi aayi.chutti matalab manne ben karwaawe s ke ? ghapadchoth machaawan ke aarop me.


ar yo maanas tu-a thaa ke ?
Mein hota to tanne wa kitab 50 lakh mein bhi nahi bechta tanne loga ka karoda ka khoon fook diya
 
एक दिन रबिंदर रोहतक तें दिल्ली जावे था आर पीरागढ़ी धोरे बस में एक मानस चढ्या ! छात पे हाथ मार के बोल्या "साहेबान कदरदान इस बस में बैठी सभी सवारी ध्यान दें कंपनी की मसहूरी और परचार के लिए हमारी कम्पनी ने एक किताब निकाली है रूंढ़ा खूंढ़ा की मसखरी और इस किताब की कीमत बाजार मार्केट से लेने जाओगे तो दस रुपये से कम नहीं होगी पर यहाँ कम्पनी ने इसकी कीमत राखी है मामूली पांच रुपये" रबिंदर ने झट दे सी पचास का नोट काढ्या आर हाथ ठा के खड़ा हो गया ! वो बोल्या "आ रहा हूँ भाई साहब आ रहा हूँ तो साहेबान इस किताब के साथ कंपनी आपको दे रही है एक "धाकड़ पहेलिया" किताब मुफ्त में" इब रबिंदर कटती उछलन लग लिया आर सबर के सारे बांध तोड़ गया ! किताब आले के चेहरे ए एक मुस्कान कत्ती कुलदीप आले कार्टून बरगी " तो साहेबान इसके साथ साथ कम्पनी आपको दे रही है एक शाही किताब "अल्बदी बुढया के किस्से " आर इतना सुनते ए साथ रबिंदर डांक मार के कत्ती अगली खिड़की में पहुँच लिया आर वे किताब खोस ली ! किताब आला बोल्या भाई साहब खुल्ले कोणी ! रबिंदर बोल्या रे तन्ने इसा अनमोल खजाना दे दिया तू रख ले सारे !इसने फेर उस किताब के चुटकुले पंजाब केसरी में भेजे पंजाब केसरी आल्या ने उलटे इस ताहि डाइजेस्ट सीरिज कोरियर कर दी !
अर इब रबिंदर उन चारू किताबा के पन्ने खोल के ऍफ़ एम् आले सिड की ढला करडा होया मंड रहया है कोए हंसो कोए रोवो इसके कोए फरक नहीं पड़ता ! मेरी सरपंच महोदय से गुजारिश है की रबिंदर भाई को दस बीस दन की छुट्टी दे दयो किते हांड आवेगा ! अर रबिंदर भाई से गुजारिश है की इबके कोए इसा खजाना खरीद के न ल्याइए ! तेरे ये चुटकले लोगा की नास्सा ताहि अड़ लिए हैं !


कई त जमा सरनार्थिया आल्ले ब्गावन लाग गया .....



 
रविंदर रूंढ़ा-- भाई राकेश खूंढ़े तू मन्ने १०००० रपिये दे दे | में तन्ने दो मिन्हयाँ पाछे लौटा दयुन्गा |
राकेश खूंढ़ा --( दो मिह्न्याँ पाछे ) र तू यो पीतल का लौटा क्यूँ पकड़ा गा मेरे ताहि |
रविंदर रूंढ़ा -- मन्ने आपणा वायदा निभाया स | मन्ने तेरे पे पिस्से लिए जब वादा कर्या था अक दो मिहने पाछे लौटा दयुन्गा | लौटा दे दिया |

hahaha.....
khunde k t lotta 10000 ka padd gya:rock
 
एक दिन रबिंदर रोहतक तें दिल्ली जावे था आर पीरागढ़ी धोरे बस में एक मानस चढ्या ! छात पे हाथ मार के बोल्या "साहेबान कदरदान इस बस में बैठी सभी सवारी ध्यान दें कंपनी की मसहूरी और परचार के लिए हमारी कम्पनी ने एक किताब निकाली है रूंढ़ा खूंढ़ा की मसखरी और इस किताब की कीमत बाजार मार्केट से लेने जाओगे तो दस रुपये से कम नहीं होगी पर यहाँ कम्पनी ने इसकी कीमत राखी है मामूली पांच रुपये" रबिंदर ने झट दे सी पचास का नोट काढ्या आर हाथ ठा के खड़ा हो गया ! वो बोल्या "आ रहा हूँ भाई साहब आ रहा हूँ तो साहेबान इस किताब के साथ कंपनी आपको दे रही है एक "धाकड़ पहेलिया" किताब मुफ्त में" इब रबिंदर कटती उछलन लग लिया आर सबर के सारे बांध तोड़ गया ! किताब आले के चेहरे ए एक मुस्कान कत्ती कुलदीप आले कार्टून बरगी " तो साहेबान इसके साथ साथ कम्पनी आपको दे रही है एक शाही किताब "अल्बदी बुढया के किस्से " आर इतना सुनते ए साथ रबिंदर डांक मार के कत्ती अगली खिड़की में पहुँच लिया आर वे किताब खोस ली ! किताब आला बोल्या भाई साहब खुल्ले कोणी ! रबिंदर बोल्या रे तन्ने इसा अनमोल खजाना दे दिया तू रख ले सारे !इसने फेर उस किताब के चुटकुले पंजाब केसरी में भेजे पंजाब केसरी आल्या ने उलटे इस ताहि डाइजेस्ट सीरिज कोरियर कर दी !
अर इब रबिंदर उन चारू किताबा के पन्ने खोल के ऍफ़ एम् आले सिड की ढला करडा होया मंड रहया है कोए हंसो कोए रोवो इसके कोए फरक नहीं पड़ता ! मेरी सरपंच महोदय से गुजारिश है की रबिंदर भाई को दस बीस दन की छुट्टी दे दयो किते हांड आवेगा ! अर रबिंदर भाई से गुजारिश है की इबके कोए इसा खजाना खरीद के न ल्याइए ! तेरे ये चुटकले लोगा की नास्सा ताहि अड़ लिए हैं !


भाई, कती आंडी सौद्दा बगा मारया यो तै...जमा क्रिएटिव...
 
एक दिन रबिंदर रोहतक तें दिल्ली जावे था आर पीरागढ़ी धोरे बस में एक मानस चढ्या ! छात पे हाथ मार के बोल्या "साहेबान कदरदान इस बस में बैठी सभी सवारी ध्यान दें कंपनी की मसहूरी और परचार के लिए हमारी कम्पनी ने एक किताब निकाली है रूंढ़ा खूंढ़ा की मसखरी और इस किताब की कीमत बाजार मार्केट से लेने जाओगे तो दस रुपये से कम नहीं होगी पर यहाँ कम्पनी ने इसकी कीमत राखी है मामूली पांच रुपये" रबिंदर ने झट दे सी पचास का नोट काढ्या आर हाथ ठा के खड़ा हो गया ! वो बोल्या "आ रहा हूँ भाई साहब आ रहा हूँ तो साहेबान इस किताब के साथ कंपनी आपको दे रही है एक "धाकड़ पहेलिया" किताब मुफ्त में" इब रबिंदर कटती उछलन लग लिया आर सबर के सारे बांध तोड़ गया ! किताब आले के चेहरे ए एक मुस्कान कत्ती कुलदीप आले कार्टून बरगी " तो साहेबान इसके साथ साथ कम्पनी आपको दे रही है एक शाही किताब "अल्बदी बुढया के किस्से " आर इतना सुनते ए साथ रबिंदर डांक मार के कत्ती अगली खिड़की में पहुँच लिया आर वे किताब खोस ली ! किताब आला बोल्या भाई साहब खुल्ले कोणी ! रबिंदर बोल्या रे तन्ने इसा अनमोल खजाना दे दिया तू रख ले सारे !इसने फेर उस किताब के चुटकुले पंजाब केसरी में भेजे पंजाब केसरी आल्या ने उलटे इस ताहि डाइजेस्ट सीरिज कोरियर कर दी !
अर इब रबिंदर उन चारू किताबा के पन्ने खोल के ऍफ़ एम् आले सिड की ढला करडा होया मंड रहया है कोए हंसो कोए रोवो इसके कोए फरक नहीं पड़ता ! मेरी सरपंच महोदय से गुजारिश है की रबिंदर भाई को दस बीस दन की छुट्टी दे दयो किते हांड आवेगा ! अर रबिंदर भाई से गुजारिश है की इबके कोए इसा खजाना खरीद के न ल्याइए ! तेरे ये चुटकले लोगा की नास्सा ताहि अड़ लिए हैं !

bahut badhiya Rakesh bhai, jamma suwaad aagya .. :)
 
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