dineshdhochak
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Famous person of my village
Dear all
Its my pleasure to write here that my village hero and my neighbour who sacrificed his life to save our motherland .........gets ASHOK CHAKRA ON 26TH January .
Award is given by honable president of india
गोहाना, संवाद सहयोगी : जिले के लाठ गांव के शहीद हवलदार राजेश कुमार को गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित किए जाने पर उसके परिजन व ग्रामीण गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुंह से बरबस यह शब्द निकल रहा था कि उनके गांव का लाल युवा पीढ़ी के लिए आदर्श बनेगा व युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत होगी। मंगलवार को शहीद की पत्नी बबीता व दोनों बच्चे ज्योति व नीरज दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए। राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शहीद राजेश को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल एक अगस्त को जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में लाठ गांव के हवलदार राजेश कुमार ने अदम्य साहस व वीरता का परिचय दिया था। मरते दम तक उसने आतंकवादियों का कड़ा मुकाबला किया। 11 बटालियन राजपूताना राइफल के इस हवलदार ने चार आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। तभी एक आतंकवादी की बंदूक से निकली गोलियां राजेश के पेट में आकर लगी। इसके बाद भी काफी देर तक राजेश लहूलुहान हालत में आतंकवादियों की गोलीबारी का जवाब देता रहा। शाम पौने सात बजे राजेश के शरीर से अधिक खून बह जाने के कारण उसने दम तोड़ दिया। गौरतलब है कि शहीद राजेश कुमार ने कारगिल युद्ध में भी सक्रिय रूप से भाग लिया था। कारगिल युद्ध में राजेश के उत्कृष्ट कायरें को देखते हुए उसे प्रशसा पत्र भी दिया गया था। इसके अलावा भी कई अवसरों पर आतंकवादियों से उसकी मुठभेड़ हुई, जिसमें उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जमकर लोहा लिया था। शहीद की पत्**नी बबीता ने कहा था कि जहा उसे पति के शहीद होने पर गर्व है, वहीं उनकी पारिवारिक जिंदगी में भूचाल सा आ गया है। शहीद की मा और पिता का काफी समय पहले ही निधन हो चुका है। दरअसल गाव लाठ निवासी रामकिशन के दो बेटे थे, जिनमें बड़ा सुरेद्र व छोटा राजेश था। सुरेद्र भी सेना में था। उसकी रिटायर्ड होने के बाद मौत हो चुकी है। रामकिशन भी कई साल पहले दुनिया छोड़ चल बसे थे। राजेश की मा पनवेश्वरी का भी निधन हो चुका था।
इनसेट..
अपने भाई पर गर्व है : राजपति
गाव लाठ निवासी शहीद राजेश कुमार को गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित होने से उसकी सबसे बड़ी बहन राजपति गमगीन आखों से कहती है कि उसे अपने भाई पर गर्व है, लेकिन वे अब रक्षाबंधन पर्व पर किसका इतजार करेगी। राजेश कुमार की तीन बहने है जिनमें सबसे बड़ी राजपति है और उसके बाद दर्शन व वीरमति है। गाव में महिलाओं, बुजुर्गाें व बच्चों में काफी उत्साह था। राजेश की भाभी दर्शना ने कहा कि उसे अपने देवर पर गर्व है, उसके देवर ने हरियाणा का गौरव बढ़ाया है। गांव के प्रधान बलवीर सिंह, जगवीर सिंह, विनोद कुमार, सतपाल, पवन, सोनू, रमला आदि ने एक स्वर में कहा कि शहीद ने अपनी वीरता से ग्रामीणों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया है।
salute to real hero of my village and nation...............:rock
Its my pleasure to write here that my village hero and my neighbour who sacrificed his life to save our motherland .........gets ASHOK CHAKRA ON 26TH January .
Award is given by honable president of india
गोहाना, संवाद सहयोगी : जिले के लाठ गांव के शहीद हवलदार राजेश कुमार को गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित किए जाने पर उसके परिजन व ग्रामीण गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुंह से बरबस यह शब्द निकल रहा था कि उनके गांव का लाल युवा पीढ़ी के लिए आदर्श बनेगा व युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत होगी। मंगलवार को शहीद की पत्नी बबीता व दोनों बच्चे ज्योति व नीरज दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुए। राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने शहीद राजेश को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल एक अगस्त को जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में लाठ गांव के हवलदार राजेश कुमार ने अदम्य साहस व वीरता का परिचय दिया था। मरते दम तक उसने आतंकवादियों का कड़ा मुकाबला किया। 11 बटालियन राजपूताना राइफल के इस हवलदार ने चार आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। तभी एक आतंकवादी की बंदूक से निकली गोलियां राजेश के पेट में आकर लगी। इसके बाद भी काफी देर तक राजेश लहूलुहान हालत में आतंकवादियों की गोलीबारी का जवाब देता रहा। शाम पौने सात बजे राजेश के शरीर से अधिक खून बह जाने के कारण उसने दम तोड़ दिया। गौरतलब है कि शहीद राजेश कुमार ने कारगिल युद्ध में भी सक्रिय रूप से भाग लिया था। कारगिल युद्ध में राजेश के उत्कृष्ट कायरें को देखते हुए उसे प्रशसा पत्र भी दिया गया था। इसके अलावा भी कई अवसरों पर आतंकवादियों से उसकी मुठभेड़ हुई, जिसमें उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जमकर लोहा लिया था। शहीद की पत्**नी बबीता ने कहा था कि जहा उसे पति के शहीद होने पर गर्व है, वहीं उनकी पारिवारिक जिंदगी में भूचाल सा आ गया है। शहीद की मा और पिता का काफी समय पहले ही निधन हो चुका है। दरअसल गाव लाठ निवासी रामकिशन के दो बेटे थे, जिनमें बड़ा सुरेद्र व छोटा राजेश था। सुरेद्र भी सेना में था। उसकी रिटायर्ड होने के बाद मौत हो चुकी है। रामकिशन भी कई साल पहले दुनिया छोड़ चल बसे थे। राजेश की मा पनवेश्वरी का भी निधन हो चुका था।
इनसेट..
अपने भाई पर गर्व है : राजपति
गाव लाठ निवासी शहीद राजेश कुमार को गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित होने से उसकी सबसे बड़ी बहन राजपति गमगीन आखों से कहती है कि उसे अपने भाई पर गर्व है, लेकिन वे अब रक्षाबंधन पर्व पर किसका इतजार करेगी। राजेश कुमार की तीन बहने है जिनमें सबसे बड़ी राजपति है और उसके बाद दर्शन व वीरमति है। गाव में महिलाओं, बुजुर्गाें व बच्चों में काफी उत्साह था। राजेश की भाभी दर्शना ने कहा कि उसे अपने देवर पर गर्व है, उसके देवर ने हरियाणा का गौरव बढ़ाया है। गांव के प्रधान बलवीर सिंह, जगवीर सिंह, विनोद कुमार, सतपाल, पवन, सोनू, रमला आदि ने एक स्वर में कहा कि शहीद ने अपनी वीरता से ग्रामीणों को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया है।
salute to real hero of my village and nation...............:rock