Remembering Netaji Subhash Chandra Bose on his 114th B'day Anniversary!

[h=1]नेताजी की रहस्यमय मौत पर एक और सनसनी[/h] नेताजी सुभाषचंद्र बोस की रहस्यमयी मृत्यु पर एक और सनसनीखेज रहस्योदघाटन करते हुए रूस में रामकृष्ण मिशन के प्रमुख मंहत ने कहा है कि नेताजी की मौत विमान दुर्घटना में नहीं बल्कि रूस की एक जेल में हुई थी।

रूस में पिछले दो दशक से रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष रहे ज्योतिरानन्द ने अपनी हाल की असम यात्रा के दौरान एक टेलीविजन साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का यह दावा गलत है कि नेताजी 18 अगस्त 1945 को ताईवान में ताईहोकू हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटना में मारे गए थे।
उन्होंने कहा- सच्चाई यह है कि उन्हें रूसियों ने पकड़ लिया था और ओमस्क की जेल मे कैद कर दिया था। जहाँ काफी अर्से के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली थी।
ओमस्क रूस के साइबेरिया क्षेत्र का एक छोटा शहर है।
उन्होंने कहा कि इस बात की पूरी संभावना है कि नेताजी ने इसी जेल मे अपनी अंतिम सांस ली होगी।
मास्को में रामकृष्ण मिशन की सचिव लिलियाना मालकोवा ने ज्योतिरानंद के इस सनसनीखेज खुलासे को सही बताया है।
मंहत ने कुछ दस्तावेजों और रूस में भारत की तत्कालीन राजदूत विजय लक्ष्मी पंडित के बयान का हवाला देते हुए बताया कि जब पंडित को नेताजी के ओमस्क जेल में होने की खबर लगी तो वह उनसे मिलने वहाँ गई थीं लेकिन रूसी अधिकारियों ने उन्हें नेताजी से नहीं मिलने दिया।
ज्योतिरानंद ने कहा कि पंडित जब जेल से बाहर निकल ही रहीं थीं कि उन्होंने हूबहू नेताजी से मिलते जुलते शक्ल वाले एक कैदी को वहाँ देखा। वह कैदी काफी थकाहारा दिखाई पड़ रहा था। ऐसा लगता था कि उसे जेल में काफी यातना दी गई है जिससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है।
मंहत ज्योतिरानंद के मुताबिक पण्डित यह सबदेख कर बहुत व्यथित हुई थीं और फौरन नई दिल्ली पहुँच कर उन्होंने इस बात की जानकारी कांग्रेस के तत्कालीन बड़े नेताओं को दी थी। लेकिन इस पर कोई कार्रवाही नहीं की गई।
इस बीच नेताजी पर शोध कर रहे एक शेाधर्कता अनुज धर ने सोमवार को कोलकाता में विदेश मंत्रालय के 12 जनवरी 1996 के एक ऐसे गोपनीय दस्तावेज का हवाला दिया जिसमें मंत्रालय की ओर से रूस की मीडिया में लगातार आ रही उन खबरों पर गहरी चिंता जताई गई थी जिनमें कहा गया था कि नेताजी की मौत 1945 के बाद रूस की एक जेल में हुई थी।
इस दस्तावेज पर मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव आर एल नारायणन के हस्ताक्षर है और साथ ही इसमें एक पूर्व विदेश सचिव की टिप्पणी भी संलग्न है।
 
यह फोटो यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि किसकी क्या औकात थी?

>लोग किसे चाहते थे?

>कौन लोकप्रिय था?

>क्यों गांधी ने नेताजी को कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने को विवश किया था?

>क्यों गांधी ने 'नेताजी को अंग्रेजों को सौंपने" के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये थे?

>क्यों नेताजी की मृत्यु रहस्य बनी हुई है?

>क्यों कांग्रेस ने 'मुखर्जी आयोग' की रिपोर्ट का बहिष्कार किया था,
जिसमें नेताजी की विमान दुर्घटना में

हुई मृत्यु को गलत ठहराया गया था। यहां तक बताया था कि उस दिन जापान तो क्या पूरे विश्व में कोई विमान
दुर्घटना नहीं हुई।

>क्यों सरकार ने उनसे 'भारत रत्न' वापस ले लिया था।

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कांग्रेस की सथापना स्वतंत्रता आन्दोलन को कमजोर करने के लिए अंग्रेजों ने की थी । जो भी लोग कांग्रेस से जुड़े ये सोच कर की कांग्रेस देशभक्त पार्टी हे , परन्तु जब उन्हें पता चला की ये तो देश्द्रोहिओं और अंग्रेजों के चापलूसों का झुण्ड हे , तो वो इससे छोड़ कर चले गए । हर एक नालायक चापलूस होता हे ,हर चापलूस कान्ग्रेस्सी होता हे ,हर एक कान्ग्रेस्सी किसी ना किसी रूप में देशद्रोही होता हे ।
 
उपरोक्त पोस्ट से ये मत समझना की में भाजपा का बड़ा समर्थक हूँ । पर कम से कम भाजपा वाले देशद्रोही नहीं हैं पर जट्टों के परिपेक्ष में वे भी कोई अछे नहीं हैं ,भाजपा में जाट द्रोही भरे पड़े हैं ।
 
भाजपा समर्थक तो मैं भी नहीं हूँ रविन्द्रजीत सिंह जी ! हाँ मैं मोदी समर्थक अवश्य हूँ। :cool:
 
हर एक नालायक चापलूस होता हे ,हर चापलूस कान्ग्रेस्सी होता हे ,हर एक कान्ग्रेस्सी किसी ना किसी रूप में देशद्रोही होता हे ।

तो भाईसाब आप लगे हाथ देशभक्ति का ठप्पा लगवाने के लिए पूरी की जाने वाली अन्य शर्तो का भी उल्लेख कर दीजिये
 
Mangal Pandey ... Laxmi Bai ... etc etc so called freedom fighters they were not actually fighting for India 1857 uprising was not for a Free India :)
 
सुभाष चन्द्र बोस का अपने भाई और भाभी के साथ एक अत्यंत दुर्लभ चित्र।


जय हिन्द !!



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माँ भारती के लाल, भारतीय क्रान्ति के स्तम्भ नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जन्म दिवस पर हार्दिक शुभकामानाएँ।


माँ भारती से प्रार्थना है कि ऐसे वीर पुनः अपने गर्भ से उत्पन्न करें।





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लंदन के फुटपाथ पर दो भारतीय रुके और जूते पॉलिश करने वाले से एक व्यक्ति ने जूते पॉलिश करने को कहा. जूते पॉलिश हो गये. पैसे चुका दिये और
वो अगले जूते पॉलिश करने वाले के पास पहुँचे। वहाँ पहुँच कर भी उन्होने यही किया। जो व्यक्ति अभी जूते पॉलिश करवा कर आया था.


उसने फिर जूते पॉलिश करवाये और पैसे चुकाकर अगले जूते पॉलिश करने वाले के पास पहुँच गया. जब उस व्यक्ति ने 7-8 बार पॉलिश हुये जूते को पॉलिश करवाया तो उसके साथ के व्यक्ति का धैर्य का बाँध टूट गया. उसने पूछ ही लिया:-" भाई जब तुम्हारे जूते एक बार में ही पॉलिश हो गये तो बार-
बार पॉलिश क्यो करवा रहे हो?"


प्रथम व्यक्ति ने कहा:-"ये अंग्रेज मेरे देश में राज कर रहे हैं, मुझे इन घमण्डी अंग्रेजों से जूते साफ करवाने में बडा आनंद आता है."




वह व्यक्ति नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे. उनके जन्मदिवस पर उनको कोटि कोटि नमन.
 
आइये एक सच्ची घटना जो गांधी और सुभाष बाबू दोनों के साथ घटी , उसके द्वारा दोनों की तुलना की जाए....
आज़ादी के पहले ट्रेन के फर्स्ट क्लास में अगर कोई अंग्रेज़ सफर कर रहा हो तो कोई भारतीय उस डिब्बे में नहीं बैठ सकता था ... गांधी की घटना काफी प्रचारित हुई और सब जानते हैं कि गांधी को सामान सहित डिब्बे से बाहर फ़ेंक दिया गया था और वो प्लेटफार्म पर ही धरने पर बैठ गए थे....


अब नेता जी का प्रकरण..........
सुभाष फर्स्ट क्लास डिब्बे में बैठे ..अकेले थे.....बाद में एक अंग्रेज़ महिला चढ़ी . वो भारतीय देखकर आग बबूला हो गयी. उसने कहा कि तुम काला आदमी इसमें कैसे आया . अगले स्टेशन पर उतर जाना .सुभाष बाबू चुपचाप बैठे रहे . वो फिर चिल्लाई कि अगर तुम डिब्बे से नहीं उतरोगे तो मैं चिल्लाऊंगी कि तुमने मेरे साथ दुर्व्यवहार करने की कोशिश की ..सुभाष बाबू ने उसको इशारों में बताया कि वह सुन नहीं पाते हैं , बोल नहीं पाते हैं , गूंगे और बहरे हैं . इसलिए जो कह रही हो वो लिखकर दो ..उसने लिखकर दिया .नेताजी ने उसे पढ़ा भी नहीं और जेब में रख लिया..वोह चिल्लाई -अरे इसे पढो तो...


अब बोले नेताजी ..मैडम अब आप बताइये कि अगले स्टेशन पर कौन उतरेगा ? वो महिला हैरत में थी..कहने की बात नहीं कि अगले स्टेशन पर अंग्रेज़ महिला चुपचाप उतर गयी ..
(मासिक पत्रिका कादम्बिनी से साभार)
 
Really it is sad that we are forgetting our Nation Hero, In times of india it was just a small 3 4 line 13 or 14th page, It is really shame that Delhi CM was busy in Dharna & Political game instead of paying tribute to Neta Ji, It was Dr.Sahib Singh Verma who used to visit Tikri Kalan - Netaji Subash Gram on his Birthday

Due respect not shown to Netaji: Narayana Murthy

Delivering the Netaji oration on the occasion of his birth anniversary at the Netaji Research Bureau, Mr. Murthy said, “I was shocked to learn that there is not single a major avenue named after Netaji in Delhi. Correct me, if I am wrong. I hope our wonderful Prime Minister will correct this lacunae.”

Describing Netaji as the most courageous leader of his time, the iconic corporate leader said that his presence would have spearheaded India to become the second most powerful economy of the world ahead of China.



http://www.thehindu.com/news/states/other-states/article1118765.ece


And I'm quite disappointed to see that there's not a single reply here either on JL, looks like JL ppl are also more interested n' involved in time pass/humor section now-a-days! ... :rolleyes:


 
There were many jats in azaad hind fauj any thread or wiki pages on them?.I know about two of them from my village.mods kindly let me know about such wiki page i wish to share info to fello members thanks
 
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