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पाकिस्तान से आने वाले हिंदू -पंजाबी पाकिस्तानी मूल के भारतीय नागरिक हैं और रहेंगे :सांगवान
चण्डीगढ़, 23 सितंबर।( ) अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवा सिंह सांगवान ने कहा है कि मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश न किया जाए, क्योंकि मेरा बयान बड़ा स्पष्ट है कि पाकिस्तान से आने वाले हिंदू -पंजाबी पाकिस्तानी मूल के भारतीय नागरिक हैं और रहेंगे।
आज एक जारी बयान में उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति या समाज अपने देश में शरणार्थी नहीं कहलाया जा सकता है। उसे विस्थापित कहा जाता है, जिस प्रकार कश्मीरी पंडितों को विस्थापित कहा जाता है। जबकि पाकिस्तान से आने वाले हिंदू पंजाबियों को भारत ने शरणार्थी के रूप में स्वीकार किया। इसलिए दिल्ली और पंजाब में जगह-जगह रिफ्यूजी कैंप बनाकर शरणार्थी कमेटियों का गठन करके उनको केंद्र सरकार व तत्कालीन पंजाब सरकार ने करोंड़ों रुपए का अनुदान और बसने के लिए शहरों में बेसकीमती जमीन दी। उन्होंने कहा कि ये शरणार्थी कमेटियां आज तक भंग नहीं की गई हैं और न ही इनके सरकारी खर्चे का अच्छी तरह से ऑडिट हो पाया है। इसके बावजूद भी इन लोगों को अपने आप को शरणार्थी (रिफ्यूजी) कहने में एतराज है तो उस सरकारी अनुदान व जमीन को ब्याज सहित हरियाणा सरकार को लौटा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शरणार्थी की परिभाषा को अच्छी तरह जानना है तो यू.एन.ओ. के चार्टर मेें शरणार्थी की दी गई परिभाषा को अच्छी तरह पढ़ लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस समाज का अपनी कॉलोनियों के नाम पाकिस्तान के कस्बों के नाम पर रखना जैसे कि मियांवाली, डेरांवाली, झंडावाली आदि ये दर्शाता है कि इस समाज की पाकिस्तानी मूल भावना है। इसलिए अनेकों तथ्यों से यह प्रमाणित है कि ये समाज पाकिस्तानी मूल का भारतीय नागरिक है। जब इस समाज के लोग पहले-पहल यहां आए तो हरियाणवी मूल के लोग इन्हे पाकिस्तानी कहते थे। फिर इन्होंने एतराज करके कहा कि उनको शरणार्थी कहा जाए। जब हम हरियाणवी मूल के लोग उनको शरणार्थी कहने लगे तो इन्होंने कहा कि उनको पंजाबी कहा जाए और इनकी अनेक पंजाबी सभाएं आज भी कार्यरत हैं। श्री सांगवान ने कहा कि जहां तक उनके पूर्व में दिए गए बयान पर माफी मांगने की बात है तो इसका प्रश्र ही पैदा नहीं होता। वे अपने बयान पर आज भी अडिग हैं।
चण्डीगढ़, 23 सितंबर।( ) अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व कमांडेंट हवा सिंह सांगवान ने कहा है कि मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश न किया जाए, क्योंकि मेरा बयान बड़ा स्पष्ट है कि पाकिस्तान से आने वाले हिंदू -पंजाबी पाकिस्तानी मूल के भारतीय नागरिक हैं और रहेंगे।
आज एक जारी बयान में उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति या समाज अपने देश में शरणार्थी नहीं कहलाया जा सकता है। उसे विस्थापित कहा जाता है, जिस प्रकार कश्मीरी पंडितों को विस्थापित कहा जाता है। जबकि पाकिस्तान से आने वाले हिंदू पंजाबियों को भारत ने शरणार्थी के रूप में स्वीकार किया। इसलिए दिल्ली और पंजाब में जगह-जगह रिफ्यूजी कैंप बनाकर शरणार्थी कमेटियों का गठन करके उनको केंद्र सरकार व तत्कालीन पंजाब सरकार ने करोंड़ों रुपए का अनुदान और बसने के लिए शहरों में बेसकीमती जमीन दी। उन्होंने कहा कि ये शरणार्थी कमेटियां आज तक भंग नहीं की गई हैं और न ही इनके सरकारी खर्चे का अच्छी तरह से ऑडिट हो पाया है। इसके बावजूद भी इन लोगों को अपने आप को शरणार्थी (रिफ्यूजी) कहने में एतराज है तो उस सरकारी अनुदान व जमीन को ब्याज सहित हरियाणा सरकार को लौटा देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शरणार्थी की परिभाषा को अच्छी तरह जानना है तो यू.एन.ओ. के चार्टर मेें शरणार्थी की दी गई परिभाषा को अच्छी तरह पढ़ लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस समाज का अपनी कॉलोनियों के नाम पाकिस्तान के कस्बों के नाम पर रखना जैसे कि मियांवाली, डेरांवाली, झंडावाली आदि ये दर्शाता है कि इस समाज की पाकिस्तानी मूल भावना है। इसलिए अनेकों तथ्यों से यह प्रमाणित है कि ये समाज पाकिस्तानी मूल का भारतीय नागरिक है। जब इस समाज के लोग पहले-पहल यहां आए तो हरियाणवी मूल के लोग इन्हे पाकिस्तानी कहते थे। फिर इन्होंने एतराज करके कहा कि उनको शरणार्थी कहा जाए। जब हम हरियाणवी मूल के लोग उनको शरणार्थी कहने लगे तो इन्होंने कहा कि उनको पंजाबी कहा जाए और इनकी अनेक पंजाबी सभाएं आज भी कार्यरत हैं। श्री सांगवान ने कहा कि जहां तक उनके पूर्व में दिए गए बयान पर माफी मांगने की बात है तो इसका प्रश्र ही पैदा नहीं होता। वे अपने बयान पर आज भी अडिग हैं।