ravichaudhary
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रवि जी
आपने सही फरमाया ! जितना धन कामन वेल्थ गेम्स पर खर्च हुआ है , व्यर्थ गया है और लूटा गया है, वह धन हजारों घरों में रोटी, हजारों बच्चों को शिक्षा प्रदान कर सकता था !
लेकिन, इस तरह के आयोजन की सार्थकता को परखने के लिए एक दुसरे नजरिये से देखना जरूर है ! दरअसल, इस तरह के आयोजन राष्ट्रीय गोरव का प्रतीक ही नहीं, बल्कि हमारी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत भी होते है ! हजारों सपने देखे जाते हैं इस तरह के मंच पर अपनी प्रतिभा दिखने के !
लेकिन जिस तरह की बंदरबांट, बेशर्मी से की गई लूटखसोट व् लापरवाही की गई, वह सब राष्ट्रीय गोरव से ज्यादा राष्ट्रीय शर्म का कारण बन गई !
लेकिन अब क्या किया जाये ? हमारी मूल चर्चा जाट आरक्षण और कामन वेल्थ गेम्स है !
इस विषय पर में अपने जाट नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपेक्षा करूंगा की इस आयोजन के दोरान अपने आन्दोलन को स्थगित कर सहयोग करें, बजाय इसके कि बेशरम करताधर्ताओं, नोकरशाहों, नेताओं और ठेकेदारों कि कालिख अपने मूह पर पोतें ! वैसे भी मुझे पूर्ण विश्वाश है कि इस सारे आयोजन में भारत कि तरफ से हमारे बच्चे ही आशा कि किरण हैं ! कम से कम उनके लिए संयम बरतें !
इस भव्य समारोह कि भव्य कामयाबी कि शुभ कामनाओं सहित !
सत्यपाल
Deswal ji
That sentiment is very large hearted and very generous of you, jsut the kind of spirit expected of of a member of our community, which is known for its sacrifice, of its ethos of putting nation before self etc etc.
However we should not pull wool over our children's eyes, but teach them not to accept a wrong.
This waste and loot is as evil as a military attack on our nation, where our Jats freely give their lives.
The games are a waste of time and money.
They should be stopped, and a strong signal sent that the money should be put to a better use. We should not accept corruption as a standard to live our lives by.
Ravi Chaudhary