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बात पानी की चली है, तो सुनो - इस "जाटलैंड" इलाके में हरयाणा को छोड़कर सब जगह का पानी अच्छा है । मजाक की बात नहीं, हरयाणा सरकार ने जमीन के पानी का सर्वे करा रखा है जिसके मुताबिक यमुना के साथ वाले इलाके को छोड़कर बाकी सारे हरयाणा का जमीनी पानी पीने के लिए ठीक नहीं, ज्यादातर पानी खारा है । और रोहतक का जमीनी पानी तो और भी खराब है । मैं खुद भी रोहतक से हूँ - पर सच तो सच है । राजस्थान में पानी के कमी है, जलस्तर काफी नीचा है, पर जल है मीठा और स्वादिस्ट । इस मामले में पंजाब की हालत भी हरयाणा से बेहतर है ।
सबसे बढ़िया पानी है पश्चिमी यू.पी. का । जमना-गंगा का इलाका है - कहीं भी जमीन खोदो, पानी मीठा ही मिलेगा । एक हरयाणा का छोरा बाघपत के किसी गांव में चला गया, किसी दूसरे के साथ । वहां खाने के वक्त रोटी के साथ थोड़ा आम का अचार भी रख दिया । फिर उस घर की एक बुजुर्ग औरत ने पूछ लिया - लल्ला, मिठाई खायेगा ? उसने हां कर दी । फिर क्या था, उसकी थाली में एक मोटा सा गुड़ का ढ़ेला रख दिया ! फिर उस बुजुर्ग ताई ने कहा - लल्ला, इस प्रदेश की तीन चीजें ही तो मशहूर हैं - खटाई (आम), मिठाई (गुड़) और पानी !
भारत विभाजन से पहले पंजाब बहुत बड़ा प्रान्त था - दिल्ली से ऊपर सारा पंजाब ही था । अब तो इसका आधा हिस्सा पाकिस्तान में चला गया है । दिल्ली, हरयाणा और हिमाचल प्रदेश भी इससे अलग हो गये हैं । रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 'जन-गण-मन' में पंजाब का नाम सबसे ऊपर लिखा है - "पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंग ।" उस बड़े पंजाब में तीन जिले बहुत मशहूर होते थे - रोहतक, अमृतसर और फिरोजपुर । 'रोहतक' का मतलब है आज का लगभग आधा हरयाणा । इनकी मशहूरी की वजह थी यहां के लोगों का शाकाहारी होना । फौज में भरती करते समय अंग्रेज लोग इन तीन जिले वालों का मैडिकल टैस्ट कम ही लेते थे । इसलिए ये तीन जिले अंग्रेजों ने मशहूर कर दिये - इसमें 'पानी' वाली कोई बात नहीं भाई !
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