बिजली रहे या न रहे, भुरथला गांव के ग्रामीणों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यहां के सभी 224 घर सौर ऊर्जा से जगमग हैं। यह हरियाणा का पहला सौर ऊर्जा गांव बन गया है।
करीब 1200 की आबादी वाला भुरथला पिछले दिसंबर तक आम गांवों की तरह धूल धक्कड़ से भरा गांव था। यहां के लोग बिजली-पानी के लिए तरसते रहते थे। अधिकांश समय बिजली गुल ही रहती थी। दिसंबर में यहां एक नई शुरुआत हुई। गुड़गांव ग्रामीण बैंक ने गांववालों से उनके घरों में सौर ऊर्जा सिस्टम लगाने की पेशकश की। जब ग्रामीणों को पता चला कि किट की कीमत 15 हजार रुपए है तो उन्होंने मना कर दिया।
सरपंच सतीश कुमार के मुताबिक, इसके बाद लोगों को समझाया कि उन्हें पांच साल तक सिर्फ 300 रुपए प्रतिमाह की किश्त देनी होगी तो कुछ ग्रामीण मान गए। पहले सात-आठ लोगों ने शुरुआत की। बैंक ने किट में एक सौर ऊर्जा पैनल, एक बैटरी, दो ट्यूबलाइट और एक पंखा दिया। बिजली जाने पर जब सौर ऊर्जा वाले घर रोशन रहने लगे तो पूरे गांव को यह तरीका पसंद आ गया।
नए साल का पहला महीना बीता ही था कि गांव के सारे घर ‘24 घंटे सातों दिन’ बिजली वाले हो गए। बैंक ने गांव को शत प्रतिशत सौर ऊर्जा के प्रयोग पर एक लाख रुपए इनाम या 10 सोलर स्ट्रीट लाइट का इनाम देने की पेशकश की, वो भी सोलर वाली।
गांव के एक बुजुर्ग रामकिशन ने कहा, ‘देखो, बिजली नहीं है, मगर पंखे की हवा खा रहे हैं।’ गांव की महिलाएं भी खुश हैं। गृहणी सुशीला कहती हैं, ‘हमें अब अंधेरे में काम नहीं करना पड़ता। पहले हम बिजली के हिसाब से टाइम टेबल बनाते थे, अब सब कुछ हमारे हिसाब से चलता है।’
भुरथला की राह पर कई गांव
गुड़गांव ग्रामीण बैंक के मैनेजर विजयपाल चौहान के मुताबिक भुरथला गांव को देखते हुए दूसरे गांवों के लोग भी प्रेरित हो रहे हैं। लुला अहीर, झाल, जाहिदपुर, सुरहेली, कोसली आदि गांवों में भी सौर किट लगाई जा रही हैं। बैंक अध्यक्ष एनपी हेगड़े ने कहा कि भुरथला सौर ऊर्जा गांव बन गया है।
224
घर है भुरथला गांव में
2009
दिसंबर में शुरू हुई थी
300
रुपए महीना दिया प्रत्येक घर ने। किट की लागत १५ हजार।