Saheed-e-azam Bhagat singh

Azadi k deewano Rajguru , Sukhdev and Saheed-e-azam Bhagat singh ko mera sat sat naman


शहीद दिवस पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि...

शहीदों की चिताओं पे लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मिटने वालो का बस यही बाकी निशां होगा.. अमर शहीद बिस्मिल
 
हे! वीर शहीदों हम आपको आपके बलिदान के लिए शत शत नमन करते हैं !
 
There can be no bigger sacrifice than the sacrifice of Bhagat Singh and his comrades. Alas, Mother India could not produce any more Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev. A big salute to these revolutionaries, their courage and unparalleled sense of patriotism.
 
अमर शहीदों को प्रणाम ..!!! शत शत नमन ..
उन सब शहीदों को भी प्रणाम जिन के नाम इतिहास में दर्ज नहीं हैं ..!!!
 
है नमन उनको की जो यशकाय को अमरत्व देकर
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गए है,
है नमन उनको की जिनके सामने बोना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े, पर आसमानी हो गए है !!
 
फ़ासी के पहले ३ मार्च को अपने भाई कुलतार को लिखे पत्र में भगत सिह ने लिखा था -

उसे यह फ़िक्र है हरदम तर्ज़-ए-ज़फ़ा (अन्याय) क्या है
हमें यह शौक है देखें सितम की इंतहा क्या है
दहर (दुनिया) से क्यों ख़फ़ा रहें,
...चर्ख (आसमान) से क्यों ग़िला करें
सारा जहां अदु (दुश्मन) सही, आओ मुक़ाबला करें.
 
salute to all shaheeds!!!!


mujhe tod lena ban mali..

us path pe dena tum phenk

matr bhoomi per sheesh chadhane jiss path jaawe veer anek

 
भगत सिंह का अंतिम पत्र

अमर शहीदों को प्रणाम .. "इंकलाब जिंदाबाद"

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भगत सिंह का अंतिम पत्र

22 मार्च,1931
साथियो,
स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छिपाना नहीं चाहता. लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूँ, कि मैं क़ैद होकर या पाबंद होकर जीना नहीं चाहता.

मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है और क्रांतिकारी दल के आदर्शों और कुर्बानियों ने मुझे बहुत ऊँचा उठा दिया है - इतना ऊँचा कि जीवित रहने की स्थिति में इससे ऊँचा मैं हर्गिज़ नहीं हो सकता.

आज मेरी कमज़ोरियाँ जनता के सामने नहीं हैं. अगर मैं फाँसी से बच गया तो वो ज़ाहिर हो जाएँगी और क्रांति का प्रतीक-चिन्ह मद्धिम पड़ जाएगा या संभवतः मिट ही जाए. लेकिन दिलेराना ढंग से हँसते-हँसते मेरे फाँसी चढ़ने की सूरत में हिंदुस्तानी माताएँ अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरज़ू किया करेंगी और देश की आज़ादी के लिए कुर्बानी देनेवालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी.

हाँ, एक विचार आज भी मेरे मन में आता है कि देश और मानवता के लिए जो कुछ करने की हसरतें मेरे दिल में थी, उनका हजारवाँ भाग भी पूरा नहीं कर सका. अगर स्वतंत्र, ज़िंदा रह सकता तब शायद इन्हें पूरा करने का अवसर मिलता और मैं अपनी हसरतें पूरी कर सकता.

इसके सिवाय मेरे मन में कभी कोई लालच फाँसी से बचे रहने का नहीं आया. मुझसे अधिक सौभाग्यशाली कौन होगा? आजकल मुझे ख़ुद पर बहुत गर्व है. अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतज़ार है. कामना है कि यह और नज़दीक हो जाए.

आपका साथी,
भगत सिंह
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Vah tha mard jo us vedi par khada raha vah tha singh jo antim kshan tak ada raha hanste hanste usne fande ko chum liya 23 ki umar main hi vo banka fande pe jhool gaya Bhagat singh tumhain naman hai shat shat tum sanskriti ke charit mahaan unnat kiya maa ka mastak dekar balidaan tumhara sada rahe dinmaan. rang de basanti
 
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