सावन में तीज का त्योहार मनाया जाता है। इसे हरियाली तीज भी कहा जाता है। हरापन समृद्धि का प्रतीक है। स्त्रियाँ हरे परिधान और हरी चूड़ियाँ पहनती हैं। हरे पत्तों और लताओं से झूलों को सजाया जाता है। झूले और कजरी के बिना सावन की कल्पना नहीं की जा सकती। हमारे यहाँ हर त्योहार के पीछे कोई न कोई सामाजिक या वैज्ञानिक कारण होता है। इसी माहौल के संदर्भ में श्री देवमणि पाण्डेय की सावन के मौसम के कुछ गीत यहाँ छाप रही हूँ [font="], [/font]आशा है आप सभी को पसंद आयेंगे
उमड़-घुमड़ आए कारे-कारे बदरा[font="][/font]
प्यार भरे नैनों में मुस्काया कजरा[font="][/font]
बरखा की रिमझिम जिया ललचाए[font="][/font]
भीग गया तनमन भीग गया अँचरा[font="][/font]
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सजनी आंख मिचौली खेले बांध दुपट्टा झीना[font="][/font]
महीना सावन का[font="][/font]
बिन सजना नहीं जीना महीना सावन का[font="][/font]
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मौसम ने ली है अंगड़ाई[font="][/font]
चुनरी उड़ि उड़ि जाए[font="][/font]
बैरी बदरा गरजे बरसे[font="][/font]
बिजुरी होश उड़ाए[font="][/font]
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घर-आंगन[font="], [/font]गलियां चौबारा आए चैन कहीं ना[font="][/font]
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खेतों में फ़सलें लहराईं[font="][/font]
बाग़ में पड़ गये झूले[font="][/font]
लम्बी पेंग भरी गोरी ने[font="][/font]
तन खाए हिचकोले[font="][/font]
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पुरवा संग मन डोले जैसे लहरों बीच सफ़ीना[font="][/font]
बारिश ने जब मुखड़ा चूमा[font="][/font]
महक उठी पुरवाई[font="][/font]
मन की चोरी पकड़ी गई तो[font="][/font]
धानी चुनर शरमाई[font="][/font]
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छुई मुई बन गई अचानक चंचंल शोख़ हसीना[font="][/font]
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कजरी गाएं सखियां सारी[font="][/font]
मन की पीर बढ़ाएं[font="][/font]
बूंदें लगती बान के जैसे[font="][/font]
गोरा बदन जलाएं[font="][/font]
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अब के जो ना आए संवरिया ज़हर पड़ेगा पीना[font="] [/font][font="][/font]
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उमड़-घुमड़ आए कारे-कारे बदरा[font="][/font]
प्यार भरे नैनों में मुस्काया कजरा[font="][/font]
बरखा की रिमझिम जिया ललचाए[font="][/font]
भीग गया तनमन भीग गया अँचरा[font="][/font]
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सजनी आंख मिचौली खेले बांध दुपट्टा झीना[font="][/font]
महीना सावन का[font="][/font]
बिन सजना नहीं जीना महीना सावन का[font="][/font]
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मौसम ने ली है अंगड़ाई[font="][/font]
चुनरी उड़ि उड़ि जाए[font="][/font]
बैरी बदरा गरजे बरसे[font="][/font]
बिजुरी होश उड़ाए[font="][/font]
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घर-आंगन[font="], [/font]गलियां चौबारा आए चैन कहीं ना[font="][/font]
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खेतों में फ़सलें लहराईं[font="][/font]
बाग़ में पड़ गये झूले[font="][/font]
लम्बी पेंग भरी गोरी ने[font="][/font]
तन खाए हिचकोले[font="][/font]
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पुरवा संग मन डोले जैसे लहरों बीच सफ़ीना[font="][/font]
बारिश ने जब मुखड़ा चूमा[font="][/font]
महक उठी पुरवाई[font="][/font]
मन की चोरी पकड़ी गई तो[font="][/font]
धानी चुनर शरमाई[font="][/font]
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छुई मुई बन गई अचानक चंचंल शोख़ हसीना[font="][/font]
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कजरी गाएं सखियां सारी[font="][/font]
मन की पीर बढ़ाएं[font="][/font]
बूंदें लगती बान के जैसे[font="][/font]
गोरा बदन जलाएं[font="][/font]
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अब के जो ना आए संवरिया ज़हर पड़ेगा पीना[font="] [/font][font="][/font]
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