Shayari (Part 2)

हम सहने-गुलिस्ताँ में अक्सर, यह बात भी सोचा करते हैं,यह आंसू है किन आंखों के फूलों पे जो बरसा करते हैं।
 
आस्तीन थी कभीठिकाना ज़हरीले सांप की
पहन घूमता हूँ कमीज़ तभीसे बिन बांह की.
 
वक़्त है बदला ओर बदली सी कहानी है,
संग मेरे गुजरे पालो की यादे पुरानी है |

न लगा अब तू मेरे जख्मो पे मरहम,
मेरे पास उसकी बस यही तो निशानी है |
 
सिगरेट नहीं पीता...................पर हर आने जाने वाले से माचिस पूछ लेता हूँ बहुत कुछ है अन्दर जिसे जला देना चाहता हूँ -गुलजार-
 
दो मशहूर शायरों के अपने-अपने अंदाज़ ...

पहले मिर्ज़ा गालिब :

"उड़ने दे इन परिंदों को
आज़ाद फिजां में 'गालिब'
जो तेरे अपने होंगे
वो लौट आएँगे..."

शायर इकबाल का उत्तर -

"ना रख उम्मीद-ए-वफ़ा
किसी परिंदे से ...
जब पर निकल आते हैं ...
तो अपने भी
आशियाना भूल जाते हैं..."
 
।। कहते है पीनेवाले मर जाते है जवानी में ।। ।। हमने तो बुजुर्गों को जवान होते देखा है मैखाने में ।।
 
गीता के मंत्र से अंजान हो गएग्रंथ हमारे अब शिर्डी से मिले ग्यान हो गयेशर्म आती है मुझे ऐसे हिंदुत्व परजिसमें निर्मल और साई भी भगवान हो गए.
 
स्याही थोड़ी कम पड़ गई, अन्यथा भाग्य तो अपना भी बड़ा सुन्दर लिखा गया था।
 
ये ज़मीन की फितरत है की हर चीज़ को सोख़ लेती है , वर्ना इन आँखों से गिरने वाले आसुओं का एक अलग समुंदर होता ||
 
ग़लतफ़हमियों के सिलसिले इस कदर फैले हैं,
कि हर ईंट सोचती है, दीवार उसी से है.
 
कमा के इतनी दौलत भी में अपनी माँ को ना दे पाया, कि जितने सिक्कों से माँ मेरी नजर उतारा करती थी ..... !
 
ग़लतफ़हमियों के सिलसिले इस कदर फैले हैं,
कि हर ईंट सोचती है, दीवार उसी से है.
Behtareen

कमा के इतनी दौलत भी में अपनी माँ को ना दे पाया, कि जितने सिक्कों से माँ मेरी नजर उतारा करती थी ..... !
Dil jeet lia....
 
“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”
 
था मैं नींद में और
मुझे इतना
सजाया जा रहा था....
.
बड़े प्यार से
मुझे नहलाया जा रहा
था....
.
ना जाने
था वो कौन सा अजब खेल
मेरे घर
में....
.
बच्चो की तरह मुझे
कंधे पर उठाया जा रहा
था....
.
था पास मेरा हर अपना
उस
वक़्त....
.
फिर भी मैं हर किसी के
मन
से
भुलाया जा रहा था...
.
जो कभी देखते
भी न थे मोहब्बत की
निगाहों
से....
.
उनके दिल से भी प्यार मुझ
पर
लुटाया जा रहा था...
.
मालूम नही क्यों
हैरान था हर कोई मुझे
सोते
हुए
देख कर....
.
जोर-जोर से रोकर मुझे
जगाया जा रहा था...
.
काँप उठी
मेरी रूह वो मंज़र
देख
कर....
.
जहाँ मुझे हमेशा के
लिए
सुलाया जा रहा था....
.
मोहब्बत की
इन्तहा थी जिन दिलो में
मेरे
लिए....
.
उन्ही दिलो से आज मैं,एक
पल
में दूर जा रहा
था...!!!
 
मुझे कुछ अफ़सोस नहीं के मेरे पास सब कुछ होना चाहिए था |
मै उस वक़्त भी मुस्कुराता था जब मुझे रोना चाहिए था ||
 
Back
Top