Shayari (Part 2)

हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली।कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली।सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ।वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली
 
मिली थी जिन्दगी, किसी के काम आने के लिए...
पर वक्त बीत रहा है , कागज के टुकड़े कमाने के लिए !
 
जिन्दगीं का फलसफा भी कितना अजीब हैं। शामें कटतीं नहीं, और साल गुजरतें जा रहें हैं।
 
Is bheed bhari duniya me ye naya jamana tha,
sab fase janjal me sabko paisa kamana tha,
Meri zindagi ka itna hi falsaffa raha
Meri ijjat hi mera mehnatana tha,

#pc
 
उस कुल्हाड़ी के लोहे में,
उसी लकड़ी की शाखाओं का एक टुकड़ा पिरोया था,
एक दिन पेड़ जब कटने लगा, वह बेबस बहुत रोया था।
 
किसी कवि ने मौत को क्या खूब कहा है:-


जिंदगी मे २ मिनट कोई मेरे पास ना बैठा, आज सब मेरे पास बैठे जा रहे थे,
कोई तोहफा ना मिला आज तक, और आज फूल ही फूल दिये जा रहे थे,
तरस गये थे हम किसी एक हाथ के लिये, और आज कंधे पे कंधे दिये जा रहे थे,
दो कदम साथ ना चलने को तैयार था कोई, और आज काफिला बन साथ चले जा रहे थे,
आज पता चला मुझे कि "मौत" कितनी हसीन होती है, कम्बख्त हम तो यूँ जीवन जिये जा रहे थे।
 
ठोकर ना लगा मुझे पत्थर नही हूँ मै,
हैरत से ना देख कोई मंज़र नही हूँ मै,
तेरी नज़र में मेरी कदर कुछ भी नही,
मगर उसे पूछो जिसे हासिल नही हूँ मै..
 
न किसी के अभाव में जियो, न किसी के प्रभाव में जियो|
ये ज़िंदगी है आपकी, तो इसे अपने स्वभाव में जियो ||
 
जब तुम छोटे थे, ज़ोर ज़ोर से रोते थे, जो पसंद है उसे पाने को|
अब तुम बड़े हो, चुपके से रोते हो, जो पसंद है उसे भुलाने को||

 
जिंदगी की उलझनें, हमारी शरारतें कम कर देती है |
और लोग समझने लगते है कि हम समझदार हो गए||
 
Ke baat chhore :).... kisne safai de di.... :)
If you are supporting BJP doesn't mean you are fighting an election :P Likewise no point in infering anything which is suppose to be a timepass activity to lighten one's mood. :P
Duniya mehkhane me peeti hai to sharab ka kusoor hai,
likh di do line yahan kya yahi mera kusoor hai. :)
 
टूटे मक़ान वाला , दिल में ताजमहल रखता हूँ ।


बात गहरी मगर अल्फ़ाज़ सरल रखता हूँ ।
 
बड़े चुपके से भेजा था उन्होंने गुलाब हमारे लिये,
पर कमबख्त खूशबू ने सारेशहर में हंगामा मचा दिया।।
 
Back
Top