Shayari !!.....

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it was your own ?

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है ,

ना मा, बाप, बहन , ना यहा कोई भाई है .

हर लडकी का है Boy Friend, हर लडके ने Girl Friend पायी है ,

चंद दिनो के है ये रिश्ते , फिर वही रुसवायी है .



घर जाना Home Sickness कहलाता है ,

पर Girl Friend से मिलने को टाईम रोज मिल जाता है .

दो दिन से नही पुछा मां की तबीयत का हाल ,

Girl Friend से पल - पल की खबर पायी है,

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है …..



कभी खुली हवा मे घुमते थे ,

अब AC की आदत लगायी है .

धुप हमसे सहन नही होती ,

हर कोई देता यही दुहाई है .



मेहनत के काम हम करते नही ,

इसीलिये Gym जाने की नौबत आयी है .

McDonalds, PizaaHut जाने लगे,

दाल- रोटी तो मुश्कील से खायी है .

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है …..



Work Relation हमने बडाये ,

पर दोस्तो की संख्या घटायी है .

Professional ने की है तरक्की ,

Social ने मुंह की खायी है.

जिन्दगी ये किस मोड पे ले आयी है


this is your own poem ? can u write on any subject given to u ? it was cool , really cool :)
 
Wo aaye meri zindagi mein kahani ban kar,
Is dil mein rahe pyar ki nishaani ban kar,
Aksar jinhey hum jagah dete hai is dil mein,
wo aankho se nikal jaate hai paani ban kar...
 
Jeena chahte hain magar zindagi raas nahi aati,
Marna chahte hain magar maut paas nahi aati,
Bahut udas hain hum is zindagi se,
Unki yaadein bhi to tadpane se baaz nahi aati...!!
 
jis din tjhy paa lene ki chahat nai hoti,
us din hamai apni bhi zarorat nai hoti

har shaks ki taqdeer mei milna nai hota
har shaks ki kismat mei mohabbat nai hoti

har shaks ki batain utarti nai dil mei,,,,,
har shaks ko alfaz pa qudrat nai hoti

jb tak mere pehlu mei wo betha rhy usko
chunee ki hawaon ko bhi jurrat nai hoti

har shaks ko marne ki tammana nai hoti,
har shaks ko jeene ki zarorat nai hoti! :(:(:(:(:(
 
Pain of life

Khwabon ki ek duniya main
Ek murat rachi thi
Nashili aakhen madhosh kardene wali
Wo katil hasi dekhi thi
Chand sa chera laherati zulfe
Wo is daard-e-dil ke dawa thi
 
आज फिर उदास है जिंदगी???

आज फिर उदास है जिंदगी
ए जिंदगी तू क्या रंग लाएगी
समझ न पाया कोई
तू क्या मुझे समझ पाएगी
दर्द दिया है इस सिने में
क्यो तूने है मुझे रुलाया
इंतेज़्ज़र है जिसका मुझे
उनसे क्यो तूने मुझे न मिलाया
मिल भी गये गर कभी
तो क्या अंजाम देगी तू, ए जिंदगी
टूटे दिल को तूने मारना भी न सिखाया
 
....................

Waqt Ki Raftaar Ruk Gayi Hoti
Sharm say aankh jhuk gayi hoti
agar dard jaanti shama parwaney ka
Jalney say pehley he bujh gayi hoti :rock:rock:rock:rock
 
...............................

जाने ये मेरा भरम है या तेरी नफरत की छाया है,
इस दुनिया की भीड़ में बस खुद को ही तन्हा पाया है,

जब भी खुद को तेरे ख्यालों में गुम पाया है,
मुझे वक़्त बिलखता सा नज़र आया है,

बिताये तो थे तेरे संग सिर्फ ज़िन्दगी के चार पल,
फिर भी उन्ही लम्हो में आज तक खुद को अलापते पाया है,

जानता हूँ मेरा गुनाह न था, मोहब्बत का दौर लौट कर ना आएगा,
फिर भी हर वक़्त खुद को तेरी नफरत में सुलगता पाया है,
 
Faiz Ahmed Faiz saahab kee ek bahot hee achchhee kalaam

ab ke yooN dil ko sazaa di hum ne
uski har baat bhulaa di hum ne

ek ek phool bahot yaad aayaa
shaakhN-e-gul jab woh jalaa di hum ne

aaj tak jis pe woh sharmaate hai
baat woh kab kii bhulaa di hum ne

shahar-e-jahaaN raakh se adaab huwaa
aag jab dil kee buzaa di hum ne

aaj phir yaad bahot aayaa woh
aaj phir usko duaa di hum ne

koii to baat hai usmeN "Faiz"
har khushee jis pe luTaa di hum ne
 
Soch ko badlo, sitare badal jayenge,
Najar ko badlo, nazare badal jayenge,
Kashtiya badalne ki jarurat nahi,
Dishaon ko badlo, KINARE badal jayenge.
 
आँखों मैं बसा लो इन नज़रों को
शायद कल इस से हंसी नज़ारा ना हो |
रूठा ना करना अपनों से तुम
शायद कल कोई जीने का सहारा ना हो |
दूर मत निकलना कश्ती लेके
शायद दूर तक कोई किनारा ना हो |
भूल ना जाना किसी की मासूमियत को
शायद उससे कोई प्यारा ना हो |
 
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे

घर सजाने का तस्सवुर तो बहुत बाद का है
पहले ये तय हो कि इस घर को बचायें कैसे

क़हक़हा आँख का बरताव बदल देता है
हँसनेवाले तुझे आँसू नज़र आयें कैसे

कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा
एक क़तरे को समुन्दर नज़र आयें कैसे
 
ना में रोशनी हूँ चाँद की
ना चमकता हुआ आफताब हूँ
ना टिमटिमाता हुआ जुगनू हूँ मैं
ना जलता हुआ चिराग हूँ
ना जलजला हूँ मैं तूफानों का
ना उमड़ता हुआ शैलाब हूँ
ना मैं झोंका हूँ हवावों का
ना महकता हुआ बाग़ हूँ
मैं जीता हूँ बनके हकीकत
ना कोई झूठा ख्वाब हूँ
कोई भी पढ़ ले पन्ना मेरी जिंदगी का
कियोंकि मैं एक खुली हुई किताब हूँ i
 
wah ji wah bhut badia ji
आँखों मैं बसा लो इन नज़रों को
शायद कल इस से हंसी नज़ारा ना हो |
रूठा ना करना अपनों से तुम
शायद कल कोई जीने का सहारा ना हो |
दूर मत निकलना कश्ती लेके
शायद दूर तक कोई किनारा ना हो |
भूल ना जाना किसी की मासूमियत को
शायद उससे कोई प्यारा ना हो |
 
कही सुनी पे बहुत एतबार करने लगे
मेरे ही लोग मुझे संगसार करने लगे

पुराने लोगों के दिल भी हैं ख़ुशबुओं की तरह
ज़रा किसी से मिले, एतबार करने लगे

नए ज़माने से आँखें नहीं मिला पाये
तो लोग गुज़रे ज़माने से प्यार करने लगे

कोई इशारा, दिलासा न कोई वादा मगर
जब आई शाम तेरा इंतज़ार करने लगे

हमारी सादामिजाज़ी की दाद दे कि तुझे
बगैर परखे तेरा एतबार करने लगे.
 
दिल मैं हम बस जाएँगे,
तमन्ना हो अगर मिलने की,
तो बंद आँखों मैं नज़र आएँगे.
लम्हा लम्हा वक़्त गुज़ेर जाएँगा,
चँद लम्हो मैं दामन छूट जाएगा,
आज वक़्त है दो बातें कर लो हमसे,
कल क्या पता कौन आपके ज़िंदगी मैं आ जाएगा.
पास आकर सभी दूर चले जाते हैं,
हम अकेले थे अकेले ही रेह जाते हैं,
दिल का दर्द किससे दिखाए,
मरहम लगाने वेल ही ज़ख़्म दे जाते हैं,
वक़्त तो हूमें भुला चुका है,
मुक़द्दर भी ना भुला दे,
दोस्ती दिल से हम इसीलिए नहीं करते,
क्यू के डरते हैं,कोई फिर से ना रुला दे,
ज़िंदगी मैं हमेशा नये लोग मिलेंगे,
कहीं ज़ियादा तो कहीं काम मिलेंगे,
ऐतबार ज़रा सोच कर करना,
मुमकिन नही हैर जगह तुम्हे हम मिलेंगे.
ख़ुशबो की तरह आपके पास बिखर जाएँगे,
सुकों बन कर दिल मे उतर जाएँगे,
मेहसूस करने की कोशिश तो कीजिए,
दूर होते हो भी पास नेज़र आएँगे
कही सुनी पे बहुत एतबार करने लगे
मेरे ही लोग मुझे संगसार करने लगे

पुराने लोगों के दिल भी हैं ख़ुशबुओं की तरह
ज़रा किसी से मिले, एतबार करने लगे

नए ज़माने से आँखें नहीं मिला पाये
तो लोग गुज़रे ज़माने से प्यार करने लगे

कोई इशारा, दिलासा न कोई वादा मगर
जब आई शाम तेरा इंतज़ार करने लगे

हमारी सादामिजाज़ी की दाद दे कि तुझे
बगैर परखे तेरा एतबार करने लगे.
 
कागज के निकले सारे
पल चाहत के ,
कागज के निकले सारे
उड़ गए सब जाने कहाँ रे
पल चाहत के,
कैसे बतलाऊं ये मंज़र
कुछ टूट गया मेरे अन्दर
बिन आहट के ,
एहसास जागाये तुने जिस दिल में
फिर तोडा वही दिल कैसे तुने
अब तुही आके बोल
गांठे सारी खोल i
 
तुम मेरी याद हो मेरे पास आओ तो कोई बात बने
तुम मेरी जान हो यूँ ज़िंदगी में आओ तो कोई बात बने

तुम्हारी याद में गुज़रा हर लमहा मेरे दिन को महकता है
खुशबू बनके मेरी सांसों को महकाओ तो कोई बात बने

मैं दुनिया की नही करता परवाह तुमको जब याद करता हूँ
कभी तुम भी रुसवायियों को गले से लगाओ तो कोई बात बने


दुश्मनों को तुम्हारे बारे मे यूँ बताना अच्छा नही लगता
कभी ख़ुद भी आओ मेरे हाल पे हंस जाओ तो कोई बात बने

कभी रूठा नही हूँ तुमसे मैं इस तरह से की
मैं तुमसे रूठ जाऊं और तुम मुझको मनाओ तो कोई बात बने

हमेशा खुदा से ही तुमको माँगा है शाम और सुबह
दुआ को हाथ उठाएं और सामने तुम्हे पाएं तो कोई बात बने

तेरी चाह रुकती नही है और याद का दरिया बह जाता है
कभी तुम भी इसमे डूब जाओ तो कोई बात बने
 
bhut hi accha likka hai aapne amrita jiiiiiii
कागज के निकले सारे
पल चाहत के ,
कागज के निकले सारे
उड़ गए सब जाने कहाँ रे
पल चाहत के,
कैसे बतलाऊं ये मंज़र
कुछ टूट गया मेरे अन्दर
बिन आहट के ,
एहसास जागाये तुने जिस दिल में
फिर तोडा वही दिल कैसे तुने
अब तुही आके बोल
गांठे सारी खोल i
 
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