Shayri (Continued)

मैं जज्बाता के दलदल में धंसता जा रह्या सूं
कहणा तो बहुत कुछ सै पर कह नही पा रह्या सूं

तू दिल पै अपणे हाथ धर के खुद तै जवाब दे
मैं जिकरा बार-बार किन बातां का ठा रह्या सूं

कोए और स्यामी होता तो कर लेता फैंसला
मुद्दत तै मैं तो अपणे आप तै टकरा रह्या सूं

तैने दर्द किते दिखे सै तो मलहम बणके लाग
ना तो फेर महफ़िल में मैं खूब मुस्कुरा रह्या सूं

ध्यान तै फूंक मारिये मेरे जख्मा पै बेचैन
मैं पह्ल्या ए दही के भ्रम में कपास खा रह्या सूं

Gajab kavita....... jamaa chala ker rakhya se...
 
ज़माने में अजी ऐसे कई नादान होते हैं.
वहाँ ले जाते हैं कश्ती जहाँ तूफ़ान होते है.
 
फासले ऐसे भी होंगे कभी सोचा ना था |
सामने बैठा था मेरे और वो मेरा ना था
||
 
Last edited:
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ |
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ ||

 
ख़याल कीजिये क्या काम आज मैं ने किया|
जब उसने दी मुझे गाली सलाम मैं ने किया|

कहा ये सब्र ने दिल से के लो ख़ुदाहाफ़ीज़,
के हक़-ए-बंदगी अपना तमाम मैं ने किया|
 
ख़याल कीजिये क्या काम आज मैं ने किया|
जब उसने दी मुझे गाली सलाम मैं ने किया|

कहा ये सब्र ने दिल से के लो ख़ुदाहाफ़ीज़,
के हक़-ए-बंदगी अपना तमाम मैं ने किया|
Too Good ...
 
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊँ |
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ ||



Siwach bhai, is taage ki sabte badhiya shayri lagi ye! :)
 
जिनको जाना था यहाँ पढ़ने को स्कूल,
जूतों पर पालिश करें वे भविष्य के फूल.
 
मैने ये कब कहा कि मेरे हक में हो जवाब
लेकिन खामोश क्यूँ है तू, कोई फैसला तो दे |

बरसों मैं तेरे नाम पे खाता रहा फरेब
मेरे खुदा कहाँ है तू, अपना पता तो दे |

बेशक मेरे नसीब पे रख अपना इख्तियार
लेकिन मेरे नसीब में क्या है, बता तो दे |
 
मैने ये कब कहा कि मेरे हक में हो जवाब लेकिन खामोश क्यूँ है तू, कोई फैसला तो दे | बरसों मैं तेरे नाम पे खाता रहा फरेब मेरे खुदा कहाँ है तू, अपना पता तो दे | बेशक मेरे नसीब पे रख अपना इख्तियार लेकिन मेरे नसीब में क्या है, बता तो दे |
wah bhaii wah .. tusii te chaaa gaye ..
 
उदासी जब तुम पर बीतेगी तो तुम भी जान जाओगे
कोई नज़र अंदाज करता है तो कितना दर्द होता है ||
 
हंसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े |
इतना हंसों की आंखों से आंसू निकल पड़े ||
 
Tanhai kisi ka intezar nahi karti,
Kismat kabhi bewafai nahi karti,
Yeh to sab samay samay ka khel hai,
Varna Parchai kabhi jism par waar nahi karti…
 
आज़ एक फोटू देख्या था फेस-बुक पै जिस्मै एक सुन्दर सी महिला बाग़ मै फूलां कै धोरै बैठी थी i उसनै देख के मैंने थोड़ी तुकबंदी करी थी i तावले तावले नै 15 -20 मिनट मै ए कर दी थी, इसलिये घणी गलती ना काढियो i

गुलों की तारीफ करें या करें वाहवाही हुश्ने-लाज़वाब की
बैठी है चमन में माहज़बीं बन के ताबीर किसी के खवाब की i
बहारों का आगाज़ होता है तो दिलों में रंग भर जाता है
उनका यों सज-धज कर बैठना रूह को बेचैन कर जाता है
हसीनों की तारीफ करना मर्दों का पुराना अंदाज़ है
मगर इश्क नहीं आसाँ इतना ये तो काँटों का ताज़ है
सैंडल जो पड़ जायेगा इस नाजनीं का तो नशा काफूर हो जायेगा
शौहर के हत्थे गर चढ़ गए तो बांकपन चकनाचूर हो जायेगा i
 
आज़ एक फोटू देख्या था फेस-बुक पै जिस्मै एक सुन्दर सी महिला बाग़ मै फूलां कै धोरै बैठी थी i उसनै देख के मैंने थोड़ी तुकबंदी करी थी i तावले तावले नै 15 -20 मिनट मै ए कर दी थी, इसलिये घणी गलती ना काढियो i

गुलों की तारीफ करें या करें वाहवाही हुश्ने-लाज़वाब की
बैठी है चमन में माहज़बीं बन के ताबीर किसी के खवाब की i
बहारों का आगाज़ होता है तो दिलों में रंग भर जाता है
उनका यों सज-धज कर बैठना रूह को बेचैन कर जाता है
हसीनों की तारीफ करना मर्दों का पुराना अंदाज़ है
मगर इश्क नहीं आसाँ इतना ये तो काँटों का ताज़ है
सैंडल जो पड़ जायेगा इस नाजनीं का तो नशा काफूर हो जायेगा
शौहर के हत्थे गर चढ़ गए तो बांकपन चकनाचूर हो जायेगा i

Vpji, dont be modest it is really good.
 
वो इक शब जली तो उसे श़मा कह दिया फ़राज़ !
हम बरसों से जल रहे है, कोई तो खिताब दो !!
 
समय व्यतीत हो गया तो लोग भुला देते हैं ,
बिना कारण अपनों को भी रुला देते हैं,
जो दीपक रात भर प्रकाश देता है,
भोर होते ही उसे भी बुझा देते हैं।
 
[h=5]हर कोई दिल की हथेली पे है सेहरा रखे
किस को सैराब करे वो, किसे प्यासा रखे

[/h]
 
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