sandeepsirohi
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रिवाज तो यही है दुनिया का मिलना और बिछड़ जाना |
तुम से ये कैसा रिश्ता है ना मिलते हो ना बिछड़ते हो ||
तुम से ये कैसा रिश्ता है ना मिलते हो ना बिछड़ते हो ||
teri aawaz aaj bhi mere kano mein gunjakarti hai
wo tera ek baar ka kehna ki "tum sirf mere ho"
"तुम सिर्फ मेरे हो" यह हुश्न का तकिया कलाम होता है,
दिल बहलाने के लिए ग़ालिब ख्याल अच्छा है वर्ना,
दिल के कागज़ पर लिखा, किसी फ़िल्मी हीरो का नाम होता है i
बेवफाई के इस दौर में, सच्चा इश्क़ ढूंढते हो कहाँ,
मोहब्बत है तिज़ारत और हर जज्बा नीलाम होता है i
बिक जाते हैं लब यहाँ, दौलतमंद ले जाते हैं i
सच्चे आशिक फिर बादा-ए-सागर से दिल बहलाते हैं
Glossary
बादा-ए-सागर : दारू का गिलास
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