Shayri (Continued)

वो अधनंगा बच्चा ठीक उसी दूकान के बाहर खड़ा था.....!
....चमचमाते नए कपड़े जहां पुतलों ने पहन रखे थे.....!!

Beautiful,

Naked social reality depicted in a few words.
 
उससे कहो एक बार और देख कर आज़ाद कर दे मुझे.....
की मैं आज भी उसकी पहली नज़र की कैद में हूँ
 
जाते वक्त उसने बड़े गरूर से कहा था तुझ जैसे लाखों मिलेंगे"
मैंने मुस्कुरा कर पूछा मुझ जैसे कि ही तलाश क्यूँ"
 
सो गए बच्चे गरीब के ये सुन कर....... फरिश्ते आते हैं खवाबों में रोटियां ले कर.
 
बहुत तंग आ गया हूँ. तेरी नौकरी करते करते..ए ज़िन्दगी….
मुनासिब होगा… तू मेरा हिसाब कर दे
 
डूबता है तो पानी को दोष देता है,


गिरता है तो पत्थर को दोष देता है,


मनुष्य भी बड़ा विचित्र है,


कुछ कर नहीं पाता है तो,


भाग्य को दोष देता है।
 
डूबता है तो पानी को दोष देता है,


गिरता है तो पत्थर को दोष देता है,


मनुष्य भी बड़ा विचित्र है,


कुछ कर नहीं पाता है तो,


भाग्य को दोष देता है।

Realistic satire on the MAN !
 
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