Shayri (Continued)

मुलाकाते जरुरी हैं अगर रिश्ते निभाने हैं.....
वर्ना लगा कर भूलने से तो पेड़ भी सुख जाते हैं...
 
कुछ हसरतें कभी पूरी नही हुआ करती…
पर गुमान रखने मैं क्या जाता है......
 
Log to poojte h apne hatho k bane khuda ko,
Humne khuda k hatho bane insan ko chaha to hum gunhgar ho gaye

Usne milne ki bhi ajeeb shart rakhi..
Chale aao sukhe patoo par lekin aawaz na ho
 
ठोकर ना लगा मुझे पत्थर नही हु मै |
हैरत से ना देख कोई मंज़र नहीं हु मै ||

उनकी नज़र में मेरी कदर कुछ भी नही |
मगर उनसे पूछो जिन्हें हासिल नही हु मै ||
 
"जो भी आता है बताता है नया कोई इलाज
बट न जाये तेरा बीमार मसीहाओं में
"
 
Ajab Hunar hai mere Haathon me Sher-o-Shayari likhne ka….
Main apni Barbadiyan likhta hun or Logg Wah Wah karte hain..
 
किताबे-शौक़ में क्या-क्या निशानियाँ रख दीं
कहीं पे फूल, कहीं हमने तितलियाँ रख दीं।

कभी मिलेंगी जो तनहाइयाँ तो पढ़ लेंगे
छुपाके हमने कुछ ऐसी कहानियाँ रख दीं।

यही कि हाथ हमारे भी हो गए ज़ख़्मी
गुलों के शौक में काँटों पे उंगलियाँ रख दीं।

बताओ मरियम औ' सीता की बेटियों की कसम
ये किसने आग के शोलों में लड़कियाँ रख दीं।

कोई लकीर तुम्हारी तरफ़ नहीं जाती
तुम्हारे सामने हमने हथेलियाँ रख दीं।
 
कुछ यूँ हुआ कि जब भी जरुरत पड़ी मुझे !
हर शख्स इतेफाक से मजबूर हो गया !!
ye mehaj itefaak nhi ki har koi majboor najar aata hai,
Jarurat sabko padti h par har koi ekduje ke kam nhi aata
 
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