Shayri (Continued)

अंगुलिया टूट गई,
पत्थर तराशते तराशते,
जब बनी सूरत यार की,
तो खरीददार आ गये।
 
तू पास भी हो तो दिल बेक़रार अपना है;
कि हमको तेरा नहीं, इंतज़ार अपना है।
 
मेरे गम ने होश उनके भी खो दिए |
वो समझाते-२ खुद ही रो दिए ||
 
न डालो बोझ ज़हनों पर कि बचपन टूट जाते हैं |
सिरे नाज़ुक हैं बंधन के जो अक्सर छूट जाते हैं ||

न रख रिश्तों की बुनियादों में कोई झूट का पत्थर |
लहर जब तेज़ आती है, घरौंदे टूट जाते हैं ||
 
आस्था का जिस्म घायल रूह तक बेज़ार है |
क्या करे कोई दुआ जब देवता बीमार है ||

भूख से बेहाल बच्चों को सुना कर चुटकुले |
जो हंसा दे, आज का सबसे बड़ा फनकार है ||

खूबसूरत जिस्म हो या सौ टका ईमान हो |
बेचने की ठान लो तो हर तरफ बाज़ार है ||
 
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ख्वाहिशों को जाने किसका इंतजार रहा .. एक सुनहरा दिन शाम में ढलता गया..
 
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निकलूंगा तेरी गली से अब गधे लेकर
तेरे नखरों का बोझ अब उठाया नहीं जाता

Real Jattu sher... eik hi sher 100 ke barabbar.. wah wah..

RK^2
 
लौट जाती है दुनिया गम हमारा देख कर,


जैसे लौट जाती हैं लहरें किनारा देख कर,


तू कन्धा ना देना मेरी अर्थी को ए मित्र,


कहीं फिर ना जीवित ना हो जाऊँ तुम्हारा सहारा देखकर ।
 
मुझे कुछ अफ़सोस नहीं कि मेरे पास सब कुछ होना चाहिए था,
मै उस समय भी मुस्कुराता था जब मुझे रोना चाहिए था।
 
कभी कभार हर एक के जीवन में ऐसे पल भी आ जाते है.
कुछ हसीन ख्वाब आँखों में आकर एक नया दर्द दे जाते है
...
 
तक़दीर से तू क्यों है खफा,ऐ दोस्त तू करले तू अपने कर्मों से बफा।
तेरे कर्म ही है तेरी रजा,होके कर्मों का मोहताज,क्यों बो रहा है सजा...
 
कमाया पैसा तो बहुत, किसी गाव-घर वाले काम ना आये तो किस काम का।
बेटे तो है बहुत, पर जो जरूरत पर गाँव ना आऐ, तो वो बेटा किस काम के। ………
फ्लैट तो उसने खरीदे बहुत, अलविदा पे दो गज जमीन भी ना तो किस काम के। …………
पात्रता निभाता जा अपनी गर इंसान ना बन सका तो किस काम का।.........
जिस जमीन पर पैदा हुआ, वहाँ पर न सेवा कर सका तो किस काम का।
 
हर रिश्ते में विश्वास रहने दो |
जुबान पर हर वक़्त मिठास रहने दो ||

यही तो अंदाज़ है जिंदगी जीने का |
न खुद रहो उदास, न दूसरों को रहने दो ||
 
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