Shayri (Continued)

मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना,
मैं खुद हो जाऊंग बदनाम ,पहले नाम तो होने दो ।।
 
मैं "किसी से" बेहतर करुं
क्या फर्क पड़ता है!
मै "किसी का" बेहतर करूं
बहुत फर्क पड़ता है!
 
तुम रूठे तो फूल मुरझा गये,
कहाँ हो प्रिये अब तो आ जाओ।।
पाने को स्पर्श तुम्हारा इन्तजार में है साँकल,
द्वार तो मेरा खटखटा जाओ।।
- मनमोहन बाराकोटी "तमाचा लखनवी"
 
खाक मुझ में कोई कमाल रखा है,
मेरे दाता, मेरे भोले नाथ मुझे तो तूने संभाल रखा है...
मेरे ऐबों पे डाल के पर्दा,मुझे अच्छों में डाल रखा है...
मेरा नाता अपने से जोड़ के,तूने मेरी हर मुसीबत को टाल रखा है...
मैं तो कब का मिट गया होता, मेरे मालिक बस तेरी रहमतों ने मुझे संभाल रखा है.
 
जमाने लद जाते हैं दाग छुड़ाने में,
कातिल बनने में देरी नहीं होती।।
 
सीढ़ियाँ उन्हें मुबारक,
जिन्हें छत तक जाना है।
हमारा लक्ष्य तो आकाश है,
हमारा मार्ग हम स्वयँ तय करेंगे।
 
वो लोग भी चलते हैं आज कल तेवर बदल कर,


जिन्हें हमने ही सिखाया था चलना संभल कर !!
 
वो फिर आ मिले हमसे अपने लाभ के लिए,
और हम नादान समझे कि हमारी प्रार्थनाओं में प्रभाव है!!
 
मुझे ऊंचाइयो पर देखकर हैरान है बहुत लोग
पर किसी ने मेरे पैरों के छाले नहीं देखे....
 
जिस कश्ती के मुकद्दर में हो डूब जाना ।
तूफानों से बच भी निकले तो किनारे रूठ जाते हैं ॥
 
बुलंदी की उड़ान पर हो तो जरा सब्र रखकर हवाओं में उड़ो,
परिंदे बताते है कि आसमान में ठिकाने नहीं होते!!!!!
 
आज फिर हूँ मै उदास जाने क्यों ,
एक मायूसी सी छाई है ,,,
आज फिर एक सोच ने करवट बदली ,
भीड़ के भीतर ही तन्हाई है ..
 
कामयाबी कभी बड़ी नही होती, उसे पाने वाले बड़े होते है |
दरार कभी बड़ी नही होती, भरने वाले हमेशा बड़े होते है ||
 
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