Shayri (Continued)

झूठ बोलते हैं वो जो कहते हैं हम सब मिट्टी से बने हैं,


मैं एक शख़्स से वाक़िफ़ हूँ जो पत्थर का बना है.
 
आग लगाना मेरी फितरत में नही है ।

मेरी सादगी से लोग जले तो मेरा क्या कसूर?
 
क्या होगी मयस्सर उस नादाँ को लुत्फ़ ऐ जिंदगी... चला है रब को मनाने ...बन्दों को खफा करके..!!
 
आज के दौर में ऐ दोस्त ये मंज़र क्यूँ है
ज़ख़्म हर सर पे हर इक हाथ में पत्थर क्यूँ है

जब हक़ीक़त है कि हर ज़र्रे में तू रहता है
फिर ज़मीन पर कहीं मस्जिद कहीं मंदिर क्यूँ है

अपना अंजाम तो मालूम है सबको फिर भी
अपनी नज़रों में हर इंसान सिकंदर क्यूँ है
 
माौसम ने करवट ली ताे दाे लाइन याद आ गई ...


तेरे नयन खुले ताे सुबह, तेरी नींद संग आर्इ रात
कुदरत के करिश्मे जैसा, तेरा लगने लगा अंदाज
तेरा हंसना ठंड की दस्तक, रूठना गुनगन धूप सा
माौसम का बदलना भी, तेरे रूप सा है कारसाज
 
बच्चोँ के नाजुक हाथोँ को चांद सितारे छूने दो
चार किताबेँ पड़कर ये भी हम जैसे हो जाऐँगे
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निदा
 
"प्रेम चाहिये तो समर्पण खर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठा खर्च करनी होगी।

साथ चाहिये तो समय खर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्ते मुफ्त मिलते हैं ।
मुफ्त तो हवा भी नहीं मिलती ।
एक साँस भी तब आती है जब एक साँस छोड़ी जाती है..."
 
मिट्टी में ही होती है पकड़ मजबूत पैरों की,संगमरमर पर अक्सर मैंने लोगो को फिसलते देखा ..!!
 
Ashirwad hi maa ka aisa hai ki hasti hamari khoti nahi
jab tak main ghar na jaun, maa meri soti nahi
बुज़ुर्गों का मेरे दिल से अभी तक डर नहीं जाता |
कि जब तक जागती रहती है माँ मैं घर नहीं जाता ||
 
दुश्मनों ने लाख कोशिशें की गिराने की……पर दोस्त हमेशा दुश्मनों पर भारी पड़े…!
 
Aaj fir ankho me nami si hai,
Tere sath na hone ki kami si hai.
hogi mukamal mulkat dubara tumse hamari,
beeti ja rahi hai zindagi is chaht me hamari.
 
मेरे मरने के बाद मेरी कहानी लिखना,
कैसे बर्बाद हुवी मेरी जवानी लिखना,
और लिखना की मेरे होंठ खुशी को तरसे,
कैसे बरसा मेरी आँखूं से पानी लिखना,
और लिखना की उसका इंतेज़ार तो बहुत था,
आखरी साँसून में वो हिचक़ीयोन की रवानी लिखना,
लिखना के मरते वक़्त भी देता था दुआ तुझको,
हाथ बाहर था क़ाफ़ान से यही निशानी लिखना!!
 
हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हैं,
क्योंकि मित्रों के विरुद्ध चाल चलना हमें आता ही नहीं।
 
इतनी ठोकरे देने के लिये......शुक्रिया ए जिंदगीचलने का नही पर संभलने का हुनर तो आ गया!!
 
हैं दिल मे वफ़ा तो पत्थरो से आवाज़ आएगी...
तू उम्मीद को जिंदा रख ये कायनात तुझे एक सच्चे दिल से मिलाएगी..
 
तू छोड़ रहा है तो ख़ता इसमें तेरी क्या,
हर शख़्स मेरा साथ निभा भी नहीं सकता।
 
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