Shayri (Part 1)

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ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक हैं,
तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक है !!
वफा की उम्मीद, जिन्हे होगी उन्हे होगी,
हमे तो देखना है, तू बेवफा कहाँ तक है !!!
 
ये दुनिया वाले भी बड़े अजीब होते है कभी दूर तो कभी क़रीब होते है |
दर्द ना बताओ तो हमे कायर कहते है और दर्द बताओ तो हमे शायर कहते है ||

Paradox well explained !!!
 
Na Doulat pe naaz krte hai,
Na Shohrat pe naaz krte hai,
Kiya hai BHAGWAN ne JAAT k ghar paida,
Isi liye Apni kismat pe Naaz krte hai.
 
क्यू डरे जिंदगी में क्या होगा |
कुछ ना होगा तो तजुर्बा होगा ||
 
वो किसी की खातिर मुझे भूल भी जाए तो कोई बात नहीं
हम भी तो भूल गए है सारे ज़माने को उस की खातिर !!!
 
मेरे बाद किधर जायेगी तन्हाई
मैं जो मरा तो मर जायेगी तन्हाई !!

मैं जब रो रो के दरिया बन जाऊंगा
उस दिन उस पार उतर जायेगी तन्हाई !!

तन्हाई को घर से रुखसत कर तो दूँ
सोचो किस के घर जायेगी तन्हाई !!

वीराना हूँ आबादी से आया हूँ
देखेगी तो डर जायेगी तन्हाई !!

यूँ आओ के पाँव की भी आवाज़ ना हो
शोर हुआ तो मर जायेगी तन्हाई !!
 
गुज़र गया वो वक़्त जब तेरी हसरत थी मुझे,

अब तू खुदा भी बन जाये तो भी तेरा सजदा ना करूँ !!
 
दर्द नै सहणा तो दवाई
सिखावे सै
आदमी नै पीणा लुगाई सिखावे
सै
जन्मजात नही होता कोए
खुदगर्ज़
या हुश्यारी तो असनाई
सिखावे सै
शादी के बाद क्यूकर बसाणा सै
घर
यो ख्वाब सजाणा सगाई
सिखावे सै
जिनका वास्ता पड्या सै वे
जाणे सै
बड़े नै के कुछ छोटा भाई
सिखावे सै
तेरे साथ नै तो सदा बेचैन
करया सूं
महोब्बत तो मैंने तन्हाई
सिखावे स
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काले बणिये तं गोरे भाट तं !
कसुते अनपढ़ जिददी जाट तं !!
तरेड़ आयड़े चाक्की गे पाट तं !!
।। कत्ती बच गे रहणा चाहिये ।।
हड़बड़ाए हुये गल्ली के कुत्ते तं !
कड़कड़ाए हुए पैर के जुत्ते तं !!
आर गली म मलंग ताऊ सुत्ते तं !!
।। कत्ती बच गे रहणा चाहिये ।।
घणी रूसड़ी लुगाई तं !!
ज्यादा पढ़डे जमाई तं !!
नयी कुत्ती बियाई तं !!
।। कत्ती बच गे रहणा चाहिये ।।
भाई घणे बोलण आरे यार तं!
जमा नई दांती की धार तं !
मिट्ठे बोलणीये दुकानदार तं !
।। कत्ती बच गे रहणा चाहिये ।।

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आंख से आंख मिला, बात बनाता क्यूं है..
तू अगर मुझसे खफ़ा है, तो छिपाता क्यूं है..??

गैर लगता है ना अपनों की तरह मिलता है..
तू ज़माने की तरह मुझको सताता क्यूं है..??

वक्त के साथ हालात बदल जाते हैं..
ये हकीकत है मगर, मुझको सुनाता क्यूं है..??

एक मुद्दत से जहां काफ़िले गुज़रे ही नहीं..
ऐसी राहों पे चिरागों को जलाता क्यूं है..??
 
या बात कती गलत स
दर्द नै सहणा तो दवाई
सिखावे सै
आदमी नै पीणा लुगाई सिखावे
सै

जन्मजात नही होता कोए
खुदगर्ज़
या हुश्यारी तो असनाई
सिखावे सै
शादी के बाद क्यूकर बसाणा सै
घर
यो ख्वाब सजाणा सगाई
सिखावे सै
जिनका वास्ता पड्या सै वे
जाणे सै
बड़े नै के कुछ छोटा भाई
सिखावे सै
तेरे साथ नै तो सदा बेचैन
करया सूं
महोब्बत तो मैंने तन्हाई
सिखावे स
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तुम मुझे छोड़ कर, ठुकरा कर जा भी सकते हो
तेरे हाथों में मेरा हाथ है, जंजीर नहीं

 
हमने गुज़रे हुए लम्हों का हवाला जो दिया
हँस कर कहने लगे वो , रात गयी बात गयी

 
यूँ तो रखते रहे बचपन से दिल साफ़ अपना
पता नहीं था कि कीमत तो चेहरों की होती है

 
यूँ तो रखते रहे बचपन से दिल साफ़ अपना
पता नहीं था कि कीमत तो चेहरों की होती है



चेहरों में तलाशते है लोग ना जाने क्या कुछ |
कोई दिल में झांक के देखे तो बात ही क्या है ||
 
तू मेरे रूठने पे इस तरह मुझको मनाती है !
अब तो बेवजह भी तुझसे रूठने का जी चाहता है !!
 
तुमने ही किया था मोहब्बत की कश्ती में सवार ।
अब आँखें ना चुरा मुझे डूबता हुआ भी देख ।।
 
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