Shayri (Part 1)

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लोग पूछते थे की क्या तुम उनसे मोहब्बत का इजहार नहीं करते
हम ने कहा "जो लफ्जों में बयाँ हो जाए ,
सिर्फ उतना हम किसी से प्यार नहीं करते "
 
वहां से ना कोई दुआ ना कोई सलाम आता हे
जो ना चाहे वो अंजाम आता हे
वहां जा कर सब भूल जाते हैं
वहां से नहीं कभी कोई पैगाम आता हे
 
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]उदास ,तुझे देखने से पहले ये आँखे ना रहे [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]खफा हो तू मुझ से तो ये सांसें ना रहे [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]अगर जिन्दगी में कभी गम दूँ तुझे तो [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]दुआ हे मेरी उस रब से [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]तेरी जिन्दगी में हम तो क्या [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]हमारा नामो निशाँ ना रहे [/FONT]
 
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]हर बात समझाने के लिए नहीं होती [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]खहवाहिशें हमेशा पाने के लिए नहीं होती [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]याद अकषर आती हे आपकी [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif]पर हर याद जताने के लिए नहीं होती [/FONT]
[FONT=Tahoma, Calibri, Verdana, Geneva, sans-serif][/FONT]
 
जाम पे जाम लगा बेठे है
दिल के ग़मों को भुला बेठे हैं
अचानक वो आ गये मेरे सामने
गिरने लेगे उसके आंसू
उसके आंसुओं से अपना
जाम बना बेठे हैं
 
तुम उदास हो तो मेरी हंसी मांग लेना
कोई गम हो तुम्हे तो मेरी ख़ुशी मांग लेना
तुम्हे सौ साल की जिन्दगी मिले
अगर एक पल भी कम पड़े
तो मेरी पूरी जिन्दगी मांग लेना
 
जब भी चाँद को देखो ,हमें याद करणा
ये सोच कर नहीं, की खुबसूरत हैं वो
ये सोच कर की तनहा हैं वो
सितारों की भीड़ में
 
क्या हुआ ,दोस्तों ने हमें भुला दिया
गम नहीं, जिन्दगी ने हमें रुला दिया
हम तो हमेशा से ही अकेले थे
क्या हुआ ,तुम ने फिर से एहसास दिला दिया
 
आपकी महफ़िल का मौसम सुहाना लगे
इक पल चुरा लूँ ,अगर बुरा ना लगे
 
आपकी महफ़िल का मौसम सुहाना लगे
इक पल चुरा लूँ ,अगर बुरा ना लगे

कसूते शायर पाक रहे हो जमाने के
कै रपिये लोगे शरमाणे के
चुरा चुरा कै शेर गए नहि संपड
बेरा पाट ग्या आप शायर हो धिंगताणे के
मुम्बई मै रहया करो अक सो फरमाणे के
माहिर सो आप शेर काट पिट कै लगाणे के
एक आधा शेर अपणा भी घड लिया करो
नि तो कसूरवार खुद होगे मेरे तै अपणे आप को हराणे के
 
Kuch hum bhi the mayus bahut
kuch wo bhi humse rooth gaye
kuch pahle zakham ke aadi the
kuch sheeshe hath se toot gaye
kuch unko sach se nafrat thi
kuch humse na bole jhooth gaye
kuch ghaav the pahle se taza
kuch zakham puraane phoot gaye
kuch kismat ne rakha tanha
kuch mauke hath se chhoot gaye
kuch pahle hi khali tha daaman
kuch duniya wale loot gaye!!!!
 
Kuch hum bhi the mayus bahut
kuch wo bhi humse rooth gaye
kuch pahle zakham ke aadi the
kuch sheeshe hath se toot gaye
kuch unko sach se nafrat thi
kuch humse na bole jhooth gaye
kuch ghaav the pahle se taza
kuch zakham puraane phoot gaye
kuch kismat ne rakha tanha
kuch mauke hath se chhoot gaye
kuch pahle hi khali tha daaman
kuch duniya wale loot gaye!!!!
Seedhe seedhe keh de
Baaj thare joot gaye
 
Seedhe seedhe keh de
Baaj thare joot gaye

पुन्झअड़ नि ला सकदा तो कचोध जरूर मारे गा | जा सीधा-सीधा कह दे तो फेर शायरी क्यूकर होवेगी | तू भी कती खूंढ़ा का खूंढा अरह्वेगा |
 
Seedhe seedhe keh de
Baaj thare joot gaye

जूत इनका बाज्या तेरै क्यूं होई भडक
किम्मे हो ठा कै लिख दे सै तडके तडक
किम्मे अपणा भी कुछ जोर दिखाओ
ना तै पाकड ले अपणी आली सरडक (सडक)
 
कसूते शायर पाक रहे हो जमाने के
कै रपिये लोगे शरमाणे के
चुरा चुरा कै शेर गए नहि संपड
बेरा पाट ग्या आप शायर हो धिंगताणे के
मुम्बई मै रहया करो अक सो फरमाणे के
माहिर सो आप शेर काट पिट कै लगाणे के
एक आधा शेर अपणा भी घड लिया करो
नि तो कसूरवार खुद होगे मेरे तै अपणे आप को हराणे के


कुछ मेरे अपने लिखे होते हैं
कुछ फिजां से चुरा लेता हूँ
कुछ औरों के गाये सुन लेता हूँ
कुछ अपने भी गून-गुना लेता हूँ


--- रवि "अतृप्त "

मन्ने पहलम-अ छाप राखी स या | जा इब्बी समझ में कोणी आंदी ते फेर तेरी समझदानी छोटी स |
 
ख़ुश्क़ धरती की दरारों ने किया याद अगर
उनकी आशाओं का बादल हूँ बरस जाऊँगा
कौन समझेगा कि फिर शोर में तन्हाई के
अपनी आवाज़ भी सुनने को तरस जाऊँगा
 
बड़े दुखी उहे हम उस वक्त
जब उस्से कोई और चुरा ले गया
हम सपनों में देखते रहे
हकीकत कोई और बना ले गया
 
तड़प के देख किसी की चाहत में
तो पता चले इन्तजार क्या होता हे
यूँ मिल ज़ुए अगर कोई बिना तड़प के
तो केसे पता चले प्यार क्या होता हे
 
वो करीब ही नहीं आये तो इजहार क्या करते
खुद बने निशाना , तो शिकार क्या करते
मर गए, लेकिन खुली रही आँखें हमारी
इस से ज्यादा उनका इन्तजार और क्या करते
 
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